Connect with us

Featured

भगवान रघुनाथ कुल्लू घाटी के प्रमुख देवता इसलिए मंदिर राजसी वंशजों की निजी संपति नहीं : मुख्यमंत्री

Himachali-Gods

अनुसंधान आवश्यकता पर बल देते हुए कुल्लू की देव संस्कृति के अध्ययन एवं अनुसंधान के लिए देव संस्कृति चेरिटेबल ट्रस्ट को पांच करोड़ रुपये देने की घोषणा

शिमला- मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने ओक ओवर में ‘देव संस्कृति चेरिटेबल ट्रस्ट’ के एक प्रतिनिधिमंडल को सम्बोधित करते हुए कहा कि रघुनाथ मंदिर किसी की निजी संपति नहीं है, क्योंकि समूचे कुल्लू दशहरे का आयोजन भगवान रघुनाथ के ईर्द-गिर्द घूमता है और भगवान रघुनाथ कुल्लू घाटी के लोगों का प्रमुख देवता है। रघुनाथ मंदिर न्यास का गठन देव समाज के समग्र हितों तथा बेहतर वित्तीय प्रबन्धन के लिए किया गया है। दशहरा महोत्सव में श्री रघुनाथ ‘रथ यात्रा’ का नेतृत्व करने वाले प्रमुख देवता हैं। मुख्यमंत्री कहा कि सरकार ने मंदिर का नहीं बल्कि इसके प्रबन्धन का अधिग्रहण किया है।

पढ़ें: भगवान रघुनाथ की प्राचीन मूर्ति कुल्लू से चोरी

रघुनाथ मंदिर न्यास के निर्माण से न केवल मंदिर का सौंदर्यकरण होगा बल्कि इसकी सुरक्षा और बेहतर वित्तीय प्रबन्धन मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि मंदिर की कारगुजारियों के संचालन के लिये न्यासी होंगे तथा इसका नियमित आडिट किया जाएगा और दान की उपयुक्त रसीदें दी जाएंगी। सरकार का मंदिर की निधि से कोई लेना-देना नहीं है और एकत्रित निधि का प्रयोग मंदिर तथा इसकी कल्याण गतिविधियों पर खर्च किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रघुनाथ मंदिर में दो बार चोरी हो चुकी है तथा इसे उपयुक्त सुरक्षा प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि मूर्ति को एक छोटे व पुराने कक्ष में रखने की बजाए कुल्लू में भगवान रघुनाथ एक भव्य मंदिर हो। मुख्यमंत्री ने बताया कि मंदिर कुल्लू के राजसी वंशजों की निजी संपत्ति नहीं हो सकती क्योंकि यदि ऐसा होता तो यह समूची कुल्लू घाटी के लोगों की आस्था एवं आराधना का केन्द्र नहीं होता।

पालकियां ले जाने की प्रथा बंद करने का आहवान

मुख्यमंत्री ने कुछ लोगों द्वारा सड़कों एवं बाजारों में देवताओं की पालकियां ले जाने की प्रथा को बंद करने के लिए देव समाज को आगे आने का आहवान किया। उन्होंने कहा कि इस सम्बन्ध में कड़ी कार्यवाही की जाएगी, क्योंकि ये वही लोग हैं जो समूची देव संस्कृति को दूषित कर रहे हैं तथा राज्य को भी बदनाम कर रहे हैं। लोगों को देवताओं के नाम पर ऐसे धंधों पर अंकुश लगाने के लिए आगे आना चाहिए।

पढ़ें: भगवान रघुनाथ की मूर्ति बरामद, होली के दिन मूर्ति होगी स्थापना

मुख्यमंत्री ने संस्कृति एवं रीति रिवाजों को भावी पीढ़ियों तक ले जाने के लिए अनुसंधान आवश्यकता पर बल देते हुए कुल्लू की देव संस्कृति के अध्ययन एवं अनुसंधान के लिए देव संस्कृति चेरिटेबल ट्रस्ट को पांच करोड़ रुपये देने की घोषणा की।

हिमाचल वॉचर हिंदी के एंड्रायड ऐप के लिए यहां क्लिक करें

Featured

सेब के सर्मथन मुल्य में मात्र 50 पैसे बढ़ौतरी बागवानों से भद्दा मजाकः राठौर

Apple proccurement support price in Himachal PRadesh

शिमला -हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा सेब के सर्मथन मुल्य में की गई मात्र 50 पैसे की बढ़ौतरी को बागवानों के साथ किया गया भद्दा मजाक करार दिया है।

आज शिमला से जारी प्रेस वयान में कुलदीप सिंह राठौर ने बताया कि वर्तमान समय में जब बागवानों को अपनी फसल तैयार करने के लिए भारी मंहगाई का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि जी.एस.टी के चलते सेब से संबंधित पैकिंग से लेकर फफूंद नाशक दवाईयां एवं अपनी फसलों को मंण्ड़ियों तक पहुॅचाने के लिए किराया भी कई गुणा बढ़ गया है इसके चलते सेब के सर्मथन मुल्य कम से कम 10 रूपये होना चाहिए।

