अतिक्रमण हटाने के मामले में दोगली नीति अपना रहा है लोक निर्माण विभाग: विकास समिति टूटू

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अतिक्रमण हटाने के मामले में टुटू की जनता में रोष – भवन मालिको द्वारा सड़क किनारे लगाए गए डंगों को अवैध निर्माण बता रहा है लोक निर्माण विभाग, भवन व् मकान को जाने वाले रास्तों /सीढ़ियों को अवैध बता रहा है विभाग, व्यापारी वर्ग सकते में कैसे कमाएंगे रोजी -रोटी, दोगली नीति अपना रहा है लोक निर्माण विभाग नगर -निगम की सीढ़ियां वैध साथ लगती अवैध, एक तरफ़ा कार्यवाही करने पर जनता में है रोष व्याप्त, न्यायालय के आदेशों को ढाल बना कर कोई सुनवाई नहीं कर रहा विभाग

शिमला- गत दिनों हिमाचल में सड़क किनारे अतिक्रमण मामले में उच्च -न्यायालय के आदेशों के मध्यनजर शिमला -नालागढ़ सड़क पर टुटू से जुब्बड़हट्टी तक के क्षेत्र में लगभग 85 भवन मालिको को सड़क की भूमि खाली करने के लिए हिमाचल प्रदेश रोड इंफ्रास्ट्रक्चर नियम-2002 के तहद नोटिस थमाए गए जिस कारण स्थानीय भवन मालिको की एक बार फिर नींद हराम हो गई है और भवन मालिक फिर से एक बार मानसिक दवाब में हो गए है !

पिछले दिनों विभाग ने दोबारा एक तरफा कार्यवाही करते हुए व्यक्तिगत सुनवाई को भी नजर अंदाज करते हुए लाखों रुपये सरकारी भूमि के एरियर के रूप में थमा दिए और एक सप्ताह के भीतर अवैध निर्माण हटाने के आदेश पारित कर दिए ! इस संदर्भ में जब स्थानीय भवन मालिकों को पूछा गया तो उन्होंने मीडिया से आप-बीती साँझा की और कहा कि न्यायालय के आदेशों का पालन करना सभी का दायित्व बनता है और विभाग को भी चाहिए कि वह सड़क को चौड़ा करने के मापदंडों को सभी विभागों पर चाहे नगर-निगम हो या कोई अन्य विभाग या सड़क किनारे बसे लोग उन पर एक समानता रखते हुए कार्यवाही करनी चाहिए !

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वहीँ दूसरी ओर अवैध निर्माण के मामले में विकास समिति टुटू के अध्यक्ष नागेन्द्र गुप्ता से बात की गई तो उन्होंने कहा कि प्रदेश लोक निर्माण विभाग ने लाखों रुपये का एरियर सड़क किनारे बसे लोगों को बिना तथ्य इक्क्ठे किये वर्तमान दरों के आधार पर थमा दिए हैं जबकि निर्माण आज से लगभग 30 -40 वर्ष पूर्व हुआ है और सच्चाई यह है की शिमला -नालागढ़ सड़क किनारे की आज से लगभग 30- 40 वर्ष पूर्व विभाग कोई सुध नहीं लेता था उस समय भवन मालिको ने सड़क किनारे डंगों को लगाकर सड़क को गिरने से रोका था और अपने भवनो को जाने -जाने के लिए सीढ़ियों व् रास्तों का निर्माण किया था जो की विभाग को नियमानुसार सड़क किनारे बसे हुए लोगों की मूलभूत सेवाओं के दृष्टिगत देना भी अनिवार्य है !

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गुप्ता ने कहा कि अतिक्रमण मामलों में वर्ष -1993 में शिमला -नालागढ़ सड़क पर बसे भवन मालिको पर उप-मडंल (ग्रामीण ) कोर्ट में भी कार्यवाही हो चुकी है और तत्कालीन एस. डी. एम. ने मौके पर अवैध निर्माण को हटवा कर भवन मालिकों /दुकानदारों को सीढ़ियां व् रास्तों को
पीछे करने के निर्देश जारी किये थे !

उन्होंने कहा कि अतिक्रमण मामले में विभाग दोगली नीति अपना रहा है जबकि एक ओर भवनों के रास्ते तोड़ने उतारू हुआ है वहीँ दूसरी ओर इसी सब डिवीजन के अधीन विभाग ने पिछले दिनों प्रभावशाली ठेकेदारों को कारोबार चलाने के लिए सड़क की सरकारी भूमि पर सड़क बीचो-बीच ढारे बनाने की इजाजत भी दी है जिसे की विभाग वैध मानता है !

