मलयाणा वाटर सैंपल फिर से टेस्टिंग में फेल, आईपीएच महकमे को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का नोटिस

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शिमला— पीलिया के कहर से त्रस्त शिमला के लिए फिर से यह बुरी खबर है कि मलयाणा का जो फिल्टरेट अश्बनी खड्ड में मिल रहा है, उसके सैंपल फिर से फेल हुए हैं। लिहाजा आईपीएच महकमे को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने फिर से नोटिस थमा दिया है। यह भी निर्णय लिया गया है कि आगामी महीने तक हर दिन फिल्टरेट के सैंपल लिए जाते रहेंगे।

हालांकि प्रावधान यही है कि हर तीन महीने बाद टेस्टिंग होनी चाहिए। सूत्रों के मुताबिक, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा परवाणु प्रयोगशाला में जो सैंपल 20 जनवरी को भेजे गए थे, वे फेल पाए गए हैं। इस सैंपल की रिपोर्ट बुधवार को ही पहुंची है। यानी दावों के विपरीत अब भी अश्बनी खड्ड का पानी पीने योग्य नहीं ठहराया जा सकता।

वाटर टेस्टिंग के लिए क्योंकि ज्यादा समय लग रहा है, इसलिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अब फैसला लिया है कि शिमला में ही एक वाटर टेस्टिंग लैब स्थापित की जाए, ताकि हर तीसरे या दूसरे दिन राजधानी में स्थापित किए गए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के फिल्टरेट की बाकायदा तय समय अवधि में टेस्टिंग हो सके और लोगों के स्वास्थ्य से किसी भी तरह का समझौता न करना पड़े। अभी तक यह सुविधा बड़ी लैब के तौर पर परवाणु में ही मुहैया करवाई गई है।

शिमला में पीलिया से प्रभावित लोग इतने सहमे हुए हैं कि राजधानी में गन्ने बेचने वालों की भी चांदी हो रही है। शिमला के बाजारों में गन्ने के रस का एक गिलास 20 रुपए में बिक रहा है। प्रभावित क्षेत्रों के लोग बोतलों में भरकर गन्ने का रस ले जा रहे हैं। यही आलम पीलिया झाड़ने वालों के घरों का भी है, जहां लोग कतारों में दिनभर खड़े रहते हैं।

विभागों की सुस्ती

मोदी सरकार ने नमामि गंगे प्रोजेक्ट में एक वर्ष पहले हिमाचल को भी शामिल किया था। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इसके लिए आईपीएच व शहरी विकास विभाग को प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए लिखा था, ताकि संवदेनशील इलाकों में सीवरेज ट्र्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए जा सकें। हैरानी की बात है कि प्रोजेक्ट तैयार करना तो दूर, संबंधित सरकारी महकमों ने प्रतिक्रिया तक नहीं दी।

Photo: Hindustan Times/Representational image

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