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हिमाचल में बच्चों द्वारा अपराध की बढ़ती वारदातें चिंताजनक, मोबाइल,इंटरनैट और कम्प्यूटर को कोस रहे अभिवावक और अध्यापक

juvenile delinquency himachal

शिमला- हिमाचल में बच्चों द्वारा अपराध की बढ़ती वारदातें चिंताजनक हैं। 14 और 16 की उम्र में यहां भाई-बहन द्वारा दिन-दिहाड़े एक बैंक के बाहर लूटपाट करना सहित अन्य ऐसे कई अन्य मामले हैं जो यहां की युवा पीढ़ी के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर रहे हैं।

कुछ माह पहले कुल्लू जिला में भी एक 9 साल के बच्चे ने एक साल की बच्ची से रेप को अंजाम देकर सनसनी फैला दी थी। बच्चों द्वारा अपराध की बढ़ती वारदातें चिंताजनक हैं। ऐसे में इस दिशा में सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे।

72 फीसदी बच्चे खुली सिगरेट के शौकीन

राज्य में 72 फीसदी बच्चों के खुली सिगरेट पीने संबंधी एक सर्वेक्षण ने सब को चौंका कर रख दिया है। इसे देखते हुए ही राज्य सरकार ने खुली सिगरेट पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। फिर ऐसे आंकड़े चौंकाने वाले हैं। नशे के चलते भी अपराध बढ़ने को नकारा नहीं जा सकता।

अभिभावकों के पास नहीं समय: जीवन

शिक्षा विभाग के पूर्व उपनिदेशक जीवन शर्मा बताते हैं कि आज अभिभावकों के पास अपने बच्चों के लिए समय नहीं है। इसके साथ स्कूली शिक्षकों को छात्रों को पढ़ाने के साथ अलग से इतना बोझ डाल दिया गया है कि वे भी उन पर नजर नहीं रख पा रहे हैं। सरकार को क्वालिटी एजुकेशन की तरफ ध्यान देना होगा। बताते हैं कि नशे युवाओं में बढ़ते अपराध का एक मुख्य कारण हैं।

एक कारण यह भी

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के एकीकृत हिमालयन अध्ययन संस्थान (आईआईएचएस) के निदेशक प्रो. श्याम लाल कौशल ने कहा कि आज के समय में बच्चों को कम आयु में आसानी से इंटरनैट, सोशल मीडिया, टैलीविजन व मोबाइल उपलब्ध हो जाता है जिस वजह से उनके पास कई नाकारात्मकचीजें भी पहुंच जाती हैं जिससे वे किसी भी चीज के लिए प्रेरित हो जाते हैं।

ऐसे में अभिभावकों को अपने बच्चों पर नजर रखनी चाहिए ताकि वे गलत दिशा में न जाएं। उधर, आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सक अधीक्षक रमेश चंद ने बताया कि पहले लोग संयुक्त परिवार में रहते थे लेकिन आज बच्चे भी मां-बाप के साथ न होकर अलग कमरे में रहते हैं। इस दौरान वे मोबाइल और कम्प्यूटर में अधिक व्यस्त रहते हैं और गलत चीजों को देख कर उसकी तरफ आकर्षित हो जाते हैं। ऐसे में इस बारे अभिभावकों को अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।

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सेब के सर्मथन मुल्य में मात्र 50 पैसे बढ़ौतरी बागवानों से भद्दा मजाकः राठौर

Apple proccurement support price in Himachal PRadesh

शिमला -हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा सेब के सर्मथन मुल्य में की गई मात्र 50 पैसे की बढ़ौतरी को बागवानों के साथ किया गया भद्दा मजाक करार दिया है।

आज शिमला से जारी प्रेस वयान में कुलदीप सिंह राठौर ने बताया कि वर्तमान समय में जब बागवानों को अपनी फसल तैयार करने के लिए भारी मंहगाई का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि जी.एस.टी के चलते सेब से संबंधित पैकिंग से लेकर फफूंद नाशक दवाईयां एवं अपनी फसलों को मंण्ड़ियों तक पहुॅचाने के लिए किराया भी कई गुणा बढ़ गया है इसके चलते सेब के सर्मथन मुल्य कम से कम 10 रूपये होना चाहिए।

