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छात्र संगठन ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय प्रशाशन पर लगाए ये 7 गंभीर आरोप, कहा 50 वर्षों के इतिहास में पहली बार इतना चरमारया प्रशासनिक ढ़ांचा

SFI Allegation of HP University Administration

शिमला-आज एस एफ आई हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई व एस एफ आई शिमला जिला कमेटी ने संयुक्त प्रैस वार्ता का आयोजन किया। इस प्रैस वार्ता के माध्यम से एस एफ आई ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय का प्रशासनिक ढ़ांचा पूरी तरह से चरमरा गया है जिसके लिए कुलपति,वि वि प्रशासन व प्रदेश सरकार समान रूप से जिम्मेवार हैं।

एस एफ आई ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के 50 वर्षों के इतिहास में पहली बार वि।वि। का प्रशासनिक ढ़ांचा इतना चरमरा चुका है कि वि वि के कुलपति के रूप में सिकंदर कुमार जी ने शपथ ली तो उन्होंने पहला बयान यह दिया कि मैं आरएसएस की वजह से यहां तक पहुंचा हूँ और ता उम्र इस विचार के लिए काम करूँगा। इस बात का सिकंदर साहब समय-समय पर खूबी सबूत भी देते रहते है। विश्वविद्यालय के डीन ऑफ स्टडीज श्रीमान अरविन्द कालिया भष्टाचार में संलिप्त है। एस एफ आई ने आरोप लगाया कि ICDEOL के निदेशक कुलवंत पठानिया 10 महीनों में Ph.D करवाने का कारनामा कर चुके है।

विश्वविद्यालय के कुलसचिव ऑउटसोर्स के माध्यम से वि।वि। में आर ऐस ऐस   (RSS) और बी जे पी के लोगों की भर्तियां करवाने में लीन है। प्रदेश के ज्यादातर कॉलेजों में प्रिंसिपल की कुर्सी पर ऐसे लोगो को बिठाया गया है जो अपने-अपने कॉलेज में ए बी वी पी का काम प्रत्यक्ष रूप से कर रहे हैं। एस एफ आई ने कहा कि ऐसे लोगो का विश्वविद्यालय व कॉलेज के प्रशासन में होना यह दर्शाता है कि ये किस मंशा से इन पदों पर आसीन है। विश्वविद्यालय प्रशासन की बागड़ोर इस तरह के लोगो के हाथ में होने के कारण पिछले एक साल से विश्वविद्यालय का स्तर तेजी से गिरता जा रहा है। एस।एफ। आई। ने कहा कि यह बातें वह अनुमान के आधार पर नहीं बल्कि तथ्यों के साथ बोल रही है और संस्था ने निम्नलिखित तथ्य पेश किये:-

एच पी यू ऑनलाईन प्रणाली के खस्ताहालात

एस एफ आई ने कहा कि जब से हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने ऑफलाईन की जगह ऑनलाईन प्रणाली को लागू किया है तब से लेकर आज तक परीक्षा परिणाम एक भी बार समय पर घोषित नहीं हुए है और न ही सही परिणाम घोषित किए है। विश्वविद्यालय की वेबसाइट के हालात दयनीय है जिसका कारण कंप्यूटर शाखा का ठेकाकरण व नियमित की जगह ऑउटसोर्स भर्तियां का होना है। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने 8 में करोड़ ERP(Enterprise Resource Programme) लागू किया है लेकिन इस प्रणाली को चलाने के लिए योग्य कर्मचारियों की जगह अपने चहेते बिठाये है। जर्जर हो चुके इस ऑनलाईन सिस्टम के कारण छात्रों के परिणाम समय पर नहीं आ रहे है और न ही काउंसलिंग के परिणाम समय पर आ रहे है, न तो हॉस्टल फॉर्म समय पर भरे जा रहे है और न ही फिसे जमा हो पा रही है। इसके साथ-साथ परीक्षा परिणामो का दुरुस्तीकरण भी समय पर नहीं हो रहा है जिसके कारण छात्रों की पढ़ाई वाधित हो रही है।एस एफ आई ने कहा कि इन सभी कारणों की वजह से विश्वविद्यालय का शैक्षणिक सत्र भी लगभग 20 दिन देरी से शुरू होगा।

