जाम की समस्या नियंत्रित करने के लिए शिमला में भी लागू हो सकता है ऑड-इवन फार्मूला

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शिमला- दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की तरह नगर निगम शिमला के मेयर संजय चौहान और डिप्टी मेयर टिकेंद्र पंवर राजधानी शिमला में वाहनों के लिए ऑड-इवन फार्मूला लागू करने के पक्षधर हैं। दिल्ली में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए केजरीवाल ऑड-इवन फार्मूला लेकर आए हैं।

लेकिन मेयर, डिप्टी मेयर शिमला शहर में बढ़ते वाहनों के कारण विकराल होती जा रही जाम की समस्या को नियंत्रित करने के लिए आड-इवन फार्मूले को विकल्प के रूप में देखते हैं। सोमवार को पत्रकारवार्ता के दौरान नगर निगम के डिप्टी मेयर टिकेंद्र पंवर ने बताया कि ऑड-इवन फार्मूले को लेकर दिल्ली में एक से 15 जनवरी तक होने वाले ट्रायल का हम बारीकी से अध्ययन करेंगे।

उसके बाद शिमला के लिए ऑड-इवन फार्मूले का ड्रॉफ्ट बनाया जाएगा। पंवर ने बताया कि प्रदेश सरकार की ओर से अप्रूव की गई अर्बन मोबिलिटी ट्रांसपोर्ट ऑथारिटी के चेयरमैन नगर निगम के मेयर हैं। इसी आधार पर नगर निगम प्रदेश सरकार को शहर में ऑड-इवन फार्मूला लागू करने का प्रस्ताव देगा। बताया कि एनजीटी ने शहर के सर्कुलर रोड को वन-वे करने के आदेश दिए हैं। वन वे सर्कुलर रोड के स्थान पर ऑड-इवन फार्मूला शहर के लोगों के लिएज्यादा व्यावहारिक साबित हो सकता है।

46 फीसदी लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर निर्भर

टिकेंद्र पंवर ने सिटी मोबिलिटी प्लान के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि शिमला शहर में 45 फीसदी लोग पैदल आवाजाही करते हैं। 46 फीसदी लोग आवाजाही के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करते हैं। 9 फीसदी लोग ऐसे हैं जो आने-जाने के लिए अपने निजी वाहन का इस्तेमाल कर रहे हैं।

20 मिनट की दूरी तय करने में लग रहा डेढ़ घंटा

शिमला में बढ़ते ट्रैफिक से अब 20 मिनट की दूरी डेढ़ घंटे में तय हो रही है। डिप्टी मेयर टिकेंद्र पंवर ने बताया कि शहर की आबादी लगभग 2 लाख है और टूरिस्ट सीजन में इतने ही लोग बाहरी क्षेत्रों से पहुंचे हैं। शहर में करीब 60 हजार वाहन पंजीकृत हैं और सैलानियों के आने से वाहनों की संख्या दुगनी हो गई है।

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