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कला और संस्कृति

7 दिवसीय नाटय समारोह के पहले दिन सात लघु कथाओं पर आधारित नाटक का मंचन

इसी क्रम में दिनांक 12 मई, 2016 को शाम 6:00 बजे राया रेपटटायर मुम्बर्इ की प्रस्तुति पियानों का मंचन किया जायेगा। जिसमें निर्देशन और मुख्य अभिनय रघुवीर यादव का है

भाषा एवं संस्कृति विभाग साहित्य एवं संस्कृति की अनेकों विधाओं में समय-समय पर अनेकों बहुविध कार्यक्रमों का आयोजित करता है। गत वषोर्ं विभाग ने शिमला सेलिब्रेट के अन्तर्गत अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों द्वारा शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर में शास्त्रीय संगीत, गायन और नृत्य के कर्इ कार्यक्रम करवाए तथा उच्चकोटि के नाटकों का मंचन भी करवाया गया। जिसमें सिने जगत के मंच मंझे हुए कलाकार शामिल हुए। विभाग गत वर्षो से मनोहर सिंह स्मृति नाटय समारोह का आयोजन करता आ रहा हैं। इस वर्ष तृतीय मनोहर सिंह स्मृति नाटय समारोह का आयोजन 11 से 17 मर्इ तक किया जा रहा है। जिसमें सूची के अनुसार प्रतिदिन नाटकों का मंचन किया जाएगा। गौरतलब है कि इस बार दर्शकों के लिए सुप्रसिद्ध और लोकप्रिय कलाकारों को आमंत्रित किया गया है। जो सभी फिल्म जगत के सुप्रसिद्ध कलाकार है।

शिमला शहर के साथ लगते क्वारा गांव के मनोहर सिंह में लोक नाटय करयाला के ‘पूर्तिया सूत्रधार) किरदार से प्रभावित होकर बचपन से ही नाटय अभिनय के अंकुरण् फूटने शुरू हुए। लोक नाटय करयाला से शुरू हुर्इ अभिनय की यह यात्रा कला के तुगलक सम्बोधनों से गुजरती हुर्इ निरन्तर निखरती गर्इ।

Language-&-Culture-shimla

सात दिवसीय इस नाटय समारोह के पहले दिन रेज़ प्रोडक्शन मुम्बर्इ द्वारा वन आन वन सात लघु कथाओं पर आधारित नाटक का मंचन किया गया। कचरे की हिफाज़त के लेखक अशोक मिश्रा तथा निर्देशन और अभिनय रजित कपूर का है। इसमें मुख्यमंत्री के अंगरक्षक की कहानी है जो दयनीय और उपहास का पात्र है, जिसकी रहस्यमयी सिथति में मौत दर्शायी गर्इ है। हेलो चैक के लेखक और निर्देशक राहुल डिकुनह और अभिनय अनू मेनन का है।

कहानी ओशिबाडा मुम्बर्इ की एक नटखट एवं आकर्षक गृिहणी पर आधारित है जो मीडिया में अपनी सामाजिक उपलबिधयों का बखान करती है। टीसी रासबिहारी के लेखक अशोक मिश्रा, निर्देशक रजित कपूर तथा अभिनय गगनदेव रियाड का है। यह एक टिकिट कलेक्टर की कहानी है जिसे हर बार टिकिट मांगने पर थप्पड़ पड़ता है जो आज बिना किसी गलती के थप्पड़ पड़ने पर हैरान है।

लोड शैडिंग के लेखक फरहाद सोराबजी, निर्देशक नादिर खांन तथा अभिनय आनन्द तिवारी का है। कहानी में वर्तमान राजनितिक परिदृश्य पर व्यंग्य कसा गया है। आबोदाना कहानी के लेखक पूर्वा नरेश, निर्देशक आकर्ष खुराना तथा अभिनय दिलशाद खुराना और आनन्द तिवारी का है। कहानी में महानगर के उथल-पुथल भरे जीवन में पेश आने वाली समस्याओं का बखान है। मजनू के लेखक हुसैन दलाल, निर्देशक आकर्ष खुराना तथा अभिनय रजित कपूर और हुसैन दलाल का है। इसमें भारत पाक सीमा पर तैनात दो फौजियों का संवाद दर्शाया गया है। इन्स्टेन्ट बेहोश कहानी के लेखक और निर्देशक राहुल डिकुनह तथा अभिनय अमित मिस्त्री का है। यह पकडे़ गये आतंकवादी की कहानी है जो अजमल कसाब से घृणा करता है और विश्वास करता है कि वह अच्छे व्यवहार से बहुचर्चित धारावाहिक बिग बास के अगले सींजन में मौजूद रहेगा।

