शिमला शहर की जनता पर पानी का फलैट रेट, सेनेटरी सैस, युनिट एरिया मेथड थोपना न्याय संगत नहीं : लोकहित पार्टी

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Shimla

शिमला- शिमला की जनता पर लगाये जा रहे तरह- के करों की निंदा करते हुए शिमला लोकहित पार्टी ने कि कहा शहर की आम जनता जो यहां की स्थाई मूल निवासी है पर आए दिन नए नए तरीकों से थोपा जा रहा गुंडा टैक्स सैस जायज नहीं! पार्टी ने कड़ा विरोध करते हुए कहा कि शिमला की जनता नेताओं व अधिकारियों के अखराजात व तनख्वाह के लिए इनके अरमानों को पूरा नहीं करने देगी!

शिमला संसदीय क्षैत्र के प्रवक्ता देशबन्धु सूद और मंडी संसदीय क्षेत्र के प्रवक्ता हरीश गुलेरिया ने इस सन्दर्भ में बताया कि शिमला में ब्रिटिश काल से शहर के बसने से लेकर आज तक सब मौलिक सुविधाएं जो एक उच्च स्तरीय नागरिक से लेकर साधारण नागरिक तक उपल्बध थी उसका वर्तमान समय मे इस तरीके से सरकारीकरण कर दिया गया है!

प्रवक्ता ने बताया कि अतिक्रमण व उचीं पहुंच वाले नाजायज भवन निर्माताओं को नियमों को ताक पर रखकर इन मूलभूत सुविधाओं को उपल्बध करवाने के लिए शिमला शहर वासियों पर तरह-तरह के टैक्स जैसे भवनों पर युनिट एरिया मेथड व पानी का फलैट रेट व सेनेटरी सैस लगाना कहां तक न्याय संगत व उचित है क्योँकि जब यह जन सुविधाएं ब्रिटिश पजांब सरकार के समय से जिन लोगों को उपल्बध है उनसे वह सुविधाएं छीनकर उन्हे तो दडिंत किया जा रहा है और माफियों को सुविधाएं दी जा रही हैं!

पार्टी का कहना है कि इसका प्रमाण वर्तमान सरकार के स्थानीय निकाय मंत्री द्वारा विधानसभा में दिए गए इस ब्यान से कि सैस मर्ज एरिया से नहीं लिया जाएगा। हिलोपा ने पूच्छा कि जिसके पास यह सुविधा है उससे यह सुविधा छीन कर जब दुसरे को दी जाती है तो उस पर तरह तरह के टैक्स थोपना कहां तक न्याय संगत है!

लोकहित पार्टी का यह भी कहना है कि फडी़ फेरी वालों को बसाने के लिए हर रोज नित नए नए शगुफे छोड़े जा रहे हैं जो कि वोटो की राजनिती के चलते स्थानीय निवासियों को असुविधाएं व तकलीफ सहन करने के लिए मजबूर किया जा रहा है! जिसके लिए पार्टी इन अधिकारिओं व नेताओं को जनहित में इन असैंविधानिक थोपें गए करों को वापिस लेने की मांग की और कहा कि समय रहते कार्यवाही अमल न ल पाने की स्तिथि मे आने वाले नगर निगम चुनावों में इसका पता चल जाएगा और साथ में ही अगर इसके लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा तो पार्टी गुरेज नहीं करेगी!

Image Credit: Jane Sweeney/Corbis

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