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वीडियो:2 दिन में छात्राओं सहित विश्वविद्यालय से 36 निष्कासित, एक तरफ़ा करवाई के खिलाफ छात्र संगठन का विरोध प्रदर्शन

SFI protest at hpu campus

शिमला-आज एस०एफ०आई० हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई के द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में विरोध प्रदर्शन किया।

एस०एफ० आई का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन के द्वारा लोकतांत्रिक अधिकारों पर गैरकानूनी तरीके से लगातार हमले किए जा रहे हैं । संगठन का कहना है कि ये मुख्य रूप से सरकार के इशारे पर किया जा रहा है। छात्र संगठन ने कहा कि बीते कुछ दिन पहले वि०वि० इकाई के द्वारा परिसर में आउटसोर्स के मुद्दे का कड़ा विरोध किया था और उसके बाद विश्वविद्यालय में एस०एफ०आई०की जितनी भी गतिविधियां हुई उसमें तमाम छात्र समुदाय ने बढ़ चढ़कर भाग लिया! एस०एफ० आई का कहना है कि तमाम नीतियों को लेकर छात्रों का विरोध विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदेश सरकार को रास नहीं आया और बड़ी सुनियोजित तरीके से परिसर के अंदर छात्र गुटों में लड़ाई करवाई और बाद में छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर सुनियोजित तरीके से रोक लगा दी ।

एस०एफ० आई ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन के द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में न तो कोई विरोध प्रदर्शन करने दिया जा रहा है और न ही छात्रों को किसी भी अथॉरिटी के साथ मिलने दिया जा रहा है जिसके चलते प्रशासन के द्वारा दो दिनों के भीतर ही 36 छात्रों को निष्कासित किया जा चुका है जिनका कसूर बस इतना है कि वह अपने लोकतांत्रिक अधिकार के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष प्रश्न उठा रहा थे।

एस०एफ० आई ने कहा कि इसी कड़ी के चलते जो भी छात्र निष्कासित है उन्हें न तो सुचारू रूप से कक्षाओं में आने दिया जा रहा है और न ही हॉस्टल में रहने की अनुमति प्रशासन के द्वारा दी जा रही है जिसके चलते तमाम छात्र समुदाय को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है और साथ ही साथ जो भी लड़कियां इस निष्कासन के चलते हॉस्टल में नहीं रह पा रही है उन्हें भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हैं।

एस०एफ० आई ने कहा कि दूसरे छात्र संगठन की तो अभी तक दोषी छात्रों पर कोई भी कार्रवाई विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस के द्वारा नहीं की गई है जो कि यह दर्शाता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन और ए०बी०वी०पी० दोनों मिलकर छात्र राजनीति को बदनाम कर रहे हैं और साथ ही साथ पुलिस प्रशासन के द्वारा भी एक तरफा कार्रवाई तमाम घटनाक्रम पर की जा रही है।

एस०एफ०आई ने तमाम विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस प्रशासन से यह मांग की है कि बीते दिनों विश्विधालय में जो घटनाक्रम हुए हैं उस पर एक तरफा कार्रवाई न करके न्यायपूर्ण कार्रवाई की जाए।

विश्वविद्यालय प्रशासन से यह मांग की कि जिन छात्रों का निष्कासन विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा किया गया है उसे एक दिन के भीतर वापिस लिया जाए अन्यथा आने वाले दूसरे दिन कोई भी अथॉरिटी विश्वविद्यालय परिसर के अंदर मान्य नहीं की जाएगी जिसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन खुद जिम्मेदार होगा!

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10 कार्यकर्ताओं के निष्कासन पर ऐबीवीपी का धरना प्रदर्शन,विश्वविद्यालय पर एक तरफा कार्यवाही का लगाया आरोप

ABVP Protest at HPU over suspension of members 2

शिमला– आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इकाई ने विश्वविद्यालय में पिंक पेटल्स चौक पर धरना प्रदर्शन किया । इकाई सचिव अंकित चंदेल ने जानकारी देते हुए बताया की पिछले कल विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से एक तनशाही फैसला निकाला गया जिसमें 10 ऐबीवीपी कार्यकर्ताओं को विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया।

गौरतलव है की पिछले 11 जुलाई को विद्यार्थी परिषद ने कैम्पस मे धरना प्रदर्शन किया था जिसके चलते 10 छात्रों का निष्काशन कर दिया है।

ABVP Protest at HPU over suspension of members 3

धरने को संबोधित करते हुए इकाई सचिव अंकित चन्देल ने बताया की एक तरफ जब कर्मचारियों द्वारा कुलपति कार्यालय में नारेबाजी की जाती है तो उन कर्मचारियों क खिलाफ कुलपति साहब की कोई प्रतिक्रिया नही आती, परन्तु जब ऐबीवीपी कैम्प्स में धरना प्रदर्शन करते है तो उन्हें तुरन्त प्रभाव से निष्कासित कर दिया जाता है जोकि सरासर एकतरफा कार्यवाही है।