नाटय समारोह के शुभारम्भ पर मुख्य अतिथि के रूप में प्रख्यात रंग समीक्षक श्रीयुत श्रीनिवास जोशी पधारें। कार्यक्रम का शुभारम्भ पारम्परिक दीप प्रज्वलन से हुआ। तत्पश्चात मुख्य अतिथि ने महान कलाकार मनोहर सिंह की जीवन झलकी प्रस्तुत की। उन्होंने मनोहर सिंह की नाटय कला के कर्इ उदाहरण दिये। मनोहर सिंह की नाटय प्रतिभा उनका कहना था कि मनोहर सिंह ने रंगमंच और सिने जगत के बड़े-बड़े कलाकारों के साथ काम किया और अपने कला लौहा मनवाया।

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कविता: ज़िंदगी के समंदर में

SHIMLA'S POETS

शिमला|वंदना राणा- हे ईश्वर बनाना नहीं इन्सान धरती पर,
इंसानियत का पाठ उसे अब पढ़ाया न जायेगा।

खिलाना न फूल किसी गुलशन में—
धूल का फूल चरणों में तेरे चढ़ाया न जायेगा।

पैदा होते बच्चों में मत भरना किलकारियां—
सिसकियां ले ले कर उसे हंसाया न जायेगा।

जिंदगी के समंदर में आयी सुनामियां
यहां किनारों में किसी को लाया न जायेगा।

सात सुरों के रंग मत भरना वाणी में —
बंदूक की नोक में उसे सुनाया न जायेगा।

खेत खलिहान धुंधले उजड़े हुए चाँद-सितारे–
गए मौसम बहारो के फिर से उन्हें बुलाया न जायेगा।

उजड़ी है बस्तियां गांव ओ शहरों में , बस भी जायेगी—
उजड़े दिल के आशियानों को बसाया न जायेगा।

वादिये जन्नत में दशहत गर्दों का आलम है–
पत्थरवाजों से सर अपना कहीं बचाया न जायेगा।

ज़मीं आसमां नदियां सागर पंछी पंख पसारे कहते
चलो उड़ चलें इस जहां में अब रहा न जाएगा।

हे ईश्वर! धर्म खातिर हो जाओ उजागर,
इंसा का बहता लहू हमसे देखा न जायेगा—।

जानिए लेखिका वंदना राणा के बारे में

वंदना राणा का जनम हिमाचल प्रदेश के जिला हमीपुर में हुआ और इनकी प्रारंभिक शिक्षा भी यहीं हुई। हमीरपुर कॉलेज से ही इन्होंने एमए हिंदी की है।वंदना ने शिमला से बीएड की डिग्री ली है। वंदना को कुदरत ने बचपन से ही आकर्षित किया है।

वंदना का कहना है कि उनका घर कुदरत की गोद में ही बना था। आसपास घने दरख्त,आम, केले, खट्टे किन्नु और कई फलदार वृक्ष थे। उन पेडों पर पंछियों को देख कर मन बहुत खुश हो जाता था। मैं कुदरत की गोद में बड़ी हुई हूँ। कविता लिखना मैंने कॉलेज के समय में शुरू किया था जो मेरा शौक ही बना गया। मेरे इस शौक को मेरे पति ने और भी निखार दिया और मुझे प्रोत्साहित किया।

रेडियो सुनने का बचपन से ही शौक था,फिर आकाशवाणी शिमला में रचनाये भेजी जो मेरी ही आवाज़ में प्रसारित हुई। जिससे मुझे बहुत खुशी हुई। बाद में हिमाचली बोलियों के कांगड़ी बोली के प्रसारण हेतु मेरा चयन हुआ तो यह लिखने का शौक और परवान चढ़ता गया।अब लिखना मेरा जीवन बन चूका है।

इसी शौक की वजह से मैंने रेडियो राईटिंग और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। जिस तरह बहती नदियां कई उबड़ खाबड़ रास्तों से हो कर गुजरती है उसी तरह मेरी लेखन यात्रा भी निरंतर बहती जा रही है।

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अकादमी के शिखर पुरस्कारों के वितरण में हेरा-फेरी, साल पूरा होने से पहले ही बाटें जा रहे साहित्य पुरस्कार:गुरुदत

