खुलासा: हिमाचल में 0 से 5 साल के 56 हजार बच्चे कुपोषण के शिकार,लगातार बढ़ रहा है आंकड़ा

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चित्र: हिमाचल वॉचर/ सांकेतिक

यूनाइटेड नेशन इंटरनेशनल चिल्ड्रन फंड (यूनिसेफ) की ताजा रिपोर्ट में हिमाचल में छोटे बच्चों को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, रिपोर्ट में कहा गया है कि जन्म के बाद मां का दूध न मिलने और संतुलित आहार के अभाव कुपोषण के शिकार हो रहे हैं

शिमला- स्वास्थ्य और शिक्षा में अव्वल रहने का दावा करने वाले हिमाचल के स्वास्थ्य विभाग और सरकार की पोल खुल गयी है। आपको जानकर हैरानी होगी की हिमाचल में 0 से 5 साल के 8% बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। यूनिसेफ की ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि सूबे के 56 हजार बच्चे कुपोषित हैं। यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है जो की गंभीर बात है।

ऐसा अमूमन देखने व पढ़ने को मिल जाता है कि जब इस तरह के खुलासे होते हैं तब जा कर सरकार व सम्बंधित विभाग कुछ समय के लिए गहरी नींद से उठता है। जैसे ही यह रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि सूबे के 56 हजार बच्चे कुपोषित हैं वैसे ही गहरी नींद से जगी हिमाचल सरकार ने कुपोषण से लड़ने के लिए एक और प्रोग्राम प्रदेश भर के अस्पतालों में शुरू करने जा रही है। जिसकी पुष्टि स्टेट चाइल्ड ऑफिसर (एनएचएम)डॉ. मंगला सूद ने की है।

डिलीवरी के बाद नर्सरी में नहीं रखे जाएंगे बच्चे, ये होगा फायदा

अब प्रदेश के सभी अस्पतालों में मां (मदर एब्सोल्यूट अफेक्शन) प्रोग्राम शुरू किया जा रहा है। इसके तहत डिलीवरी के बाद बच्चे को नर्सरी की बजाय मां के पास रखा जाएगा। जन्म के एक घंटे के भीतर बच्चे को मां का दूध पिलाया जाएगा।

छह महीने तक मां का दूध ही पिलाने की हिदायत दी जाएगी। डॉक्टरों, नर्सों और दाइयों को इस बारे में सूचित कर दिया गया है। इससे कुपोषण से होने वाली मृत्युदर 20 प्रतिशत तक कम हो सकती है। बच्चा दस्त, हाइपरथर्मिया और निमोनिया से भी बचता है।

इसके अलावा समय पर टीकाकरण की सलाह भी चिकित्सक देंगे। मां के दूध के महत्व बताने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एएनएम और आशा वर्करों को अलग से ट्रेनिंग भी दी है।

जानिए क्या रहते हैं कुपोषण के कारण

विशेषज्ञों के अनुसार जिन बच्चों को पोषणयुक्त आहार नहीं मिल पाता है वे अकसर इस बीमारी की चपेट में आ जाते हैं। मां का बच्चे को अपना दूध न पिलाना भी एक कारण है। बच्चों के वजन में कमी, कमजोर रहना और लंबाई न बढ़ना मुख्य कारण है। ऐसे में अगर यह बीमारी अधिक बढ़ती है तो बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।

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