हिमाचल में 20 % बच्चे कुपोषण के शिकार, 5 साल की आयु भी नहीं कर पाते पूरी: सर्वे

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शिमला- प्रदेश में सही देखभाल की कमी से बच्चों में कुपोषण की समस्या बढ़ रही है। हर साल 1000 में से 42 बच्चे 5 साल की आयु भी पूरी नहीं कर पाते। यह बात हाल ही में हुए कई सर्वे में सामने आई है। एनएचएम ने लोगों से बच्चों की सही देखभाल और खुराक पर ध्यान देने की अपील की है।

मिशन निदेशक हंसराज शर्मा ने बताया कि 2005-06 में हुए सर्वे से खुलासा हुआ था कि प्रदेश में 20 प्रतिशत बच्चे जिनकी आयु 5 वर्ष से कम है, वे गंभीर कुपोषण से ग्रस्त हैं। 43 प्रतिशत बच्चे अपनी उम्र की स्वस्थ बच्चों की तुलना में कम वजन के हैं। 2013 में हुए सर्वे के अनुसार 1000 में से 42 बच्चे 5 वर्ष की आयु पूरी नहीं कर पाते।

इसकी वजह कुपोषण से ग्रस्त बच्चों में दस्त, खसरा, न्यूमोनिया और अन्य बीमारियों से लड़ने की क्षमता का घटना माना गया है। बताया कि जन्म के समय ढाई किलोग्राम से कम वजन वाले बच्चों को कमजोर माना जाता है। जन्म से दो वर्ष तक शरीर और मानसिक विकास के लिये सबसे महत्वपूर्ण होते हैं।

सही ध्यान देने पर सारी उम्र उसकी ज्ञान क्षमता, काम करने की ताकत और सेहत पर अच्छा असर होता है। अगर दो वर्ष तक बच्चे की सेहत की उपेक्षा करें तो कुपोषण बच्चे की सेहत और मानसिक विकास पर अपूरणीय क्षति हो चुकी होती है। ऐसे में बच्चे को कुपोषण से बचाने के लिए जन्म के तुरंत बाद गर्म रखना, साफ रखना और केवल माँ का दूध समय समय पर पिलाना बेहद जरूरी होता है।

गर्भवती महिला का भी रखें ख्याल

शर्मा ने बताया कि बच्चों में कुपोषण की मुख्य वजह आहार की कमी होती है। ऐसे में गर्भवती स्त्री का स्वस्थ रहना सबसे महत्वपूर्ण है। प्रेगनेंसी के दौरान महिला का कम से कम तीन बार वजन बढ़ने की जांच, खून की कमी की जांच, टेटनेस के टीके जरूरी हैं। इसके अलावा अनाज, दालें, हरी सब्जियां, और दूध, दही का सेवन भी जरूरी है। इसके अलावा जन्म के तुरंत बाद एक घंटे के भीतर बच्चे को माँ का दूध पिलाएं।

छह महीने का होते ही दें अनाज

बच्चे के छह माह की आयु पूरी होने पर बच्चे को ताकत के लिए ऊपरी आहार देना चाहिए। शर्मा ने कहा कि बच्चे को उचित मात्रा में केला, आलू, अनाज, चीनी, शकरकंदी, चावल, कनक और फल देना चाहिए। साथ ही नौ महीने का होने पर भोजन को मसलकर खिलाना चाहिए।

Photo: Youth ki Awaaz/Representational Image

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