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वहीँ दूसरी ओर विकास समिति के प्रैस सचिव सुरेन्द्र कुमार का कहना है कि वर्ष -2011 में भी अवैध निर्माण हटाने के मामले तत्कालीन अधिशासी अभियंता डिवीजन नंबर -2 के पास व्यक्तिगत सुनवाई के समय निपटाये जा चुके हैं अब दोबारा से नोटिस थमा दिए गए हैं !
उन्होंने कहा कि बार-बार लोक निर्माण विभाग भवन मालिको को नोटिस थमा कर बेवजह परेशान कर रहा है जबकि मौके पर विभाग द्वारा लगाई गई येलो लाईन भी कई मर्तवा आगे -पीछे खुद बदल दी जाती है !

सुरेन्द्र कुमार ने कहा कि वर्तमान समय में जिसे लोक निर्माण विभाग अतिक्रमण की संज्ञा दे रहा है वह सिर्फ सड़क किनारे भवन मालिको द्वारा लगाए गए डन्गे है और यदि विभाग द्वारा दिए गए नोटिस /बिलों को देखकर सड़क किनारे लगे डंगों को भवन मालिकों द्वारा गिरा दिया जाता है तो सड़क का काफी भाग गिर सकता है जिससे ट्रैफिक में भी अवरोध पैदा हो सकता है ! उन्होंने कहा कि विभाग के आला अधिकारियों को कई मर्तबा जहाँ सड़क को चौड़ा करना अति अनिवार्य है के लिए आग्रह किया गया है लेकिन विभाग के आला अफसर गंभीर नहीं है !

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व्यापार मंडल टुटू ने भी दुकानों को आने-जाने वाले रास्तों को तोड़ने के नोटिस देने को जनहित में सही नहीं ठहराया है इससे लोगों का कारोबार भी प्रभावित होगा ! व्यापार मंडल के अध्यक्ष ने कहा कि कई बार विभाग को इस मार्ग के बाधित बिजली के पोल व् सड़क किनारे छोटे -छोटे अवरोधों को दूर करने की मांग की गई है ताकि तंग स्थलों पर सड़क को चौड़ा किया जा सके जहाँ रोजाना ट्रैफिक जाम लगता है लेकिन अभी तक पिछले कई वर्षों में कार्यवाही जीरो है !

उन्होंने कहा कि मौके पर लोक निर्माण विभाग द्वारा की गई पैमाइश व् लगाई गई येलो लाईन के दायरे में भवन मालिको के रास्ते या दुकानो को जाने वाली सीढ़ियां या रैम्प इत्यादि ही शामिल है और विभाग को चाहिुए की अतिक्रमण को हटाने की जगह साथ -साथ सड़क को चौड़ा करे ताकि भवन या दुकानों को आने-जाने के लिए खुद-ब -खुद सड़क किनारे से रास्ता मिल जाए !

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विकास समिति टुटू के अध्यक्ष नागेन्द्र गुप्ता ने कहा कि टुटू चौक पर सड़क को चौड़ा करने में सबसे बड़ी बाधा लोअर -टुटू को जाने वाला निगम का पैदल मार्ग है जब तक उसे बदला नहीं जाता सड़क की चौड़ाई होना सम्भवं नहीं ! उन्होंने कहा की वह माननीय न्यायालय के आदेशों का मान-सम्मान करते है और आमजनता भी चाहती है कि रोजाना लगने वाले ट्रैफिक जाम से भी जनता को राहत मिले विशेषकर जब एम्बुलेंस जैसी आपातकाल सेवायें प्रभावित होती हैं लेकिन अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ लोक निर्माण विभाग को अपनी भूमि को काबिज करने तथा चौड़ा करने के आदेश जारी होने चाहिए !

उन्होंने कहा कि प्राय: देखा गया है कि सड़क किनारे भवनों को आने -जाने वाले पक्के ब्रिज व् रास्ते तोड़ दिए जाते है और उन स्थलों को चौड़ा करने की जगह मालिको को स्टील ब्रिज बनाने की इजाजत दे दी जाती है जो कि सिर्फ राष्ट्र संपत्ति का नुकसान है ! गुप्ता ने कहा कि न्यायालय के आदेशों को ढाल बना कर विभाग कई मर्तवा बेक़सूर को भी कसूरवार साबित करने की कोशिश करता है जो कि न्यायसंगत नहीं है !

ज्ञात रहे कि अतिक्रमण मामले में शिमला -नालागढ़ सड़क किनारे एयरपोर्ट तक बसे भवन मालिकों को सहायक अभियंता ,जतोग सब डिवीजन व् शिमला ग्रामीण डिवीजन ने नोटिस थमाए हुए हैं !

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