शिमला- हिमाचल कला, संस्कृति-भाषा अकादमी के सचिव की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार वर्ष 2017 के तीन शिखर सम्मानों के लिए आगामी 26 अगस्त तक उपलब्धियों के विवरण सहित प्रविष्टियां मांगी गई हैं। उल्लेखनीय है कि 2016 के शिखर पुरस्कार गत् मार्च 2017 में दिए गए थे और अब पांच महीने बाद 2017 के पुरस्कार देने की भी तैयारी है, जबकि वर्ष 2017 के अभी चार महीने शेष हैं।

किसी भी वर्ष के पुरस्कारों के लिए प्रविष्टियां वर्ष पूरा होने के बाद ही आमंत्रित की जाती है, क्योंकि साहित्यकार और कलाकार वर्ष के अंत तक नई उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।

हिमाचल सर्वहितकारी संघ के अध्यक्ष एवं साहित्यकार गुरुदत शर्मा ने कहा कि किसी वर्ष के पुरस्कार अग्रिम रूप से देना किसी भी सूरत में नियमानुकूल नहीं कहे जा सकते। इस तरह तो अकादमी आगामी वर्षों के पुरस्कार भी अग्रिम रूप से दे देगी। पुरस्कार देना लाखों की राशि बांटना ही नहीं होता, बल्कि साहित्यकारों-कलाकारों की नियत अवधि के भीतर की रचनात्मक उपलब्धियों का सही मूल्यांकन होना चाहिए।

गुरुदत शर्मा ने कहा कि साहित्य के पिछले शिखर सम्मान को लेकर भी विवाद हुआ था, तब बिना सूचना दिए चुपचाप अकादमी के चंद सदस्यों को बैठाकर ही लाख रुपये के पुरस्कार बांट दिए गए थे।

इस बार अग्रिम रूप से पुरस्कृत करने का सीधा मतलब है कि वर्ष के अंत में होने वाले चुनावों से पहले ही वे पुरस्कार भी बांट देने हैं जो कायदे से वर्ष 2017 की उपलब्धियों का मूल्यांकन करके वर्ष 2018 में दिए जाने चाहिए। अकादमी के अधिकारी शायद ये मानकर चल रहे हैं कि आगे ये सरकार नहीं आएगी, इसलिए अभी अग्रिम मनमानी कर लें।

इस संदर्भ में गुरुदत शर्मा ने कहा कि किसी भी पुरस्कार की प्रविष्टियां मांगने के लिए कोई भी संस्था बाकायदा विज्ञापन जारी करती है, जिसमें नियमों आदि का उल्लेख भी किया जाता है। इस तरह प्रेसनोट जारी करके बेगार टालने का मतलब है कि इस योजना में बहुत जल्दी में पिछली बार की तरह मनमानी की जानी है।

साहित्यकार गुरुदत शर्मा ने कहा कि संसथा की ओर से अकादमी के अध्यक्ष तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा गया है कि इस सबसे बड़े पुरस्कार के नियम पहले प्रकाशित करके जाहिर किए जाएं और वर्ष 2017 के पुरस्कार साल पूरा होने पर देने के निर्देश जारी किए जाएं ताकि इस अकादमी की कार्यप्रणाली मजाक न बने।

उन्होंने कहा कि किसी पुरस्कार के लिए प्रकाशित साहित्य का मूल्यांकन जरूरी है। शिखर पुरस्कार के लिए कोई पुस्तकें नहीं मांगी जा रही। इसलिए इसमें मनमानी होने की पूरी संभावना है।

शर्मा ने कहा कि अकादमी के संविधान के अनुसार कार्यकारिणी के अध्यक्ष हिमाचल सरकार के भाषा-संस्कृति सचिव होते हैं लेकिन इस पद को किनारे करके संस्था के सचिव का पद भी नियमानुसार नहीं भरा गया। इसलिए अकादमी में चंद लोगों की मनमानी चल रही है।

उन्होंने कहा कि कम से कम साहित्य एवं कला-संस्कृति के क्षेत्र में तो उचित नियमानुसार काम होना चाहिए। गुरुदत शर्मा ने प्रदेश के साहित्यकारों व कलाकारों से भी अनुरोध किया कि अकादमी में चल रही मनमानी का विरोध करके इसके अनियमित कार्यक्रमों का बहिष्कार करें।

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हिमाचली फिल्म ने अमेरिकन फिल्म फेस्टिवल में जीता सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का अवॉर्ड, जानिए इस फिल्म की कहानी

