Connect with us

अन्य खबरे

लड़कियों की शिक्षा पर दिया जा रहा विशेष बलः मुख्यमंत्री

“सरकार 500 करोड़ रुपये के प्रारम्भिक निवेश से एक दक्षता विकास निगम स्थापित करने पर कर रही है विचार जिसके माध्यम से बेरोजगारी पर अंकुश लगाने के साथ.साथ प्रदेश के युवाओं को यहां स्थापित हो रहे उद्योगों में रोज़गार उपलब्ध करवाने में भी सहायता मिल सकेगी”

राज्य सरकार लड़कियों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दे रही है जिसके फलस्वरूप प्रदेश में महिला शिक्षा दर देश के अन्य क्षेत्रों की तुलना में बेहतर है। प्रदेश के राजकीय महाविद्यालयों में वर्तमान में 74,217 छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं जिनमें से 45,156 लड़कियां हैं जो कि कुल छात्रों का 60 प्रतिशत से भी अधिक है। प्रदेश में उच्च शिक्षा की समग्र दाखिला दर ;जीईआरद्ध 23.9 प्रतिशत है जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह दर 15 प्रतिशत है। सरकार का उद्देश्य इस दर को वर्ष 2020 तक 35 प्रतिशत तक ले जाने का है।

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह आज आरकेएमवी शिमला के 35वें वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह में बतौर मुख्यअतिथि शिरकत की और उन मेधावी छात्रों जिन्होंने शिक्षा , खेल एवं अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है उन सभी मेधावी छात्रों को पुरस्कृत भी किया और उन्हें बधाई देते हुए कहा कि इन छात्रों की उपलब्धियां अन्य को भी बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करेंगी। उन्होंने छात्रों को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करने के लिए प्रधानाचार्य एवं अन्य अध्यापकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस महाविद्यालय की समृद्ध परम्परा रही है और यहां से शिक्षा प्राप्त कर चुके अनेक छात्र विभिन्न क्षेत्रों में श्रेष्ठ योगदान दे रहे हैं

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राजकीय कन्या महाविद्यालय ;आरकेएमवी शिमला के कला एवं प्रशासनिक खण्ड के निर्माण के लिए पांच करोड़ रुपये प्रदान करने की घोषणा की। इस खण्ड की आधारशिला 9 अगस्तए 2007 को वीरभद्र सिंह ने ही कांग्रेस सरकार के पूर्व कार्यकाल में रखी थी , किन्तु पिछली भाजपा सरकार ने इस निर्माण कार्य के लिए आवंटित धनराशि को अन्यत्र खर्च कर दिया और इस परियोजना का कार्य अधूरा रह गया और इसके साथ ही वीरभद्र सिंह ने जिला प्रशासन को सरकुलर मार्ग पर आरकेएमवी के लिए उपयुक्त पार्किंग स्थल चिन्हित करने के निर्देश दिए ताकि छात्रों एवं अध्यापकों को सुविधा मिल सके। उन्होंने कहा कि छात्रों की सुरक्षा को सुनिश्चित बनाने के लिए महाविद्यालय के प्रांगण में काॅलेज के कार्य समय के दौरान महिला पुलिस आरक्षी की तैनाती की जाएगी। उन्होंने काॅलेज में नियमित फार्मासिस्ट और महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता तैनात करने की भी घोषणा की।

वीरभद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार 500 करोड़ रुपये के प्रारम्भिक निवेश से एक दक्षता विकास निगम स्थापित करने पर विचार कर रही है। जिसके माध्यम से बेरोजगारी पर अंकुश लगाने के साथ.साथ प्रदेश के युवाओं को यहां स्थापित हो रहे उद्योगों में रोज़गार उपलब्ध करवाने में भी सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में दक्षता विकास प्राधिकरण भी गठित किया जाएगा तथा अगले पांच वर्षों में कम से कम 5 लाख रोज़गार के अवसर सृजित करने के प्रयास भी किए जाएंगे।

साथ ही उन्होंने कहा कि प्रेस को लोकतंत्र का चैथा स्तम्भ माना जाता है तथा राज्य सरकार प्रदेश में उपयुक्त स्थान पर पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भी स्थापित करेगी।

मुख्यमन्त्री ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान कर रही है और प्रदेश के युवाओं को उनके घरों के समीप गुणात्मक शिक्षा सुविधाएं उपलब्ध करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

