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चित्र: Fair Observer/Representational

शिमला में पीलिया फैलने के बाद भी शहर में पानी की आपूर्ति कम हुई थी जिससे आम आदमी को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। अब भी यही हाल प्रदेश की राजधानी में देखने को मिल रहा है। जिस राजधानी को स्मार्ट सिटी बनाने की बात कही जा रही थी उस शहर की आम जनता बून्द बून्द पानी के लिए मोहताज है।

शिमला- प्रदेश सरकार ने नगर निगम का क्षेत्र बढ़ा दिया। 25 से 35 वार्ड बनाकर शिमला नगर निगम को प्रदेश के सबसे बड़े निगम का दर्जा दे दिया। मगर आज भी लोगों की प्यास बुझाने के लिए पर्याप्त पानी नहीं है। प्रदेश सरकार के साथ हर विभाग का अधिकारी शिमला में विराजमान है। फिर भी पेयजल की बेहतर और सब तक पहुंचाने वाली कोई भी योजना धरातल पर खरी नहीं उतर रही है।

मुख्यमंत्री का विधानसभा क्षेत्र शिमला ग्रामीण का कुछ हिस्सा भी नगर निगम में है। सरकार के करीबी नेता शिमला शहर से चुनाव लड़ते हैं, लेकिन लोगों को पानी मुहैया करवाने के लिए कोई ठोस कार्य करता नजर नहीं आ रहा है। शहर में कहीं चार दिन तो कहीं दस दिन बाद पानी आ रहा है। पानी की आपूर्ति रात के अंधेरे में होती है। कभी एक बाल्टी भर जाती है तो कभी दो या तीन। रोजाना पानी की आपूर्ति शहर में नहीं होती है।

ग्रेटर शिमला बनाकर पानी की आपूर्ति का सारा जिम्मा नगर निगम के कंधों पर प्रदेश सरकार ने डाल दिया। ग्रेटर शिमला के लिए किसी भी प्रकार के फंड की व्यवस्था प्रदेश सरकार ने नहीं की। नगर निगम शिमला ने अमृत योजना के तहत मिलने वाली करोड़ों रुपये की राशि से पानी को घरों तक पहुंचाने का सपना देखा है। इसी आड़ में 24 घंटे पानी का वादा आम जनता से नगर निगम मेयर और डिप्टी मेयर ने किया। शिमला की पौने तीन लाख से अधिक की आबादी के लिए हर दिन पंद्रह एमएलडी कम पानी की आपूर्ति हो रही है। इस पानी की कमी का हल सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग व नगर निगम शिमला ने तीसरे और चौथे दिन पानी की आपूर्ति कर निकाला था।

एक व्यक्ति को 135 लीटर प्रतिदिन पानी की आवश्यकता

पानी के लिए निर्धारित मैनुअल के आधार पर हर व्यक्ति को एक दिन में करीब 135 लीटर पानी की जरूरत होती है। लेकिन राजधानी में एक व्यक्ति के लिए 80 लीटर से भी कम पानी की आपूर्ति हो रही है।

42एमएलडी है शहर की जरूरत

शिमला शहर को हर दिन 42 एमएलडी पानी की आवश्यकता होती है। लीकेज के कारण शहर तक पहुंचता 30 एमएलडी से भी कम ही है। शहर में अधिकांश पाइप लाइनें कई साल पुरानी ही बिछी है, जिनमें लीकेज की दिक्कत आती है। लीकेज से पांच से सात एमएलडी पानी व्यर्थ हो जाता है। पानी की किल्लत का सबसे बड़ा कारण जगह-जगह पानी का रिसाव है।

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