कुलदीप राठौर ने कहा कि सेब इलाकों में बहुत जगह सड़कों की हालत खराब पड़ी है और सेब को मण्ड़ियों तक पहुॅचाने वाले ट्रक व गाड़ियों के मालिक खराव सडकों पर गाडियाॅं भेजने को मना कर रहे हैं इसलिए सरकार को चाहिए कि ख़राब सडकों को जल्दी से जल्दी ठीक करवायें।

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हिमाचल सरकार पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे : कर्मचारी नेता

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कर्मचारी महासंघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेन्द्र मनकोटिया, पूर्व सयुक्त सचिव सेन राम नेगी,पूर्व प्रेस सचिव हरीश गुलेरिया, गैर शिक्षक महासंघ के महासचिव दीप राम शर्मा ,इंदिरागांधी आयुर्विज्ञान मेडिकल कॉलेज के पूर्व महासचिव आत्मा राम शर्मा ने प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद करने के निर्णय की आलोचना करते हुए इसे कर्मचारी विरोधी बताया है।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जब जब प्रदेश में भाजपा सरकार सत्ता में आई तब तब प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद किया गया,जो कि कर्मचारियों के साथ अन्याय है।

कर्मचारी नेताओं ने जयराम सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि भाजपा कभी भी कर्मचारी हितेषी नही रही है।पूर्व में धूमल सरकार ने भी सत्ता में आते ही इसे बंद किया था अब बर्तमान में जयराम सरकार ने भी ऐसा ही किया है।उनका कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रख कर इसे खोला था।इसे खोलने का एक ही उद्देश्य था कि जो सरकार के किसी भी गलत फैंसले को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र था और उसे जल्द और सस्ता न्याय मिल जाता था।

नेताओं का कहना है कि अब ऐसा नही होगा।किसी भी कर्मचारी को न्याय के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना होगा जहां पहले ही हजारों मामले सुनवाई के लिए लंबित पड़े है।

कर्मचारी नेताओं ने मुख्यमंत्री जयराम से आग्रह किया है कि वह इस मामले पर पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे। इसे उन्हें अपनी किसी भी प्रतिष्ठा का प्रश्न नही बनना चाहिए।

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ऐबीवीपी ने यूजी परीक्षा परिणाम मे हो रही देरी और अनियमिताओं को लेकर किया कुलसचिव का घेराव

ABVP Protest

शिमला-वीरवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद विश्वविद्यालय इकाई ने यूजी (UG ) के परीक्षा परिणाम मे हो रही देरी और अनियमिताओं को लेकर कुलसचिव का घेराव किया व उनके आफिस के बाहर धरना-प्रदर्शन किया!

ABVP protest for ug results

विद्यार्थी परिषद ने निम्न मांगो को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन को कल शाम तक का समय दिया था:

  • यूजी 6th सेमेस्टर का पूरा परीक्षा परिणाम घोषित किया जाए! छात्रों के परीक्षा परिणामों में आ रही डबल स्टार की दिक्कत को शीघ्र ठीक किया जाए!
  • यूजी 2nd और 4th सेमेस्टर का री-आप्पीयर (Re-appear ) परीक्षा परिणाम शीघ्र घोषित किया जाए!
  •  एचपीयू काउंसलिंग में अपीयर छात्रों को अपने रिजल्ट ठीक कराने की तिथि को 20 जुलाई तक किया जाए!
  •  एचपीयू के अलावा दूसरे विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने वाले छात्रों को कॉन्फिडेंशियल रिजल्ट दिया जाए ताकि वह छात्र दूसरे विश्वविद्यालय में ऐडमिशन ले सकें!
  •  यूजी 3rd सेमेस्टर गणित के रिजल्ट को फिर से ईवैलुएट किया जाए!

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद विश्वविद्यालय इकाई ने कहा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की नाकामियों के कारण हिमाचल के हजारों छात्र हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय और देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेने से वंचित रह रहे है! विद्यार्थी परिषद ने कहा है कि अगर इन सभी मांगों को शीघ्र पूरा नहीं किया गया तो विद्यार्थी पर अपना आंदोलन विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ और तेज करेगी!

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