12वीं पंचवर्षीय योजना के अन्तर्गत प्रदेश में उच्च शिक्षा पर 962 करोड़ रुपये व्यय किए जा रहे हैं तथा इस वित्त वर्ष में 74 करोड़ रुपये व्यय कर राजकीय महाविद्यालयों एवं स्कूलों में भवन निर्माण को अतिरिक्त प्राथमिकता दी जा रही है। वर्तमान राज्य सरकार ने सत्ता संभालने के तुरंत बाद उन सभी 149 सरकारी विद्यालयों को पुनः खोलने का निर्णय लियाए जिन्हें पिछली सरकार के कार्यकाल में डी.नोटिफाई कर दिया गया था। इनमें 34 प्राथमिकए 66 माध्यमिक , 25 उच्च एवं 24 वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने राजकीय विद्यालयों के सभी छात्रों को घर से स्कूल तथा वापिस आने.जाने के लिए राज्य पथ परिवहन निगम की बसों में प्रथम अप्रैल 2013 से निःशुल्क यात्रा सुविधा उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया है।

हिमाचल वॉचर हिंदी के एंड्रायड ऐप के लिए यहां क्लिक करें

Featured

आढ़तियों के विरुद्ध चल रहे धोखाधड़ी के मुकदमें, फिर भी सरकार ने कारोबार करने की दे दी अनुमति

Apple commission agents fraud

शिमला– किसान संघर्ष समिति की बैठक 19 जुलाई को गुम्मा, कोटखाई में आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता सुशील चौहान की ने की तथा इसमे समिति के सचिव संजय चौहान विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक में किसानों व बागवानों के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की

बैठक में बागवानों ने अवगत करवाया कि जिन आढ़तियों ने बागवानों का बकाया भुगतान करना है व उनके विरुद्ध शिकायत दर्ज की गई है, इनमें से कुछ आढ़तियों ने दुकाने खोल कर अपना कारोबार आरम्भ कर दिया है। जबकि ए पी एम सी कह रही हैं कि ऐसे आढ़तियों व कारोबारियों को कारोबार नहीं करने दिया जाएगा। इससे ए पी एम सी की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा है और वह इनको कारोबार की इनको कैसे इजाजत दे रही हैं जबकि इनके विरुद्ध मुकदमे चल रहे हैं और कार्यवाही की जानी हैं।

बागवानों ने कहा कि इसके अलावा ए पी एम सी, अधिनियम, 2005 के प्रावधानों को भी लागू नहीं किया जा रहा है। अधिनियम की धारा 39 की उपधारा 2 के नियम xxi में स्पष्ट प्रावधान है कि जो भी कारोबारी होगा उसको लाइसेंस जारी करने से पहले नकद में सुरक्षा के रूप में बैंक गारंटी लेनी है परंतु ए पी एम सी के द्वारा कोई भी ऐसी व्यवस्था नहीं की है जिससे बागवानों को मण्डियों में धोखाधड़ी का शिकार न होना पड़े। ए पी एम सी निर्देश जारी कर रही हैं कि आढ़ती खरीददार की जांच करवाएगा और पता लगाएं कि वह सही है या नहीं। जोकि ए पी एम सी अपने विधिवत दायित्व को निभाने से भाग रही हैं। क्योंकि किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य सुनिश्चित करना ए पी एम सी का वैधानिक दायित्व हैं।

बागवानों ने कहा कि ए पी एम सी अधिनियम, 2005 की धारा 39 की उपधारा 2 के नियम xix में स्पष्ट प्रावधान है कि किसान बागवान का जिस दिन ही उत्पाद बिकेगा उसी दिन उसका भुगतान किया जाए। परन्तु ए पी एम सी का ये बयान कि यदि 15 दिन तक आढ़ती या खरीददार भुगतान नही करता तो उसके बाद उसके विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी। यह ए पी एम सी अधिनियम, 2005 की खुले तौर पर अवहेलना हैं। इससे ए पी एम सी की मंशा पर सवालिया निशान लगाता है।

बागवानों ने बैठक में ये भी अवगत करवाया कि सरकार द्वारा मजदूरी के रूप में 5 रुपये प्रति पेटी की जो दर तय की गई है कई मण्डियों में यह 25 से 30 रुपए तक ली जा रही हैं। बागवानों ने गत वर्ष भी सरकार व ए पी एम सी से इस बारे शिकायत की थी। परन्तु इस पर भी अभी तक कोई रोक नहीं लगाई गई है।

बैठक में कुछ बागवानों ने अवगत करवाया कि SIT के माध्यम से कुछ बागवानो का आढ़तियों के द्वारा भुगतान भी किया गया है और कुछ बागवानों की बकाया राशी 20 जुलाई, 2019 तक दी जायेगी।

