राजनीति
नगर निगम के बजट से पता चल रहा है भाजपा का विफल कार्यकाल:सीपीएम
शिमला- नगर निगम शिमला ने आज अपना वित्त वर्ष 2022-23 का बजट पास किया गया। इस बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कम्युनिस्ट पार्टी ने इसे विफल बताया है।
कम्युनिस्ट पार्टी की जिला कमेटी ने कहा कि भाजपा शासित नगर निगम ने अंतिम बजट वर्ष 2022-23 का जो पेश किया गया है वह भाजपा के ट्रिपल इंजन के पांच वर्ष के कार्यकाल की विफलता को उजागर करता है।
जिला सचिव संजय चौहान ने कहा कि इस बजट में स्पष्ट है कि न तो पांच वर्ष के कार्यकाल में भाजपा कोई नई परियोजना शिमला शहर के लिए ला पाई है और न ही पूर्व नगर निगम की स्वीकृत व चलाई जा रही परियोजनाओं को पूर्ण कर पाई है।
पांच वर्ष के कार्यकाल में भाजपा ने अपने संसाधनों के निजीकरण व जनता पर टैक्स बढ़ाने के अलावा कोई भी कार्य नहीं किया है।
इन पांच वर्षों में कूड़ा उठाने की फीस में 100 प्रतिशत से अधिक, पेयजल की दरों में 70 से 200 प्रतिशत से अधिक, इसके अतिरिक्त अन्य आवश्यक सेवाओं, प्रॉपर्टी टैक्स व दुकानों के किराए में वृद्धि की गई है।
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि जनता पर भारी भरकम टैक्स का बोझ डालने के बावजूद नगर निगम अपनी आय बढ़ाने में पूरी तरह से विफल रही है। अगर इस बजट में देखें तो गत वर्ष की तुलना में आय में स्पष्ट कमी आई है।
इस बजट में गत वर्ष की तुलना में 7158.13 लाख रुपए की कमी स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि वर्तमान भाजपा की नगर निगम शहर के विकास में पूर्णतः विफल रही है।
जिला कमेटी ने कहा कि इस बजट में स्पष्ट रूप से शहर के विधायक व शहरी विकास मंत्री की कार्यशैली पर भी प्रश्नचिन्ह लगा है। न तो कोई नई परियोजना शहर के लिए ला पाए और न ही अपनी विधायक निधि को शहर के विकास के लिए उचित रूप से इस्तेमाल किया है। नगर निगम को मात्र 16.50 लाख रुपए ही विधायक निधि से नगर निगम को विकास कार्यों हेतू दिए गए हैं।
कमेटी ने कहा कि नगर निगम के इस बजट में केवल सीपीएम के नेतृत्व में पूर्व नगर निगम शिमला के द्वारा 2012 से 2017 तक अपने कार्यकाल में जो करोड़ों रुपए की परियोजनाएं स्वीकृत करवाई थी केवल इन्हीं का व्याख्यान किया गया है।
इनमें मुख्य रूप से 2906 करोड़ रुपए की स्मार्ट सिटी, 125 मिलियन डॉलर(950 करोड़ रुपए) की विश्व बैंक की पेयजल व सीवरेज व्यवस्था के जीर्णोद्धार, 243 करोड़ रुपए की अम्रुत, 200 करोड़ रुपए की टूटीकंडी से मालरोड की रोपेव, 66 करोड़ रुपए की शिमला शहर की सौंदर्यीकरण, 33 करोड़ रुपए की शहरी गरीब के लिए आवास, 29 करोड़ रुपए की लागत से टूटू व 10करोड़ रुपए की लागत से पंथाघाटी व मेहली के लिए सीवरेज प्लांट, 4.5 करोड़ रुपए तहबाजारी के लिये लिफ्ट के पास आजीविका भवन, 4 लेबर होस्टल का निर्माण, दाड़नी के बगीचा में सब्ज़ी मंडी का निर्माण, 5 करोड़ रुपए से कार्ट रोड को चौड़ा करने, आई जी एम सी में पार्किंग व लिफ्ट तथा इसके अतिरिक्त शहर के विभिन्न क्षेत्रों में करोड़ो रूपये की पार्किंग व पार्कों के निर्माण की परियोजनाएं स्वीकृत करवाई गई व इसका निर्माण आंरभ किया गया था।
जिला सचिव ने बताया कि बजट दस्तावेज में केवल इन्हीं परियोजनाओं को दर्शाया गया है इससे स्पष्ट है कि गत पांच वर्ष के कार्यकाल में नगर निगम कोई भी कार्य विकास नहीं कर पाई है। बजट में किये गए स्मार्ट सिटी व अन्य परियोजनाओं के व्याख्यान से स्पष्ट है कि आपने 5 वर्ष के कार्यकाल में नगर निगम इन परियोजनाओं को गति नहीं दे पाई है।
उन्होंने बताया कि स्मार्ट सिटी परियोजना का अभी तक केवल सात प्रतिशत (213 करोड़ रुपए) ही खर्च कर पाई है और स्मार्ट सिटी की मूल परियोजना में फेर बदल कर केवल चेहते ठेकेदारों को फायदा देने के लिए सड़कों में डंगे लगाने का ही कार्य किया जा रहा है।