विश्वविद्यालय के अधीन सभी कॉलेजों के छात्रों के हालात दयनीय

एस एफ आई ने कहा कि कॉलेज के अधिकतर छात्र आजकल विश्वविद्यालय के चक्कर काटने को मजबूर है। छात्रों के परीक्षा परिणाम प्रशासन की नालायकी के कारण लंबे समय से लंबित है। छात्रों की Internal Assessment(I A) अभी तक विश्वविद्यालय नहीं पहुंची है। बहुत सारे छात्रों के Term end marks एक साल बीते जाने के बाद भी अपडेट नहीं किए गए है। हद तो तब हो जाती है जब छात्र एक ग्रेड कार्ड में पास और उसी सत्र के दूसरे ग्रेड कार्ड में फेल हो जाता है। कॉलेज में प्राध्यापकों की कमी के कारण सरेआम छात्रों के भविष्य को रौंदा जा रहा है। एस एफ आई ने कहा कि वर्तमान समय में छात्र अपने शिक्षण संस्थान नहीं जा पा रहा है या समय पर नहीं पहुंच पा रहा है क्योंकि बसों में ओवरलोडिंग मान्य नहीं है और कॉलेज के पास छत्रों के लिए विशेष बसों का प्रावधान नहीं है और न ही प्रशासन द्वारा बसों का प्रावधान करने की जहमत उठाई जाती है न तो बस पास काउंटर खोले जा रहे है जिससे साफ तौर पर समझा जा सकता है कि प्रदेश का छात्र किन विपरीत परिस्थितियों में अपनी शिक्षा ग्रहण करने के लिए मज़बूर है।

विश्वविद्यालय में भगवाकरण की मुहिम को तेज़ करना

एस एफ आई ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय में पिछले कुछ समय से भर्तियों की प्रकिया नियमित न करवाकर ऑउटसोर्स के माध्यम से करवाई जा रही है। जिस कारण विश्वविद्यालय में आरएसएस व भाजपा की राजनीतिक विचारधारा के व्यक्तियों की भर्तियाँ धड़ल्ले से करवाई जा रही है। ऑउटसोर्स प्रणाली के चलते विश्वविद्यालय प्रशासन ने गैर कानूनी तरीके ऑउटसोर्स भर्तियों का टेंडर आरएसएस से तलूक रखने वाले व्यक्ति को दिया जिसने आरएसएस व भाजपा से सम्बन्ध रखने वाले लगभग 70 लोगों की भर्ती की। इसके साथ-साथ प्रशासन और प्रदेश सरकार द्वारा विश्वविद्यालय व कॉलेजों में प्राध्यापकों के ए बी वी पी का प्रचार-प्रसार करने की खुली छूट दी गई है। एस एफ आई ने कहा कि परिसर में बहुत से प्राध्यापक सरेआम ए बी वी पी की बैठकें आयोजित करवाते हैं व विचारधारा के आधार पर छात्रों को Internal Assessment व प्रैक्टिकल मार्क्स देते है। जिसके कारण विश्वविद्यालय में शिक्षा का स्तर लगातार गिरता जा रहा है और साथ ही साथ विश्वविद्यालय का भगवाकरण जोर पकड़ता जा रहा है।