कुलदीप राठौर ने कहा कि सेब इलाकों में बहुत जगह सड़कों की हालत खराब पड़ी है और सेब को मण्ड़ियों तक पहुॅचाने वाले ट्रक व गाड़ियों के मालिक खराव सडकों पर गाडियाॅं भेजने को मना कर रहे हैं इसलिए सरकार को चाहिए कि ख़राब सडकों को जल्दी से जल्दी ठीक करवायें।

हिमाचल वॉचर हिंदी के एंड्रायड ऐप के लिए यहां क्लिक करें

Continue Reading

Featured

हिमाचल सरकार पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे : कर्मचारी नेता

HP-SAT-abolition-reasons

शिमला -हिमाचल प्रदेश कर्मचारी महासंघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेन्द्र मनकोटिया, पूर्व सयुक्त सचिव सेन राम नेगी,पूर्व प्रेस सचिव हरीश गुलेरिया, गैर शिक्षक महासंघ के महासचिव दीप राम शर्मा ,इंदिरागांधी आयुर्विज्ञान मेडिकल कॉलेज के पूर्व महासचिव आत्मा राम शर्मा ने प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद करने के निर्णय की आलोचना करते हुए इसे कर्मचारी विरोधी बताया है।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जब जब प्रदेश में भाजपा सरकार सत्ता में आई तब तब प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद किया गया,जो कि कर्मचारियों के साथ अन्याय है।

कर्मचारी नेताओं ने जयराम सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि भाजपा कभी भी कर्मचारी हितेषी नही रही है।पूर्व में धूमल सरकार ने भी सत्ता में आते ही इसे बंद किया था अब बर्तमान में जयराम सरकार ने भी ऐसा ही किया है।उनका कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रख कर इसे खोला था।इसे खोलने का एक ही उद्देश्य था कि जो सरकार के किसी भी गलत फैंसले को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र था और उसे जल्द और सस्ता न्याय मिल जाता था।

नेताओं का कहना है कि अब ऐसा नही होगा।किसी भी कर्मचारी को न्याय के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना होगा जहां पहले ही हजारों मामले सुनवाई के लिए लंबित पड़े है।

कर्मचारी नेताओं ने मुख्यमंत्री जयराम से आग्रह किया है कि वह इस मामले पर पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे। इसे उन्हें अपनी किसी भी प्रतिष्ठा का प्रश्न नही बनना चाहिए।

हिमाचल वॉचर हिंदी के एंड्रायड ऐप के लिए यहां क्लिक करें

Continue Reading

Featured

ऐबीवीपी ने यूजी परीक्षा परिणाम मे हो रही देरी और अनियमिताओं को लेकर किया कुलसचिव का घेराव

ABVP Protest

शिमला-वीरवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद विश्वविद्यालय इकाई ने यूजी (UG ) के परीक्षा परिणाम मे हो रही देरी और अनियमिताओं को लेकर कुलसचिव का घेराव किया व उनके आफिस के बाहर धरना-प्रदर्शन किया!

ABVP protest for ug results

विद्यार्थी परिषद ने निम्न मांगो को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन को कल शाम तक का समय दिया था:

  • यूजी 6th सेमेस्टर का पूरा परीक्षा परिणाम घोषित किया जाए! छात्रों के परीक्षा परिणामों में आ रही डबल स्टार की दिक्कत को शीघ्र ठीक किया जाए!
  • यूजी 2nd और 4th सेमेस्टर का री-आप्पीयर (Re-appear ) परीक्षा परिणाम शीघ्र घोषित किया जाए!
  •  एचपीयू काउंसलिंग में अपीयर छात्रों को अपने रिजल्ट ठीक कराने की तिथि को 20 जुलाई तक किया जाए!
  •  एचपीयू के अलावा दूसरे विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने वाले छात्रों को कॉन्फिडेंशियल रिजल्ट दिया जाए ताकि वह छात्र दूसरे विश्वविद्यालय में ऐडमिशन ले सकें!
  •  यूजी 3rd सेमेस्टर गणित के रिजल्ट को फिर से ईवैलुएट किया जाए!

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद विश्वविद्यालय इकाई ने कहा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की नाकामियों के कारण हिमाचल के हजारों छात्र हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय और देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेने से वंचित रह रहे है! विद्यार्थी परिषद ने कहा है कि अगर इन सभी मांगों को शीघ्र पूरा नहीं किया गया तो विद्यार्थी पर अपना आंदोलन विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ और तेज करेगी!

हिमाचल वॉचर हिंदी के एंड्रायड ऐप के लिए यहां क्लिक करें

Continue Reading

Trending