इसमें मुख्य योजनाओं जिसमे स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट व ट्रासंपोर्ट, पुरानी सब्जी मंडी, अनाज मंडी व लक्कड़ मंडी को स्थानांतरित कर इनके स्थान पर आधुनिक बहुउद्देश्यीय परिसरों का निर्माण, रिपन अस्पताल का पुनर्निर्माण आदि जनसरोकार की महत्वपूर्ण परियोजनाओं को बिल्कुल नजरअंदाज किया गया है।
विश्व बैंक की सहायता से पेयजल व सीवरेज के जीर्णोद्धार की परियोजना भी जमीनी स्तर पर नहीं दिखाई दे रही है व पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण टूटीकंडी से माल रोड तक रोपवे परियोजना स्वीकृति के बावजूद भी नगर निगम आरंभ ही नहीं कर पाई है जबकि इसके साथ ही स्वीकृत की गई धर्मशाला में रोपवे ने कार्य करना आरम्भ भी कर दिया है। नगर निगम की इस लचर कार्यशैली से इनका शहर के विकास के प्रति नकारात्मक रवय्या उजागर हुआ है।
जिला कमेटी ने कहा है कि सीपीएम आगामी नगर निगम चुनावों में भाजपा के पांच वर्ष के विफल कार्यकाल व इनकी आम जनविरोधी नीतियों व विकास के प्रति नकरात्मक रवैये को जनता के समक्ष उजागर करेगी और जनहित की वैकल्पिक नीतियों के साथ जनता के समक्ष आगामी नगर निगम चुनाव में एक सशक्त विकल्प पेश करेगी।
वहीं जनवादी महिला समिति शिमला शहरी कमेटी ने नगर निगम की ओर से पेश किए गए बजट की निंदा की है। कमेटी ने कहा कि नगर निगम ने पिछले पांच वर्षों से चल रहे बजट को ही दोहराया है जो कई सालों से जस से तस चल रहा है।
224.14 करोड़ का बजट पास करने पर भी महिलाओं के लिए बजट में शून्य दिया गया है। इस मंहगाई में महिलाओं के लिए रसोई घर में भी कुछ नहीं दिया गया।
कमेटी ने बताया कि गैस सिलेंडर का दाम 1000 पार कर रहा है।कूड़े,पानी और बिजली के भारी भरकम बिल लोगों को दिए जा रहे है। स्वास्थ्य और शिक्षा में भी गरीब जनता के लिए कुछ नहीं है और बिजली के मीटर भी रिचार्ज वाले लगाने पर कमेटी ने कहा कि इससे महिलाओं पर ओर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। जनवादी महिला समिति की सचिव सोनिया शुबरवाल ने कहा कि महापौर स्वयं एक महिला है पर बजट में महिलाओं को कुछ भी नहीं दिया है जिसकी महिला समिति घोर निंदा करती है।
राजनितिक बयानबाजी
राजेंद्र राणा के बाद अब जयराम ठाकुर ने भी कांग्रेस सरकार पर राज्यसभा सीट बेचने के लगाए आरोप
शिमला : हिमाचल प्रदेश की राज्यसभा सीट को लेकर प्रदेश की सियासत एक बार फिर गर्मा गई है। पूर्व विधायक राजेंद्र राणा के बाद अब पूर्व मुख्यमंत्री नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने भी कांग्रेस सरकार के राज्यसभा चुनाव पर सवाल उठाए है। नेता प्रतिपक्ष ने प्रेस वार्ता में कहा कि कांग्रेस सरकार इस समय भारी अस्थिरता और भय के माहौल में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी के अंदर इतनी अस्थिरता है कि खुद उसके नेता भी आशंकित हैं कि कब क्या स्थिति बन जाए।
कांग्रेस के भीतर सम्मान और संवाद की भावना समाप्त: जयराम
जयराम ठाकुर ने कहा कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता आनंद शर्मा द्वारा सार्वजनिक रूप से अपनी पीड़ा व्यक्त करना इस बात का प्रमाण है कि कांग्रेस पार्टी के भीतर सम्मान और संवाद की भावना समाप्त हो चुकी है। आनंद शर्मा जैसे वरिष्ठ नेता ने स्वयं कहा कि उन्होंने जीवनभर आत्मसम्मान के साथ राजनीति की है और सच बोलने की कीमत चुका रहे हैं।
चुने गए राज्यसभा उम्मीदवार के शपथपत्र में लगभग 230 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि प्रदेश में सरकार मंत्रिमंडल से नहीं बल्कि “मित्र मंडल” से चलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा के लिए जिस व्यक्ति को कांग्रेस ने साधारण कार्यकर्ता बताकर टिकट दिया, उसके शपथपत्र में लगभग 230 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति सामने आई है। वर्तमान सरकार में उनके पास कई करोड़ रुपये के ठेके भी हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के ही कई नेता यह सवाल उठा रहे हैं कि यदि यही साधारण कार्यकर्ता की परिभाषा है तो वर्षों से पार्टी के लिए काम कर रहे अन्य कार्यकर्ताओं को भी ऐसा अवसर क्यों नहीं मिला।