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सांझ फिल्म अभी तक 2 अंतरराष्ट्रीय सम्मान जीत चुकी है। दुनिया भर से आई 750 फिल्मों से सांझ को सर्वश्रेष्ठ फिल्म घोषित किया गया। हिमाचली भाषा में बनी सांझ फिल्म

शिमला- अमेरिका में भारतीय फिल्‍म का डंका बजा है। अमेरिका के कैलिफोर्निया में हुए ‘बोरैगो स्प्रिंग्स फिल्म फेस्टिवल’ में ‘सांझ’ फिल्म को बेस्ट फीचर फिल्म का अवॉर्ड दिया गया।

सिनेमा को शुरू हुए 100 वर्ष से ज्यादा का समय हो जाने के बाद भी हिमाचली सिनेमा अभी तक अपनी पहचान नहीं बना पाया है। आज तक एक भी हिमाचली फिल्म बड़े पर्दे तक नहीं पहुंच पाई है लेकिन अपनी भाषा व बोली में फिल्म देखने का इंतजार कर रहे हिमाचल के लोगों का यह सपना जल्दी ही पूरा होने जा रहा है। हिमाचली भाषा में बनी सांझ फिल्म बड़े परदे पर नजर आने से पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खूब चर्चा बटोर रही है।

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सांझ फिल्म अभी तक 2 अंतरराष्ट्रीय सम्मान जीत चुकी है। 16 जनवरी को अमेरिका के कैलिफोर्निया में हुए ‘बोरैगो स्प्रिंग्स फिल्म फेस्टिवल’ में ‘सांझ’ फिल्म को बेस्ट फीचर फिल्म के अवार्ड से सम्मानित किया गया। इस फेस्टिवल में दुनिया भर से आई 750 फिल्मों से सांझ को सर्वश्रेष्ठ फिल्म घोषित किया गया। यह सम्मान ग्रहण करने के लिए फिल्म के सह-निर्माता अनिल चंदेल समारोह में उपस्थित थे।

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इस से पहले सांझ फिल्म को कैलिफोर्निया में ही अकोलेड ग्लोबल फिल्म कम्पटीशन में अवार्ड ऑफ मेरिट से भी सम्मानित किया जा चुका है। 26 जनवरी को सांझ फिल्म अमेरिका के लुसियाना स्टेट में ‘सिनेमा ऑन द बायू फिल्म फेस्टिवल’ में दर्शकों को दिखाई जाएगी।

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सांझ फिल्म दादी और पोती की कहानी पर आधारित है। दादी कुल्लू के दूर-दराज के गांव में अकेली रहती है जबकि उसका बेटा, बहू और पोती चंडीगढ़ में रहते हैं। बेटा वहां एक बड़े अस्पताल में डॉक्टर है। एक दिन उनकी खुशनुमा जिंदगी में एक घटना घटने के कारण वो बेटी को गांव में उसकी दादी के पास छोड़ जाते हैं। दादी काफी वक्त से अकेले रहने के कारण थोड़े चिड़चिड़े स्वभाव की हो गई है। जबकि पोती संजू जो पहले कभी गांव में नहीं रही वो अपने आप को अकेला महसूस करती है।

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दादी और संजू के बीच गांव का एक अनाथ लड़का है जिसकी नादानियां और शैतानियां इन दोनों के रिश्तों को मजबूत करने का काम करती हैं। फिल्म का निर्माण हमीरपुर स्थित साइलेंट हिल्स स्टूडियो के बैनर तले हुआ है और इसके निर्माता और निर्देशक अजय सकलानी है।

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अजय मंडी जिला के धर्मपुर के रहने वाले हैं। फिल्म की नायिका यानी संजू का किरदार चम्बा की अदिति चाड़क निभा रही हैं तथा मुख्य नायक जोंगा का किरदार मंडी के विशाल परपग्गा ने बखूबी निभाया है। फिल्म में पिता की भूमिका में बॉलीवुड के मशहूर एक्टर आसिफ बसरा नजर आएंगे जबकि मां का किरदार आंखों देखी फिल्म में चाची का किरदार निभा चुकी तरणजीत कौर निभा रही हैं।

वहीं दादी के किरदार में मंडी से रूपेश्वरी शर्मा नजर आएंगी। फिल्म का संगीत निर्देशन धर्मशाला के रहने वाले गौरव गुलेरिया ने किया है। फिल्म में दो गाने मशहूर गायक मोहित चौहान ने गाये हैं। फिल्म जल्द ही देशभर के सिनेमा घरों में रिलीज की जाएगी।

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