हिम रंग महोत्सव-2016 के पांचवे दिन नाटक “मेरा संघर्ष अधूरा रह गया” और लोकनाट्य “बुछेन” का मंचन

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25 मार्च को इसी क्रम में धाजा मण्डली, ऊना द्वारा लोकनाट्य ‘‘धाजा’’ एम्फी थियेटर में दोपहर 1 बजकर 30 मिनट पर प्रस्तुत किया जायेगा व उसके बाद अपराह्न 3 बजकर 30 मिनट पर गेयटी के बहुउदेशीय हाॅल में लोक शैली पर आघारित लोकनाट्य “जिजीविषा” बहस नाट्य एवं कला मंच, कुल्लू मंचित किया जायेगा तथा ऐतिहासिक गौथिक हाॅल में समारोह का सातवां नाटक ‘‘सुन्नी भुंकू’’एक्टिव मोनाल कल्चरल एसोसिएशन, कुल्लू द्वारा प्रस्तुत किया जायेगा।

शिमला- आज की प्रस्तुुति में त्रिवेणी कला संगम, हमीरपुर द्वारा नाटक “मेरा संघर्ष अधूरा रह गया” मंचित किया गया। जिसके लेखक तथा निर्देशक सुश्री कुमारी हेमलता रावत है। मेरा संघर्ष अधूरा रह गया का सार यही है कि सृष्टि के निर्माण में नारी का महत्वपूर्ण योग है। अगर नारी न होती तो सृष्टि का निर्माण कैसे होता। लेकिन आज सदियों से चला आ रहा नारियों पर जुल्म आज भी उतना ही है लोगों की मानसिकता काफी हद तक बदल चुकी है पर फिर भी आज भी शिकार हो रही हैं। (हिंसा) कितनी ही नारियां ऐसी है जो शोषण करते है।

Shimla Gaiety Theater

देश को आज़ाद हुए कितने ही साल हो गये लेकिन नारी उंचे से उचे पद की दशा आज भी पिंजरे में बंद पंछी की तरह ही है आकाश छूने के बाद भी नारियां किसी न किसी के पैरों तले दबी पर इस नाटक के जरिये एक ऐसे संघर्ष की ओर इशारा किया गया। जिससे हम नारियों की स्थिति को सुधार सकें उसके लिए हमें जरूरत है तो बस चुप्पी तोड़ने की।

Lahaul and Spiti

“हिम रंग महोत्सव-2016” की पहली कड़ी में दोपहर बाद लाहौली लोक नाट्य दल, लाहौल स्पिति द्वारा सुप्रसिद्ध लोकनाट्य “बुछेन” गेयटी सांस्कृतिक परिसर के खुले रंगमंच एम्फी थियेटर में प्रस्तुत किया गया। हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पिति,किन्नौर तथा जम्मू एवं कश्मीर के लद्दाख आदि जनजातीय क्षेत्रों में‘‘बुछेन’’लोकानुरंजन का महत्वपूर्ण साधन है।

बुछेन का वास्तविक नाम फोबर-रो-चोग है जिसका अर्थ है “आमाश्य (पेट) पर पत्थर तोडने का अनुष्ठान”। यद्यपि इसकी पृष्ठभूमि धार्मिक है व इसका उद्देश्य लोगों में बोद्ध धर्म के प्रति निष्ठा आस्था और रूचि जगाना है। यह भी मान्यता है कि इसके कलाकारों में दैविक शक्ति होती है। इसका उद्देश्य दैविय शक्ति के प्रदर्शन के साथ-साथ हास्य विनोद, आमोद-प्रमोद तथा मनोंरंजन भी है।

Himachal Artists

बुछेन के समारोह को लोग अपने-अपने घरों में विध्न निवारण तथा सामान्य रूप में घर की सुख-स्मृद्धि के लिए आयोजित करवाते हैं। नव वर्ष, विवाह के उपलक्ष्य तथा विशिष्ट अतिथियों के आगमन पर भी बुछेन का आयोजन किया जाता है।

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