मुख्यमंत्री के दौरों पर भी उठाए सवाल
उन्होंने मुख्यमंत्री के दौरों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कई बार मुख्यमंत्री का आधिकारिक टूर कार्यक्रम जारी होता है लेकिन बाद में वह किसी अन्य स्थान पर चले जाते हैं और इसकी जानकारी न तो प्रशासन को होती है और न ही जनता को। उन्होंने कहा कि एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए इस प्रकार की कार्यप्रणाली कई गंभीर प्रश्न खड़े करती है।
पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने भी उठाए सवाल
वहीं इससे पहले भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता और सुजानपुर के पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने भी हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया “संदिग्ध परिस्थितियों” में तय की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस सीट को लेकर पहले दुबई में समझौता हुआ और बाद में नई दिल्ली में एक होटल के बंद कमरे में इसे अंतिम रूप दिया गया।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री 1 मार्च को दिल्ली दौरे पर गए थे और 2 मार्च को शिमला लौटने का कार्यक्रम था, लेकिन तय कार्यक्रम के बावजूद वे समय पर वापस नहीं पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग 24 घंटे तक मुख्यमंत्री सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए और इसी दौरान दिल्ली के एक होटल में राज्यसभा सीट को लेकर अंतिम निर्णय लिया गया।
राजेंद्र राणा ने कहा कि पूरे घटनाक्रम में कई गंभीर अनियमितताएं और तथ्यों को छिपाने के आरोप सामने आए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की कि सारे मामले को ध्यान में रखते हुए इस चुनाव पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाई जाए, वही पर केंद्र सरकार से व केंद्रीय गृह मंत्रालय से भी मांग की है कि राज्यसभा के इस चुनाव में भारी लेनदेन कि अंशका को देखते हुए जो साकस्य पाए गए है सरकार तुरंत इसकी केंद्रीय एजेंसी से जाँच करवाई जाए।
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कविंद्र गुप्ता 10 मार्च को संभालेंगे प्रदेश के 30वें राज्यपाल का पदभार, जानिए इनका राजनीतिक कार्यकाल और विवाद
शिमला: कविंद्र गुप्ता, जिन्हें हाल ही में हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया है, आज शिमला पहुंचेंगे। वह 10 मार्च को लोकभवन में आयोजित समारोह में पद एवं गोपनीयता की शपथ लेंगे। इसके साथ ही वह राज्य के 30वें राज्यपाल के रूप में पदभार संभालेंगे।
कौन हैं कविंद्र गुप्ता
कविंद्र गुप्ता का जन्म 2 दिसंबर 1959 को जम्मू में हुआ था। उनके पिता भारतीय डाक विभाग में कार्यरत थे। वर्ष 1963 में उनका परिवार संगरूर (पंजाब) स्थानांतरित हो गया, जहां उनकी प्रारंभिक शिक्षा हुई। बाद में उन्होंने फिरोजपुर और गुरदासपुर में अध्ययन किया और 1979 में गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज गुरदासपुर से स्नातक की डिग्री प्राप्त की।
छात्र राजनीति से शुरुआत
1970 के दशक की शुरुआत में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े। भारत में आपातकाल (1975–1977) के दौरान वे संघ के वरिष्ठ नेताओं के साथ गुरदासपुर और पटियाला की जेलों में भी रहे।
इसके बाद उन्होंने छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। वर्ष 1978 से 1979 तक वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की पंजाब इकाई के सचिव रहे। वर्ष 1988 में उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा, जम्मू-कश्मीर का जिला अध्यक्ष नियुक्त किया गया। बाद में 1993 से 1998 तक वे संगठन के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे।
राजनीतिक सफर