चन्देल ने कहा कि विश्वविद्यालय अपनी कमियों को छुपाने क लिए तरह-2 के हथकण्डे अपना रहा है। जहाँ अधूरे परिणामों की वजह से प्रदेश भर के छात्र परेशानी में हैं वहीँ प्रशासन अपने मुंह मिया मिठु बनने में कोई कसर नही छोड़ता।

ABVP Protest at HPU over suspension of members

चन्देल ने कहा कि सभी को ज्ञात है विवि में नौ महीने में पीएचडी (P.hD) और एमसीऐ (MCA) में फर्जी तरीके से प्रवेश के मामले सामने आते है, और इन सभी गडवड़ियों के विरोध करने वाले छात्र संगठनों की आवाज को दबाने का प्रयास विश्वविद्यालय प्रशासन् कर रहा है।

धरने क माध्यम से प्रशासन को चेताते हुये परिषद ने मांग उठाई विश्वविद्यालय अपना काम करे न कि छात्र संगठनों के कार्य मे दखल दे। ऐबीवीपी ने चेतावनी दी है कि जल्द से जल्द परिषद कार्यकर्ताओं का निष्कासन् वापिस नही करता है तो प्रदेश स्तरीय आंदोलन करने में कोई गूरेज़ नही होगाI ऐबीवीपी ने साथ ही यूजी UG के सभी परीक्षा परणामों को पूरा करने की मांग भी प्रशासन के सामने रखी है।

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सेब के सर्मथन मुल्य में मात्र 50 पैसे बढ़ौतरी बागवानों से भद्दा मजाकः राठौर

Apple proccurement support price in Himachal PRadesh

शिमला -हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा सेब के सर्मथन मुल्य में की गई मात्र 50 पैसे की बढ़ौतरी को बागवानों के साथ किया गया भद्दा मजाक करार दिया है।

आज शिमला से जारी प्रेस वयान में कुलदीप सिंह राठौर ने बताया कि वर्तमान समय में जब बागवानों को अपनी फसल तैयार करने के लिए भारी मंहगाई का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि जी.एस.टी के चलते सेब से संबंधित पैकिंग से लेकर फफूंद नाशक दवाईयां एवं अपनी फसलों को मंण्ड़ियों तक पहुॅचाने के लिए किराया भी कई गुणा बढ़ गया है इसके चलते सेब के सर्मथन मुल्य कम से कम 10 रूपये होना चाहिए।

कुलदीप राठौर ने कहा कि सेब इलाकों में बहुत जगह सड़कों की हालत खराब पड़ी है और सेब को मण्ड़ियों तक पहुॅचाने वाले ट्रक व गाड़ियों के मालिक खराव सडकों पर गाडियाॅं भेजने को मना कर रहे हैं इसलिए सरकार को चाहिए कि ख़राब सडकों को जल्दी से जल्दी ठीक करवायें।

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हिमाचल सरकार पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे : कर्मचारी नेता

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कर्मचारी महासंघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेन्द्र मनकोटिया, पूर्व सयुक्त सचिव सेन राम नेगी,पूर्व प्रेस सचिव हरीश गुलेरिया, गैर शिक्षक महासंघ के महासचिव दीप राम शर्मा ,इंदिरागांधी आयुर्विज्ञान मेडिकल कॉलेज के पूर्व महासचिव आत्मा राम शर्मा ने प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद करने के निर्णय की आलोचना करते हुए इसे कर्मचारी विरोधी बताया है।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जब जब प्रदेश में भाजपा सरकार सत्ता में आई तब तब प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद किया गया,जो कि कर्मचारियों के साथ अन्याय है।

कर्मचारी नेताओं ने जयराम सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि भाजपा कभी भी कर्मचारी हितेषी नही रही है।पूर्व में धूमल सरकार ने भी सत्ता में आते ही इसे बंद किया था अब बर्तमान में जयराम सरकार ने भी ऐसा ही किया है।उनका कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रख कर इसे खोला था।इसे खोलने का एक ही उद्देश्य था कि जो सरकार के किसी भी गलत फैंसले को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र था और उसे जल्द और सस्ता न्याय मिल जाता था।

नेताओं का कहना है कि अब ऐसा नही होगा।किसी भी कर्मचारी को न्याय के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना होगा जहां पहले ही हजारों मामले सुनवाई के लिए लंबित पड़े है।

कर्मचारी नेताओं ने मुख्यमंत्री जयराम से आग्रह किया है कि वह इस मामले पर पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे। इसे उन्हें अपनी किसी भी प्रतिष्ठा का प्रश्न नही बनना चाहिए।

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