चढ़ावे में हेरफेर पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले वर्ष 2013 में भी ऐसा हुआ था

कांगड़ा- कांगड़ा जिला में स्थित ज्वालामुखी मंदिर में चढ़ावे में हेरफेर मामले की जांच प्रशासन ने शुरू कर दी है मगर जांच का जिम्मा मंदिर अधिकारी को दिया गया है। मामले की जांच कर रहे मंदिर अधिकारी अशोक पठानिया तहसीलदार हैं। हैरानी की बात यह है कि जिस वीडियो में हेरफेर का संदेह जताया जा रहा है, उसमें मंदिर अधिकारी भी बैठे दिखाई दे रहे हैं।

मंदिर अधिकारी जब गणना कक्ष से उठते हैं तो एक ट्रस्टी वीडियो में चढ़ावे में हेरफेर करते दिखता है। ट्रस्टी को मंदिर के चढ़ावे की गणना करने का अधिकार ही नहीं है। ऐसे में मंदिर अधिकारी ने उन्हें उस समय क्यों नहीं रोका। जब मंदिर अधिकारी ने इस लापरवाही पर संज्ञान नहीं लिया तो अब निष्पक्ष जांच की उम्मीद कैसे की जा सकती है?

सवाल यह भी है कि ट्रस्टी तभी हेरफेर क्यों करता है जब मंदिर अधिकारी कक्ष से बाहर जाते हैं? वहीं, इस मामले की जांच को लेकर प्रशासन सतर्क नहीं है। चढ़ावे में हेरफेर पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले वर्ष 2013 में भी ऐसा हुआ था। उस समय मंदिर अधिकारी की संलिप्तता पाई गई थी। ऐसे में प्रशासन की ओर से जांच का जिम्मा किसी अन्य अधिकारी को न देना भी कई सवाल खड़े कर रहा है।

हालांकि प्रशासन का तर्क है कि अभी आंतरिक जांच हो रही है मगर आंतरिक जांच में ही खामियां होंगी तो सख्त कारवाई की उम्मीद कैसे की जा सकती है। देश व दुनिया के लाखों श्रद्धालु ज्वालामुखी मंदिर में शीश नवाने आते हैं। श्रद्धालु मंदिर के लिए दान करते हैं लेकिन पैसे की चाह में लोगों की आस्था से खिलवाड़ हो रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता राजीव खोसला ने कहा कि यह मामला गंभीर है। पहले भी ऐसा हुआ था लेकिन प्रशासन ने उस मामले से कोई सबक नहीं लिया। व्यवस्थाओं में कोई सुधार नहीं हुआ है। लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ न हो, इसके लिए सख्त नियम और उनका अनुसरण मंदिर प्रशासन की ओर से किया जाना चाहिए। गणना कक्ष में सुरक्षा व्यवस्था पूरी होनी चाहिए।

बाद में बनेगी विस्तृत जांच रिपोर्ट

मंदिर अधिकारी तहसीलदार हैं जो आंतरिक जांच कर रहे हैं। वह जांच रिपोर्ट मुझे सौंपेंगे जिसे उपायुक्त के पास भेजा जाएगा। विस्तृत जांच रिपोर्ट बाद में बनेगी।

संजीव कुमार, एसडीएम ज्वालामुखी

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