कविंद्र गुप्ता का निर्वाचित राजनीति में प्रवेश नगर निकाय स्तर से हुआ। वे जम्मू नगर निगम के पहले निर्वाचित महापौर बने और 2005 से 2010 तक लगातार तीन कार्यकाल तक इस पद पर रहे।
वर्ष 2014 में उन्होंने गांधी नगर विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतकर विधायक बने। 18 मार्च 2015 को उन्हें जम्मू-कश्मीर विधानसभा का अध्यक्ष चुना गया और वे इस पद को संभालने वाले पहले भाजपा नेता बने। बाद में 30 अप्रैल 2018 को उन्हें जम्मू-कश्मीर का उपमुख्यमंत्री नियुक्त किया गया।
लद्दाख के उपराज्यपाल भी रह चुके हैं
14 जुलाई 2025 को द्रौपदी मुर्मु द्वारा उन्हें लद्दाख का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया, जहां वे केंद्र शासित प्रदेश के तीसरे उपराज्यपाल बने। इसके बाद 5 मार्च 2026 को उन्हें हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया। अब वे 10 मार्च को शपथ ग्रहण कर औपचारिक रूप से राज्य के 30वें राज्यपाल के रूप में पदभार ग्रहण करेंगे।
विवादों में भी घिरे रहे कविंद्र गुप्ता
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कठुआ गैंगरेप को लेकर असंवेदनशील बयान
2018 में नवभारत टाइम्स में प्रकाशित एक खबर के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के नए उपमुख्यमंत्री कविंदर गुप्ता ने शपथ ग्रहण के चंद मिनट बाद ही कठुआ गैंगरेप को लेकर असंवेदनशील बयान दिया था। उन्होंने कहा था इस मामले को बार-बार तूल नहीं देना चाहिए। यह छोटी सी बात है। इसके बाद इसी बयान पर जब उनकी किरकिरी हुई चो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उनके कहने का मतलब था कि मामले को जानबूझकर भड़काने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
2. रोहिंग्या मुसलमानों की मौजूदगी को बताया था आर्मी कैंप पर हमले की वजह
फरवरी 2018 में बीबीसी में प्रकाशित एक खबर के अनुसार, स्पीकर कविंदर गुप्ता ने आर्मी कैंप पर हमले की वजह राज्य में रोहिंग्या मुसलमानों की मौजूदगी को बताया है. उन्होंने कहा कि रोहिंग्या की मौजूदगी की वजह से जम्मू के आर्मी कैंप पर हमले हुए। स्पीकर के बयान पर विपक्ष ने हंगामे के बाद सदन से वाकआउट किया, हालांकि बाद में रोहिंग्या मुसलमानों से जुड़े बयान को रिकॉर्ड से हटा दिया गया था।
3. सरकारी जमीन पर कब्जा करने का आरोप
2021 में The Indian Express में प्रकाशित एक खबर के अनुसार , जम्मू और कश्मीर के पूर्व उप मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता कविंदर गुप्ता, जिन्होंने पिछले नवंबर में जिला विकास परिषद (डीडीसी) चुनावों से पहले विवादास्पद रोशनी अधिनियम के तहत राज्य की भूमि को निजी व्यक्तियों को हस्तांतरित करने को “भूमि जिहाद” बताया था, स्वयं 2010 से लेकर 2017 की शुरुआत तक राज्य की भूमि पर अवैध रूप से कब्जा किए हुए थे। हालांकि कविंद्र गुप्ता ने सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाले आरोप से इनकार किया था।
4. सिंतबर 2025 में लद्दाख में हुई हिंसा झड़प
The Statesman में प्रकाशित खबर के अनुसार, लद्दाख में कविंद्र गुप्ता के कार्यकाल के दौरान विरोध प्रदर्शन तेज हुए थे, जिनमें सितंबर 2025 में पुलिस की गोलीबारी में चार युवकों की जान चली गई। The Statesman के अनुसार इस बीच, गुप्ता से मोबाइल फोन पर संपर्क करने के प्रयास व्यर्थ रहे।
वहीं प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया समाचार एजेंसी के अनुसार, गुप्ता ने कहा, “अधिक हताहतों को रोकने के लिए एहतियाती उपाय के रूप में कर्फ्यू लगाया गया है।”
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जयराम सरकार को 54,296 करोड़ रुपये RDG मिला, फिर भी न कर्मचारियों के बकाया भुगतान किए, न ही महंगाई भत्ता (डीए) जारी किया: मुख्यमंत्री