बैठक में कोटखाई के 4 ऐसे बागवान भी थे जिन्होंने भी आढ़तियों से और पैसे लेने है। यह कुल रकम 6,91,605 रुपये बनती हैं।

बैठक में निर्णय लिया गया कि इनकी ओर से भी दोषी आढ़तियों के विरुद्ध मुकदमा दायर किया जाएगा।

बैठक में निर्णय लिया गया कि सरकार किसान संघर्ष समिति द्वारा 24 जून, 2019 को दिये गए मांगपत्र पर शीघ्र कार्यवाही करें। तथा ए पी एम सी की लचर कार्यप्रणाली को सुचारू करने के लिए सख्त आदेश करें ताकि किसानों व बागवानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिल सके और उनको मण्डियों में धोखाधड़ी व शोषण से बचाया जा सके। यदि सरकार इन माँगो पर तुरन्त ठोस कदम नहीं उठती है तो किसान संघर्ष समिति अन्य किसान संगठनों के साथ मिलकर आंदोलन करेगी

हिमाचल वॉचर हिंदी के एंड्रायड ऐप के लिए यहां क्लिक करें

Continue Reading

Featured

सेब के सर्मथन मुल्य में मात्र 50 पैसे बढ़ौतरी बागवानों से भद्दा मजाकः राठौर

Apple proccurement support price in Himachal PRadesh

शिमला -हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा सेब के सर्मथन मुल्य में की गई मात्र 50 पैसे की बढ़ौतरी को बागवानों के साथ किया गया भद्दा मजाक करार दिया है।

आज शिमला से जारी प्रेस वयान में कुलदीप सिंह राठौर ने बताया कि वर्तमान समय में जब बागवानों को अपनी फसल तैयार करने के लिए भारी मंहगाई का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि जी.एस.टी के चलते सेब से संबंधित पैकिंग से लेकर फफूंद नाशक दवाईयां एवं अपनी फसलों को मंण्ड़ियों तक पहुॅचाने के लिए किराया भी कई गुणा बढ़ गया है इसके चलते सेब के सर्मथन मुल्य कम से कम 10 रूपये होना चाहिए।

कुलदीप राठौर ने कहा कि सेब इलाकों में बहुत जगह सड़कों की हालत खराब पड़ी है और सेब को मण्ड़ियों तक पहुॅचाने वाले ट्रक व गाड़ियों के मालिक खराव सडकों पर गाडियाॅं भेजने को मना कर रहे हैं इसलिए सरकार को चाहिए कि ख़राब सडकों को जल्दी से जल्दी ठीक करवायें।

हिमाचल वॉचर हिंदी के एंड्रायड ऐप के लिए यहां क्लिक करें

Continue Reading

Featured

हिमाचल सरकार पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे : कर्मचारी नेता

HP-SAT-abolition-reasons

शिमला -हिमाचल प्रदेश कर्मचारी महासंघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेन्द्र मनकोटिया, पूर्व सयुक्त सचिव सेन राम नेगी,पूर्व प्रेस सचिव हरीश गुलेरिया, गैर शिक्षक महासंघ के महासचिव दीप राम शर्मा ,इंदिरागांधी आयुर्विज्ञान मेडिकल कॉलेज के पूर्व महासचिव आत्मा राम शर्मा ने प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद करने के निर्णय की आलोचना करते हुए इसे कर्मचारी विरोधी बताया है।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जब जब प्रदेश में भाजपा सरकार सत्ता में आई तब तब प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद किया गया,जो कि कर्मचारियों के साथ अन्याय है।

कर्मचारी नेताओं ने जयराम सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि भाजपा कभी भी कर्मचारी हितेषी नही रही है।पूर्व में धूमल सरकार ने भी सत्ता में आते ही इसे बंद किया था अब बर्तमान में जयराम सरकार ने भी ऐसा ही किया है।उनका कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रख कर इसे खोला था।इसे खोलने का एक ही उद्देश्य था कि जो सरकार के किसी भी गलत फैंसले को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र था और उसे जल्द और सस्ता न्याय मिल जाता था।

नेताओं का कहना है कि अब ऐसा नही होगा।किसी भी कर्मचारी को न्याय के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना होगा जहां पहले ही हजारों मामले सुनवाई के लिए लंबित पड़े है।

कर्मचारी नेताओं ने मुख्यमंत्री जयराम से आग्रह किया है कि वह इस मामले पर पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे। इसे उन्हें अपनी किसी भी प्रतिष्ठा का प्रश्न नही बनना चाहिए।

हिमाचल वॉचर हिंदी के एंड्रायड ऐप के लिए यहां क्लिक करें

Continue Reading

Trending