नालियों मे कुडा भरा हुआ है। कई जगहो पर तो सीवरेज का गन्दा पानी भी नालीयों में छोड दिया जाता है। जिस कारण लोगों को पैदल चलते समय मुंह मे रुमाल रख कर चलना पडता है

शिमला- वैसे तो करसोग को नगर पंचायत का दर्जा प्राप्त है। लेकिन यह तो मात्र कागजों तक ही सिमित है। क्योंकि वास्तव में सुविधाओं का कहीं भी नाम तक नही है। करसोग बाजार में नालियों के उपर लोहे के जाले बिछा दिए हैं। लेकिन यह कई जगह से टूट गए हैं। या तो कई जगह से गाडी से इन जालों के उपर चढा कर तोडा गया है। जिस कारण इन नालियों में कूडा कर्कट चला जाता है। कुछ लोग तो इन नालियों में जान बुझ कर कुडा फैंक देते है। जिस कारण नालियां कुडा कर्कट मिटटी रेत आदि से भर जाती है।

थोडी सी बारिष होने पर नालियां बन्द हो जाती है। और गन्दा पानी सडकों पर निकल जाता है। सडक पानी से भर जाती है। पैदल चलने बालों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पडता है। वारिश के समय गाडियां तो चलती ही है। सडक पर कीचड होने के कारण वह कीचड दुकानों पर बिखर जाता है व दुकानदारों का सामान भी गन्दा हो जाता है।

Karsog Himachal

कई बार तो पैदल चलने वालो के कपडों भी गंदे हो जाते है। सुबह के समय जब दुकानदार दुकान खोलने आते है सबसे पहले हाथ मे डंडा लेकर नाली को साफ करना पडता है। उस के बाद वह अपनी दकान को खोलता है। वारिश के समय मे यहा पर व्यापार मण्डल के प्रधान की दुकान के सामने उपर से कुडा बहता हुआ आता है व यहा पर समतल जगह होने के चलते सब यहां पर ठहर जाता है। जिस वजह से यहां पर दुकानदारी करना भी मुश्किल हो जाता है।

वैसे तो इस नगर पंचायत मे गत समय मे पांच बार्डों मे चुनाव भी हुए है। लेकिन जनता के द्वारा चुने गए पार्षद भी शायद जनता को भुल गए हैं। उन की समस्याओं को सुलझाना तो दूर की बात है उन को तो अपनी कुर्सी की चाह थी वो पुरी हो गई। अब तो पार्षदों के दर्शन भी दुर्लभ हो गए है। सफाई वयवस्था तो राम भरोसे ही है। नालियों मे कुडा भरा हुआ है। कई जगहो पर तो सीवरेज का गन्दा पानी भी नालीयों में छोड दिया जाता है। जिस कारण लोगों को पैदल चलते समय मुंह मे रुमाल रख कर चलना पडता है।

गर्मियों मे तो नालियों मे और भी बदबू ज्यादा होती है। वही मच्छरों के लिए भी संजीवनी का काम भी ये नालियां ही कर रही है। जगह जगह पर गन्दगी के ढेर लगे हुए हैं। कुछ दिनों पहले टैक्टर से कुडा उठाया जाता था लेकिन अब वह भी नही हो रहा है। प्रशासन तो शायद गहरी नींद सोया हुआ है। गत दिनों पहले व्यापार मण्डल की ओर से एसडीएम को भी इस बारे मे अवगत करवाया गया था। ओैर कोरे आश्वासन के सिवाए कुछ भी हाथ नही लगा। एक तरफ प्रदेश के प्रधानमंत्री के द्वारा स्वच्छ भारत का अभियान चलाया गया है। यहा पर तो इस के बिल्कुल उलट हो रहा है।

नगर पंचायत का दर्जा प्राप्त होने के बावजूद भी सफाई की ओर बिलकुल भी ध्यान नही दिया जा रहा है। जल्दी से इस समस्या का समाधान नहीं निकाला तो कई बीमारियों के लिए न्योता हो सकता है। जिस का समाधान निकालना मुश्किल हो गया है। करसोग में अगर ऐसा हो जाए तो इस पर काबू पाना असम्भव होगा। कुछ दिन पहले ही सडक पर पैच लगाने का काम किया गया था। अगर ऐसा ही पानी सडक पर विखरता रहा तो सडक दोबारा गढों मे परिवर्तित हो जायगी । प्रशासन तो आंख बन्द किए बैठा हुआ है। इन को तो आम जनता की परवाह ही नही है।

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