विश्वविद्यालय में ए बी वी पी को मिलता संघ-रक्षण

एस एफ आई का यह भी कहना है की जब से प्रदेश में भाजपा सरकार आई है और जब से विश्वविद्यालय में सिकंदर कुमार कुलपति के पद पर आसीन हुए है तब से लेकर प्रशासन व कुलपति द्वारा ए बी वी पी के नेताओं को पूरा संरक्षण दिया जा रहा है। इसका उदाहरण हाल ही में विश्वविद्यालय प्रशासन,कुलपति व ए बी वी पी के गठजोड़ के द्वारा तैयार किया गया निष्कासन का ढोंग है। प्रशासन ने परिसर में घेराव व धरना प्रदर्शन पर प्रतिबन्ध लगाया है। ऐसे में जब ए बी वी पी रजिस्ट्रार का घेराव करती है तो विश्वविद्यालय प्रशासन व कुलपति महाशय अपने आप को निष्पक्ष दिखाने व ए बी वी पी को छात्रहितैषी दिखाने के लिए ए बी वी पी के नेताओं को निष्काषित करने का ढोंग रचती है पर यह स्वांग कथा मात्र तीन दिनों में सिमट गया और निष्कासन वापिस ले लिया जाता है जिस निर्णय का हम स्वागत करते है। एस एफ आई ने कहा कि लेकिन यह निर्णय ए बी वी पी , कुलपति व प्रशासन के कूटनीतिक चेहरे के मुखौटे को उतार देता है और यह भी साबित करता है कि परिसर में घेराव व प्रदर्शन पर प्रतिबन्ध केवल SFI के लिए है। पिछले 5 सालों से SFI के 7 छात्रों का विश्वविद्यालय से निष्कासन इस बात का साक्ष है। निष्कासन की बहाली का पैमाना भी विशेष विचारधारा पर मेहरबान है। एस एफ आई ने कहा कि विश्वविद्यालय में आरएसएस सम्बंधित विचारधारा पूरी तरह से प्रशासनिक अमले में घुल गई है और यही आर ऐस ऐस  युक्त प्रशासन ए बी वी पी को संरक्षण प्रदान कर रहा है।

कोटशेरा कॉलेज में प्रिंसिपल द्वारा एस एफ आई के नेताओ पर एक तरफा कारवाई

एस एफ आई ने कहा कि बीते दिनो कोटशेरा कॉलेज में ए बी वी पी के छात्रों द्वारा एक छात्र के साथ रैगिंग जैसी गैर कानूनी वारदात को अंजाम दिया जाता है।जिसकी बाकायदा पीड़ित छात्र द्वारा प्रशासन के समक्ष शिक़ायत की जाती है।अगले दिन रैगिंग लेने वाले उन्ही छात्रों में से पांच छात्र शराब के नशे में चूर होकर कॉलेज में हथियार लहराते है।दो शराबी छात्रों को एस एफ आई ने आम छात्रों की मदद से पुलिस के हवाले किया लेकिन तीन शराबी छात्र वहां से रफू चक्कर होने में कामयाब रहे। एस एफ आई ने आरोप लगाया है कि इन तीन छात्रों के कारनामे यही नहीं थमे बल्कि उसी दिन एक छात्रा के साथ छेड़खानी की। छात्रा ने प्रशासन के समक्ष इस प्रकरण की शिकायत की। कहां तो कॉलेज के प्रिंसिपल को शराबी और गुंडागर्दी करने वाले छात्रों पर कार्रवाई अम्ल में लानी चाहिए थी ,लेकिन उल्टा रैगिंग पीड़ित छात्र और छेड़खानी की शिकार छात्रा को प्रताड़ित किया गया। छात्र अब कॉलेज से माइग्रेशन करने को मजबूर है। एस एफ आई ने कहा कि वही छात्रा के अभिभावकों को बुलाकर छात्रा के संदर्भ में बेबुनियाद बाते कही गई।प्रिंसिपल पी के सलारिया सरेआम ए बी वी पी के कार्यकर्ता की भूमिका अदा करते हुए ए बी वी पी के स्थापना दिवस समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में जाते है।

विश्वविद्यालय व कॉलेजों में छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन

एस एफ आई ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में विवि तथा कॉलेजों में लोकतंत्र की हत्या कर केन्द्रीय छात्र संघ चुनाव पर प्रतिबंध लगाकर प्रशासन पहले ही छात्रों की आवाज़ को दबा चुका है व अब छात्रों की आज़ादी को पूरी तरह से कुचलने पर आमादा है। कन्या छात्रावासों में छत्राओं की इंटर होस्टल आउटिंग को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है जो कि पहले रात 11 बजे तक होती थी। कन्या छात्रावास में बेवजह गेस्ट एंट्री को बढ़ाया गया है जो कि प्रशासनिक डकैती की एक जीता जागता उदाहरण है। विवि में छात्रों को पढ़ाई से दूर करने के प्रयास भी किये जा रहे हैं।बॉयज होस्टल के छात्रों को 24 ऑवर लाइब्रेरी में नही जाने दिया जा रहा है और रात 10 बजे ही होस्टल के गेट पर ताले जड़ दिए जाते हैं। एस एफ आई ने कहा कि ये गेट पहले कभी बन्द ही नहीं होते थे। छात्र रात भर आ जा सकते थे पर अब नहीं। अब छात्र रात भर पिंजरे में रहने को मज़बूर हैं। छात्रों के धरने प्रदर्शन करने के अधिकार पर पूरी तरह से प्रतिबंध है और न ही विवि प्रशासन से सवाल पूछने का अधिकार है। एस एफ आई ने कहा कि यदि प्रशासन इसका विरोध करता है तो उसे कक्षाओं से सस्पेंड किया जाता है व उसके अभिभावकों को बुलाकर उस छात्र के साथ साथ उन्हें भी प्रताड़ित किया जाता है।

