महिला सुरक्षा पर उठते रहेगें सवाल आखिर कब तक

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Images:hindustantimes

“कब बनेगा सख्त कानुन ,कब मिलेगा सही इंसाफ इतंजार है, इतंजार है “

हम एक स्वतन्त्र देश के नागरिक है जिसमें सभी वर्ग चाहे महिला वर्ग हो या पुरुष वर्ग सभी को सम्मानता का अधिकार प्राप्त है , फिर आखिर क्यों पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं के साथ होने वाले क्राइम का ग्राफ बढ़ता ही जा रहा है?क्यों शिकार हो रही है महिलाए असामाजिक तत्वों की?क्यों किया जा रहा है, उनके दामन को दागदार आखिर क्यों जवाब तलाशना बाकी है?हमारा समाज आज हर क्षेत्र मंे उन्नति की ओर अग्रसर है फिर बात चाहे कला, विज्ञान, साहित्य ,तकनीकी किसी भी क्षेत्र की क्यों न कि जाए हर क्षेत्र में देश दिन दुगनी उन्नति कर रहा है। आधुनिकता के इस दौर में जहां एक तरफ देश उन्नति की ओर बढ़ रहा है, वहीं दुसरी ओर समाज के सबसे महत्वपुर्ण वर्ग महिला वर्ग की सुरक्षा के क्षेत्र में पिछड़ता जा रहा है।

महिलाए आज के इस आधुनिक समाज में जहां अपनी प्रतिभा का लौहा मनवा रही है हर क्षेत्र में पुरुषों के बराबर खुद को साबित कर रही है, लेकिन समाज में खुद की सुरक्षा को लेकर आज भी इस विकासशील देश में वो खुद को पिछड़ा हुआ ही पाती है। महिलाओं की सुरक्षा पर प्रश्न चिन्ह लगता जा रहा है अपना शहर ही, शहर की गली तक भी महिलाएं सुरक्षित नहीं है,और अगर कोई महिला किसी भी तरह की अनहोनी का शिकार होती है तो उसे सही इसंफ तक नहीं मिलता है। कुछ तो समाज के सामने उठने वाले सवालों से घबरा कर अपने खिलाफ हो रही शारिरिक ओर मानसिक यातनाओं के खिलाफ अपनी आवाज तक भी नहीं उठा पाती है । बस सवाल है भी तो एक कि क्यों बढ़ावा मिल रहा है महिलाओं के प्रति हो रही यातनाओं को, क्यों कठोर सजा नहीं दी जाती उन गुनेगारों को जो महिलाओं के साथ अत्याचार करते है वो भी बिना किसी खौफ के?जरुरत है तो एक ऐसे कानुन को लाने की जिससे महिलाओं की आबरु को रौंदने वाले असमाजिक तत्वों के अदंर भय आ सके ओर देश तथा समाज में महिलाएं अपनी स्वतन्त्रता का आनंद उठा सके।

दिल्ली की घटना दिल दहलाने वाली है, क्या कसुर था उस लड़की का, जो जिदंगी ओर मौत के बीच जुझ रही है ,क्यों शिकार हो गई वो किसी की दरिदंगी की, कौन है जो लेगा इस घटना की जिम्मेदारी ? ओर हां ,सबसे बड़ी बात क्या बदलेगा कानुन होगा इसांफ क्या इस घटना के गुनेगारों को मिलेगी ऐसी सजा जिससे सीख मिलें उन सब बुरी नजरों को जो दागदार करती है हमारे समाज को । फैंसला करना होगा अब तो जागना होगा,सबक लेना और सबक सिखाना अभी बाकी है। इंसाफ करना होगा उसके हर एक दर्द का जो उसे बेवजह दिया गया है।

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