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शिमला- पिछले वर्ष धर्मपुर बस अड्डे पर सात अगस्त की रात को आई बाढ़ के जख्म अब तक नहीं भर नहीं सके हैं। बाढ़ में बस अड्डे और लोगों की संपत्ति को करोड़ों का नुकसान पहुंचने के बाद आपदा प्रबंधन के नाम पर सिर्फ राजनीति ही हुई। बाढ़ में सब कुछ गंवाने वाले व्यापारी व लोग जैसे-तैसे दस महीनों में फिर पटरी पर लौट आए, लेकिन सरकारी लापरवाही की सारी हदें धर्मपुर बस अड्डे के नाम पर पार हो चुकी हैं। बड़ा सवाल यही है कि भारी बाढ़ के बाद आपदा के नाम न तो एक करोड़ रुपए मिले और न ही पौने दो करोड़ की पांच बसों को पूरी तरह से कबाड़ बनने से एचआरटीसी प्रबंधन रोक पाया।

Dharampur Mandi

बाढ़ में बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हुईं नौ बसों में अब भी पौने दो करोड़ की पांच बसों की मरम्मत एचआरटीसी प्रबंधन नहीं करवा सका है और ये बसें दस महीनों से धर्मपुर बस अड्डे पर खड़ी हैं। यही नहीं, परिवहन मंत्री ने बस अड्डा धर्मपुर को नुकसान से उबारने और फिर से ऐसी बाढ़ से बचाने के लिए एक करोड़ रुपए देने की घोषणा की थी। इस राशि से धर्मपुर बस अड्डे के आगे खड्ड में बहुत बड़ी रिटेनिंग दीवार लगनी थी, ताकि बाढ़ का पानी अंदर न आ सके, लेकिन दस महीनों में एक ईंट तक नहीं लग पाई। शायद निगम अब अगली बाढ़ की मार का इंतजार कर रहा है। उधर, निगम के डीएम एन सलारिया का कहना है कि शीघ्र ही बसों की मरम्मत करवाई जाएगी।

बसों के अंदर घास और चूहों का डेरा

दस महीनों में सरकार पौने दो करोड़ की बसों की मरम्मत नहीं करवा सकी है, लेकिन चूहों ने इन बसों को अपना घर बना लिया है। बसों के अंदर अब घास और पौधे तक पनप चुके हैं।

बाढ़ में डूब गया था बस अड्डा

सात अगस्त को आई बाढ़ में धर्मपुर बस अड्डा पूरी तरह से डूब गया था। बसों के अंदर रेत, मलबा, पेड़, पत्थर और पानी भर गया था। अब भी इन बसों की हालत ऐसी ही है।

एक बस की कीमत 35 लाख

धर्मपुर बस अड्डे पर मरम्मत के इंतजार में खड़ी बसों की कीमत 1.75 करोड़ रुपए है। एक-एक बस 35 लाख रुपए में खरीदी गई है। इनमें से चार बसें तो ऐसी हैं, जो एक किलोमीटर भी नहीं चली हैं, जबकि एक बस सिर्फ 10120 किलोमीटर चली हैं।

जांच पूरी, राजनीति हावी

बस अड्डे व बसों की मरम्मत बेशक दस महीनों में नहीं हो सकी है, लेकिन बस अड्डे को खड्ड में बनाने को लेकर जांच हो चुकी है और रिपोर्ट भी सरकार के पास पहुंच चुकी है। इसके साथ ही इसे लेकर कांग्रेस और भाजपा में राजनीति खूब हो चुकी है।

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