शिमला : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि पूर्व सरकार ने राज्य के खजाने को विकास कार्यों और आवश्यक अधोसंरचना पर खर्च करने के बजाय फिजूलखर्ची और राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार को पांच वर्ष के कार्यकाल में 54,296 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) मिला था। यह राशि राज्य की कुल आय का 25 से 30 प्रतिशत थी। इसके अलावा पूर्व भाजपा सरकार को 16,000 करोड़ रुपये की जीएसटी क्षतिपूर्ति भी मिली थी जिसका उपयोग राज्य की आर्थिक स्थिति सुधारने के बजाय मुफ्त योजनाओं और केंद्रीय नेतृत्व को खुश करने के लिए अनावश्यक कार्यक्रमों और संस्थानों को खोलने पर खर्च किया गया।
भाजपा और कांग्रेस को दी गई वित्तीय सहायता में अंतर
उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार को पिछले तीन वर्षों में केवल 17,563 करोड़ रुपये आरडीजी मिली है, जो भाजपा को मिली राशि से लगभग आधी है। उन्होंने कहा कि 14वें वित्त आयोग के तहत भाजपा सरकार को राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) के रूप में वर्ष 2018-19 में 8,449 करोड़ रुपये, 2019-20 में 8,271 करोड़ रुपये और 2020-21 में 8,062 करोड़ रुपये मिले।
इसके अलावा अंतरिम अनुदान के रूप में 11,431 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। 15वें वित्त आयोग के तहत 2021-22 में 7834 करोड़ रुपये और 2022-23 में 10,249 करोड़ रुपये मिले। इस प्रकार भाजपा सरकार को कुल 54,296 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। इसके बावजूद भाजपा सरकार ने कर्मचारियों के बकाया भुगतान नहीं किए और न ही महंगाई भत्ता (डीए) जारी किया। जबकि वर्तमान कांग्रेस सरकार को 15वें वित्त आयोग के तहत 2023-24 में 8,058 करोड़ रुपये, 2024-25 में 6,258 करोड़ रुपये और 2025-26 में 3,257 करोड़ रुपये मिले। इस तरह कांग्रेस सरकार को कुल 17,563 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए, जो भाजपा सरकार को मिले अनुदान की तुलना में लगभग आधे से भी कम हैं।
स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में कोई बड़ा निवेश नहीं किया। वर्तमान सरकार अस्पतालों के आधुनिकीकरण के लिए 3,000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इसके साथ ही जायका फेज-2 के तहत 1,300 करोड़ रुपये स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने पर व्यय किए जा रहे हैं।
आर्थिक संकट और बढ़ता कर्ज
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब वर्तमान सरकार ने दिसंबर, 2022 में कार्यभार संभाला, तब राज्य भारी आर्थिक संकट में था। भाजपा शासन के अंत तक राज्य पर कुल कर्ज बढ़कर लगभग 76,185 करोड़ रुपये हो गया था, जिसमें पांच वर्षों में लगभग 28,000 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा पूर्व सरकार ने बिना बजट प्रावधान के 10,000 करोड़ रुपये के वेतन संशोधन और डीए बकाया की घोषणा कर दी जिससे स्थिति और बिगड़ गई। इसके अलावा भाजपा ने अपने अंतिम छह महीनों में 900 से अधिक संस्थान खोल दिए, जिससे हर साल लगभग 5,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा। आर्थिक संकट से बचने के लिए वर्तमान सरकार को इनमें से कई संस्थानों को बंद करना पड़ा।
मुख्यमंत्री ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर भाजपा का आज शोर मचाना मात्र दिखावा है, क्योंकि उन्होंने ही राज्य के खजाने को लुटाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार आईजीएमसी शिमला, टांडा और चमियाना में रोबोटिक सर्जरी जैसी सुविधाएं आरम्भ की है और शीघ्र ही राज्य के लोगों को प्रदेश में ही बोन मैरो ट्रांसप्लांट जैसी आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष पर जान-बूझकर वित्त विभाग की बैठक में शामिल न होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा भाजपा नेताओं को व्यक्तिगत रूप से लिखित निमंत्रण भेजे गए थे।
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