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3.85 करोड़ की कुरगल-नौरा-टकरयाणा सिंचाई योजना स्वीकृत, सब्जी उत्पादन में भी होगा लाभ: शांडिल

HP-Minister Dhani Ram Shandil

शिमला- सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डा. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने कहा कि सोलन जिले में अनुसूचित जाति बाहुल्य आबादी को सिंचाई सुविधा प्रदान करने के लिये 3.85 करोड़ रुपये की कुरगल-नौरा-टकरयाणा सिंचाई योजना स्वीकृत की गई है। इस योजना के निर्माण से क्षेत्र में सब्जी उत्पादन बढे़गा जिससे किसानों की आर्थिकी सुदृढ़ होगी।

डा. शांडिल ने कहा कि राज्य सरकार मुख्यमंत्री के कुशल नेतृत्व में विकास को प्रदेश के अंतिम छोर तक सुनिश्चित बना रही है और आम लोगों की समस्याओं का उनके घर-द्वार के समीप निवारण करने के लिये संवेदनशील है। गांवों के विकास के लिये संपर्क मार्गों का निर्माण, स्कूल व स्वास्थ्य भवनों, पेयजल व सिंचाई योजनाओं का निर्माण अति महत्वपूर्ण है और राज्य सरकार इस पर विशेष ध्यान दे रही है और धन की भी कोई कमी नहीं है। उन्होंने लोगों से विकास एवं निर्माण कार्यों के निष्पादन में सहयोग देने की अपील की।

मंत्री ने कहा कि सोलन के समीप शामती बाईपास के निर्माण को लेकर क्षेत्र के लोगों की दीर्घकालीन मांग को पूरा करते हुए इसका निर्माण कार्य शुरू किया जा चुका है और 6 किलोमीटर लंबा यह बाईपास शीघ्र तैयार किया जाएगा।

डा. शांडिल ने कहा कि सोलन जिले की जलवायु सब्जी उत्पादन के लिये उपयुक्त है। इसी के दृष्टिगत जिले में अधोसंरचना का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वाकनाघाट में विशाल सब्जी मण्डी का निर्माण किया जा रहा है जिससे सोलन निर्वाचन क्षेत्र तथा शिमला ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्र की बड़ी आबादी लाभान्वित होगी।

इस सब्जी मण्डी के माध्यम से बिशा, बाशा, तुंदल, क्वारग, वाकना, देलगी, सायरी, ममलीग, छौशा, सतरोल, कुफटू, कनौड़, जघाणा, कायला इत्यादि पंचायतों के किसानों के उत्पादों का विपणन किया जाएगा। इसके अलावा जिले के लिये चार एकत्रीकरण केन्द्र स्वीकृत किए गए हैं जिन्हें सब्जी उत्पादन क्षेत्रों में स्थापित किया जाएगा जिससे किसानों की उपज को मण्डियों तक पहुंचाने की सुविधा मिलेगी और उन्हें वाजिब दाम भी प्राप्त होंगे।

सायरी में पुलिस थाना खोला जाएगा जिसके अंतर्गत सोलन जिले की सात तथा शिमला ग्रामीण की 10 पंचायतें आती हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिये मुख्यमंत्री ने अपनी संस्तुति प्रदान कर दी है। डा. शांडिल ने पंचायती राज संस्थानों के प्रतिनिधियों तथा अधिकारियों से सरकारी व पुरानी परिसम्पतियों का समुचित रखरखाव करने को भी कहा।

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10 कार्यकर्ताओं के निष्कासन पर ऐबीवीपी का धरना प्रदर्शन,विश्वविद्यालय पर एक तरफा कार्यवाही का लगाया आरोप

ABVP Protest at HPU over suspension of members 2

शिमला– आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इकाई ने विश्वविद्यालय में पिंक पेटल्स चौक पर धरना प्रदर्शन किया । इकाई सचिव अंकित चंदेल ने जानकारी देते हुए बताया की पिछले कल विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से एक तनशाही फैसला निकाला गया जिसमें 10 ऐबीवीपी कार्यकर्ताओं को विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया।

गौरतलव है की पिछले 11 जुलाई को विद्यार्थी परिषद ने कैम्पस मे धरना प्रदर्शन किया था जिसके चलते 10 छात्रों का निष्काशन कर दिया है।

ABVP Protest at HPU over suspension of members 3

धरने को संबोधित करते हुए इकाई सचिव अंकित चन्देल ने बताया की एक तरफ जब कर्मचारियों द्वारा कुलपति कार्यालय में नारेबाजी की जाती है तो उन कर्मचारियों क खिलाफ कुलपति साहब की कोई प्रतिक्रिया नही आती, परन्तु जब ऐबीवीपी कैम्प्स में धरना प्रदर्शन करते है तो उन्हें तुरन्त प्रभाव से निष्कासित कर दिया जाता है जोकि सरासर एकतरफा कार्यवाही है।