पीएचडी में फ़र्ज़ी प्रवेश की बाढ़

एस एफ आई ने यह भी आरोप लगाया है कि किविश्वविद्यालय का एमसीए विभाग पीएचडी में अवैध प्रवेश के लिए बदनाम हो चुका है। एचपीयू के डीन ऑफ स्टडीज अरविंद कालिया इसी विभाग में कार्यरत है लेकिन शर्म की बात है कि इन फ़र्ज़ी प्रवेशों को करवाने में इनकी भी एक बड़ी भूमिका है। नियमों को दरकिनार कर अपने एक चहेते को टीचर कोटे से पीएचडी में प्रवेश दिलाना उनके भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी उपलब्धि है। एस एफ आई ने कहा कि उन्ही के चलते ऐसे लोगों को पीएचडी में प्रवेश दिया गया है जिनकी योग्यता एमसीए के अनूरूप भी नहीं थी। आज वो ही लोग प्राध्यापक बन कर विवि में बैठे हैं। हैरानी की बात तो तब सामने आई जब डीएस के एक करीबी को उसकी एमसीए पूरी हाने से पहले ही पीएचडी में प्रवेश दिया गया। वाणिज्य विभाग में 10 महीने में पीएचडी पूरी करवाने का कारनामा भी वर्तमान इक्डोल निदेशक द्वारा ही किया गया है। इस समय भी एमसीए विभाग में NET/JRF को दरकिनार कर अपने चहेतों को प्रवेश देने की कोशिशें की जा रही हैं।

एस एफ आई ने कहा कि इन तमाम तथ्यों से यह साबित होता है कि एचपीयू में प्रदेश सरकार के संरक्षण में कुलपति व प्रशासन द्वारा सरेआम इसके व्यापारीकरण व भगवाकरण की मुहिम को पूरी ताक़त के साथ लागू किया जा रहा व एचपीयू के प्रशासनिक ढांचे को पूरी तरह से खस्ताहाल बना दिया है।

एस एफ आई एचपीयू में व्याप्त इन तमाम समस्याओं, भ्रष्टाचार व नाइंसाफी के खिलाफ आंदोलन की शुरुआत 29 जुलाई को कोटशेरा कॉलेज प्रिंसिपल पी के सलारिया की तानाशाही के खिलाफ कॉलेगर में धरना प्रदर्शन व प्रिंसिपल का घेराव करके करेगी। एस एफ आई ने कहा कि 30 व 31 जुलाई को प्रदेश के तमाम कॉलेज व विवि में इन सभी मुद्दों को लेकर हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा जिसे कुलपति तक पहुंचाया जाएगा।

एक अगस्त को हिमाचल के प्रत्येक कॉलेज व विवि में इन तमाम मुद्दों पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा। एस एफ आई ने कहा कि अगर प्रशासन फिर भी नहीं मानता है तो इस आंदोलन को और व्यापक व उग्र किया जाएगा जिसके ज़िम्मेदार कुलपति, प्रशासन व प्रदेश सरकार होंगे

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मानसिक रूप से परेशान तिलक राज मंडी से लापता, पत्नी ने पुलिस से लगाई ढूंढने की गुहार

missing mand from mandi district of Himachal Pradesh 2

मंडी-पधर उपमंडल के कुन्नू का एक व्यक्ति लापता हो गया है। लापता व्यक्ति की मानसिक स्थिति सही नहीं बताई जा रही है। व्यक्ति की पत्नी फूला ने पधर पुलिस थाना में उसके पति की गुमशुदगी रिपोर्ट दर्ज करवाई है।

