हिमाचल में होने वाले सड़क हादसों में इंजीनीयर भी बराबर के दोषी: गुप्ता

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Himachal Road Accident

इंजीनीयरों की लापरवाही, 6 वर्ष पूर्व बस हादसा होने के बाद भी मात्र 5 मीटर रेलिंग नहीं लगाई

शिमला- हिमाचल प्रदेश में बढ़ रहे सड़क हादसों पर गहरी चिंता जताते हुए विकास समिति अध्यक्ष नागेन्द्र गुप्ता ने कहा कि रोजाना हिमाचल में होने वाले सड़क हादसों में चालक को ही दोषी माना जाता है,जबकि सड़क हादसों के मुख्य कारण में इंजीनीयर भी बराबर के दोषी हैं जो सड़क सुरक्षा की ओर बिलकुल ध्यान नहीं देते हैं। इंजीनीयरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए समिति ने कहा कि बहुत ही शर्म की बात है की जिस स्थल पर पहले भी कोई दर्दनाक हादसा हो चुका होता है उस स्पाट को भी समय पर सुरक्षित करने की जहमत नहीं उठाते हैं।

विकास समिति ने यह भी कहा कि ऐसा ही उदाहरण नेशनल हाईवे सोलन डिविजन व चम्बाघाट सब-डिविजन के अधीन सड़क के कंडाघाट आईपीएच कार्यालय के नजदीक दोबारा देखने को मिला है जहां एक कार तीखे मोड़ से नीचे स्लैब पर जा लुड़की। समिति ने कहा कि गत 6-7 वर्षों में इस तीखे मोड़ से एक निजी बस भी लुड़क गई थी जिसमें काफी अधिक संख्या में लोगो की जाने गई थी । विकास समिति टूटू ने यह भी कहा किआज भी मौके पर शांति पूजन के दौरान गाढ़े गए लाल झंडे उस हादसे की याद दिलाते हैं।

गुप्ता ने कहा की इतना भयानक बस हादसा होने के बाबजूद भी विभाग के इंजीनीयरों ने इस तीखे मोड़ पर आजतक मात्र 5 मीटर लंबाई तक की रेलिंग लगाने की जहमत नहीं उठाई और हालही में एक कार फिर से इस मोड़ से उतर गई।

समिति अध्यक्ष ने कहा कि ठीक इस मोड़ के सामने सोलन की ओर होल्ट्रीकल्चर फार्म हाऊस के ऊपर भी तीखा मोड़ है वहां से भी काफी वाहन नीचे की ओर गिर चुके हैं, लेकिन फील्ड इंजीनियरों को बार-बार चेताने पर भी उनके कान में जूं तक नहीं रेंगी।

नागेन्द्र गुप्ता ने कहा कि अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है की अधिकतर विभाग के फील्ड इंजीनयर मात्र अपना 3-4 वर्षों का कार्यकाल पूरा करने या टाईम पास करने आते हैं और जनहितों के कार्यों को अंजाम दिये बिना ही चले जाते हैं। समिति अध्यक्ष ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से इस सेक्शन में कार्यरत उन फील्ड अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग की है जिन्होने बस हादसा होने के बाबजूद भी आजतक इस तीखे मोड़ पर सुरक्षा कवच नहीं लगाए हैं।

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