चन्देल ने कहा कि विश्वविद्यालय अपनी कमियों को छुपाने क लिए तरह-2 के हथकण्डे अपना रहा है। जहाँ अधूरे परिणामों की वजह से प्रदेश भर के छात्र परेशानी में हैं वहीँ प्रशासन अपने मुंह मिया मिठु बनने में कोई कसर नही छोड़ता।

ABVP Protest at HPU over suspension of members

चन्देल ने कहा कि सभी को ज्ञात है विवि में नौ महीने में पीएचडी (P.hD) और एमसीऐ (MCA) में फर्जी तरीके से प्रवेश के मामले सामने आते है, और इन सभी गडवड़ियों के विरोध करने वाले छात्र संगठनों की आवाज को दबाने का प्रयास विश्वविद्यालय प्रशासन् कर रहा है।

धरने क माध्यम से प्रशासन को चेताते हुये परिषद ने मांग उठाई विश्वविद्यालय अपना काम करे न कि छात्र संगठनों के कार्य मे दखल दे। ऐबीवीपी ने चेतावनी दी है कि जल्द से जल्द परिषद कार्यकर्ताओं का निष्कासन् वापिस नही करता है तो प्रदेश स्तरीय आंदोलन करने में कोई गूरेज़ नही होगाI ऐबीवीपी ने साथ ही यूजी UG के सभी परीक्षा परणामों को पूरा करने की मांग भी प्रशासन के सामने रखी है।

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सेब के सर्मथन मुल्य में मात्र 50 पैसे बढ़ौतरी बागवानों से भद्दा मजाकः राठौर

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा सेब के सर्मथन मुल्य में की गई मात्र 50 पैसे की बढ़ौतरी को बागवानों के साथ किया गया भद्दा मजाक करार दिया है।

आज शिमला से जारी प्रेस वयान में कुलदीप सिंह राठौर ने बताया कि वर्तमान समय में जब बागवानों को अपनी फसल तैयार करने के लिए भारी मंहगाई का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि जी.एस.टी के चलते सेब से संबंधित पैकिंग से लेकर फफूंद नाशक दवाईयां एवं अपनी फसलों को मंण्ड़ियों तक पहुॅचाने के लिए किराया भी कई गुणा बढ़ गया है इसके चलते सेब के सर्मथन मुल्य कम से कम 10 रूपये होना चाहिए।

कुलदीप राठौर ने कहा कि सेब इलाकों में बहुत जगह सड़कों की हालत खराब पड़ी है और सेब को मण्ड़ियों तक पहुॅचाने वाले ट्रक व गाड़ियों के मालिक खराव सडकों पर गाडियाॅं भेजने को मना कर रहे हैं इसलिए सरकार को चाहिए कि ख़राब सडकों को जल्दी से जल्दी ठीक करवायें।

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हिमाचल सरकार पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे : कर्मचारी नेता

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कर्मचारी महासंघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेन्द्र मनकोटिया, पूर्व सयुक्त सचिव सेन राम नेगी,पूर्व प्रेस सचिव हरीश गुलेरिया, गैर शिक्षक महासंघ के महासचिव दीप राम शर्मा ,इंदिरागांधी आयुर्विज्ञान मेडिकल कॉलेज के पूर्व महासचिव आत्मा राम शर्मा ने प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद करने के निर्णय की आलोचना करते हुए इसे कर्मचारी विरोधी बताया है।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जब जब प्रदेश में भाजपा सरकार सत्ता में आई तब तब प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद किया गया,जो कि कर्मचारियों के साथ अन्याय है।

कर्मचारी नेताओं ने जयराम सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि भाजपा कभी भी कर्मचारी हितेषी नही रही है।पूर्व में धूमल सरकार ने भी सत्ता में आते ही इसे बंद किया था अब बर्तमान में जयराम सरकार ने भी ऐसा ही किया है।उनका कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रख कर इसे खोला था।इसे खोलने का एक ही उद्देश्य था कि जो सरकार के किसी भी गलत फैंसले को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र था और उसे जल्द और सस्ता न्याय मिल जाता था।

नेताओं का कहना है कि अब ऐसा नही होगा।किसी भी कर्मचारी को न्याय के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना होगा जहां पहले ही हजारों मामले सुनवाई के लिए लंबित पड़े है।

कर्मचारी नेताओं ने मुख्यमंत्री जयराम से आग्रह किया है कि वह इस मामले पर पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे। इसे उन्हें अपनी किसी भी प्रतिष्ठा का प्रश्न नही बनना चाहिए।

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