फूला देवी ने रिपोर्ट दर्ज करवाई है कि उसका पति तिलक राज निवासी कुन्नू पधर जिला मंडी गत सात अगस्त को घर से कहीं चला गया। इसके बाद वह घर वापस नहीं लौटा। काफी तलाश करने पर भी उसका कोई सुराग नहीं लग पाया।

फूला देवी ने बताया कि उसके पति तिलक राज की उम्र 50 वर्ष है और उसका रंग सांवला है। घर से जाती बार उन्होंने चैकदार कमीज व सलेटी रंग की पैंट पहनी हुई थी और उनके माथे पर कट का निशान है।

उन्होंने से पुलिस से आग्रह किया है कि उसके पति को ढूंढने में मदद करें। वहीं, डीएसपी पधर मदनकांत ने बताया कि सभी पुलिस चौकियों व थानों को इसकी सूचना प्रेषित कर दी गई है। लापता को ढूंढने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आग्रह किया है कि उपरोक्त हुलिया वाला कोई व्यक्ति दिखे तो पधर पुलिस थाना या नजदीकी पुलिस थाना में सूचना दें।

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विश्वविद्यालय में हॉस्टल से जबरन शिफ्ट करने पर फूटा छात्रों का गुस्सा, कहा कुलपति कमेटियों की आड़ में कर रहे प्रताड़ित

HPU Hostel Student Protest

शिमला-आज हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के वाई एस पी हॉस्टल के छात्रों ने प्रैस विज्ञप्ति जारी की। छात्रों ने कहा कि पिछले 29 जुलाई को विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा छात्रों को जबरन दूसरे हॉस्टल शिफ्ट करने का फरमान जारी किया गया था।

छात्रों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के कुलपति कमेटियों की आड़ में छात्रों को प्रताड़ित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे है। वाई एस पी हॉस्टल के छात्रों ने आज से पहले भी एडवाइजरी कम मॉनिटरिंग कमेटी के सभी सदस्यों को इस बारे में अवगत कराया था। लेकिन प्रशासन फिर भी छात्रों को कोई राहत देने की कवायद नहीं कर रहा था।आज वाई एस पी हॉस्टल के तमाम छात्रों ने कमेटी के अध्यक्ष डी एस अरविंद कालिया के ऑफिस के बाहर घेरा डाला।

छात्रों ने बताया कि सभी कमेटी के सदस्य भी भी मौजूद थे।छात्रों के आक्रोश को दबाने के लिए प्रशासन ने पुलिकर्मियों और क्यू आर टी को बुलाया गया लेकिन छात्र फिर भी वही डटे रहे।छात्रों का कहना है कि उन्हें भी मीटिंग में हिस्सा लेने के लिए बुलाया गया था लेकिन उनका पक्ष नहीं सुना गया।कॉफ्रेंस हॉल में हुई वार्ता पूरी तरह से विफल रही और इस वार्ता में कोई भी निर्णय नहीं लिया गया।उल्टे कमेटी के अध्यक्ष अरविंद कालिया ने छात्रों को ये कहकर धमकाया कि नियमों को रातो रात बदल दिया जाएगा।
HPU Hostel Student Protest 2

छात्रों ने कहा कि हॉस्टल शिफ्टिंग तानशाही का नमूना है जिसे बर्दाश्त नही किया जाएगा। प्रशासन पहले ही होस्टल को जबरन खाली करने की अधिसूचना जारी कर चुका है।गौरतलब है कि प्रशासन ये तुक दे रहा है कि नए छात्रों को एक हॉस्टल में रखा जाएगा।लेकिन वाई एस पी हॉस्टल की क्षमता 160 छात्रों की है, दूसरी तरफ नए छात्रों को हॉस्टल इस संख्या से ज्यादा अलॉट होगे। ऐसे में प्रशासन का तर्क बेबुनियाद है तथा किसी छुपी हुई साजिश के तहत ये फरमान जारी किया गया है।

छात्रों ने आरोप लगाया है कि यदि कमेटी के अध्यक्ष अरविंद कालिया निर्णय लेने के लिए कुलपति का इंतजार कर रहे है तो किस बात के लिए कमेटी के अध्यक्ष बने है। छात्रों ने कहा कि प्रशासन विश्वविद्यालय की छवि को खुद ही बदनाम करने पर तुला है।नए छात्रों को संशय है कि कहीं सीनियर छात्र सच में ही नए छात्रों को तंग करते होगे।लेकिन आज तक विश्वविद्यालय के इतिहास में रैगिंग का कोई भी मामला दर्ज नहीं है।छात्रों ने चेतावनी दी है कि वे किसी भी सूरत में हॉस्टल खाली नहीं करेगे चाहे उन्हे किसी भी हद तक जाना पड़े।

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मोदी सरकार ने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को अपनाए बिना अनुछेद 370 को खत्म करके जम्मू और कश्मीर के लोगों को दिया धोखा:माकपा

CPIM Himachal Protest against scrapping article 370

शिमला-भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने भारतीय संविधान के अनुछेद 370 को हटाने के कदम को जम्मू कश्मीर की जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों पर केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा हमला करार देते हुए इसके खिलाफ डीसी कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शन को सीपीआईएम राज्य सचिव डा. ओंकार शाद, राज्य सचिवालय सदस्य डा. कुलदीप सिंह तंवर, राज्य कमेटी सदस्य विजेंदर मेहरा, बलबीर पराशर, रमन थारटा ने संबोधित किया।

वक्ताओं ने कहा कि मोदी सरकार ने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को अपनाए बिना ही संविधान के अनुछेद 370 को खत्म करके और जम्मू-कश्मीर राज्य को तबाह कर दिया है।
 
उन्होंने कहा कि कहा कि कश्मीर के लोगों ने पाकिस्तान से आक्रांताओं के सामने भारत मे शामिल होने का निर्णय लिया था और भारतीय राज्य द्वारा उन्हें विशेष दर्जा और स्वायत्तता प्रदान करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता की गई थी, जिसे अनुच्छेद 370 में लागू किया गया था। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने इस प्रतिबद्धता पर वापस हटकर जम्मू और कश्मीर के लोगों को धोखा दिया है।

माकपा ने कहा कि यह सार्वभौमिक रूप से स्वीकार किया जाता है कि भारत की एकता इसकी विविधता में निहित है। भाजपा-आरएसएस शासक किसी भी विविधता और संघीय सिद्धांत को बर्दाश्त नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि वे जम्मू और कश्मीर को कब्जे वाले क्षेत्र के रूप में मान रहे हैं। संविधान पर हमला करते हुए, वे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो केंद्र शासित केंद्र शासित प्रदेशों के रूप में परिवर्तित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय एकता और राज्यों की संघ के रूप में भारत की अवधारणा पर सबसे बड़ा हमला है।

उन्होंने कहा कि इन सत्तावादी उपायों के चलते जम्मू-कश्मीर में दसियों हजार सैनिकों को तैनात किया गया है। प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं को हिरासत में लिया गया है और जनता के आंदोलन को प्रतिबंधित किया गया है। यह खुद दिखाता है कि मोदी सरकार लोगों की सहमति के बिना अपने अपने एजेंडे को थोप रही रही है।

माकपा ने कहा कि यह सब शेष भारत के साथ जम्मू और कश्मीर के लोगों के रिश्ते को मजबूत करना, सभी हितधारकों के साथ राजनीतिक बातचीत की प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए, जैसा कि सरकार ने तीन साल पहले वादा किया था। इसके बजाय, इस तरह का एकतरफा कदम केवल अलगाव को गहरा करेगा। यह भारत की एकता और अखंडता के लिए हानिकारक है।

माकपा मोदी सरकार द्वारा उठाए गए इन उपायों की निंदा करती है। सरकार की इस तरह की कार्यवाही अवैध और असंवैधानिक हैं। यह केवल जम्मू-कश्मीर तक ही सीमित नहीं है, तथा केंद्र की भाजपा सरकार आरएसएस के इशारों पर लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और संविधान पर हमला कर रही हैं। इस तरह के सत्तावादी हमले जनता के लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों पर हमला है।

माकपा ने कहा कि पार्टी जम्मू और कश्मीर के लोगों के साथ खड़े होने और संविधान और देश के संघीय ढांचे पर इस तरह के हमलों का पुरजोर विरोध करती है।

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