जब विधायक व मंत्री प्रतिमाह 2.40 लाख में गुजारा नहीं कर सकते तो मिड डे मील वर्करज 1000रु. प्रति माह में कैसे करें गुजारा

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चित्र : ClipArtPanda सांकेतिक

महिलाओं को सशक्त बनाने के वायदे करने वाली सरकार गरीब व विधवा महिलाओं को 1000रु. वेतन देकर उनकी गरीबी का मजाक बना रही है। मिड डे मील वर्करज यूनियन लगातार मिड डे मील वर्करज की मांगों को सरकार के समक्ष उठाती रही है परन्तु सरकार से मात्र आश्वासन ही मिलते है।

शिमला- मिड डे मील कर्मचारी यूनियन (संबंधित सीटू) की राज्य कमेटी की बैठक में सीटू ने कहा कि उन्हने फैसला लिया है कि मिड डे मील वर्करज की मांगों को मनवाने के लिए और मिड डे मील वर्करज की मांगों के प्रति सरकार के अड़ियल रवैये के खिलाफ 20 जनवरी 2017 को पूर्ण हड़ताल की जाएगी। यूनियन ने आरोप लगाते हुए कहा कि केन्द्र व राज्य सरकारें लगातार मिड डे मील वर्करज के वेतन में बढ़ोतरी की बात करती है परन्तु उसे लागू नहीं करती। राज्य सरकारों ने 12 सालों से मिड डे मील वर्करज के वेतन में एक रुपए की भी बढ़ोतरी नहीं की है। मिड डे मील वर्करज को मात्र एक हजार रुपए प्रतिमाह दिया जाता है और वो भी साल में मात्र 10 महीने का दिया जाता है।

लगातार महंगाई बढ रही है परन्तु मिड डे मील वर्करज के वेतन में बढ़ोतरी नहीं की गई है। मिड डे मील वर्करज ने सरकार से जानना चाह है कि जब विधायक व मंत्री प्रतिमाह 2 लाख 40 हज़ार में गुजारा नहीं कर सकते तो मिड डे मील वर्करज 1000रु. प्रति माह में कैसे गुजारा करे। महिलाओं को सशक्त बनाने के वायदे करने वाली सरकार गरीब व विधवा महिलाओं को 1000रु. वेतन देकर उनकी गरीबी का मजाक बना रही है। मिड डे मील वर्करज यूनियन लगातार मिड डे मील वर्करज की मांगों को सरकार के समक्ष उठाती रही है परन्तु सरकार से मात्र आश्वासन ही मिलते है। इससे सरकार का गरीब विरोधी चेहरा बेनकाब हो जाता है। प्रदेश सरकार बड़े पैमाने पर मिड डे मील वर्करज का शोषण कर रही है।

यूनियन ने कहा कि उन्होंने फैसला लिया है कि 20 जनवरी से पहले प्रदेश के मुख्यमंत्री को इस बजट सत्र में मिड डे मील वर्करज के वेतन में बढ़ोतरी का प्रावधान करवाने के लिए ज्ञापन दिया जाएगा। यूनियन ने बैठक में मांग की कि मिड डे मील वर्करज को सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन 6000रु.प्रतिमाह दिया जाए। मिड डे मील वर्करज को चैथे दर्जे का सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए। 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को तुरन्त लागू किया जाए जिसमें मिड डे मील वर्करज को सरकारी कर्मचारी मानना, ग्रेच्युटी व पैन्शन की सुविधा इत्यादि शामिल है।

मिड डे मील कर्मचारियों यूनियन ने कहा कि मिड डे मील कर्मचारियों को नौकरी से न हटाया जाए, प्रत्येक स्कूल में दो मिड डे -मील कर्मचारियों को नियुक्त किया जाए। मिड डे मील कर्मचारियों से अतिरिक्त कार्य करवाने के लिए अतिरिक्त वेतन दिया जाए। मिड डे मील वर्करज के लिए नियुक्ती पत्र व पहचान पत्र दिए जाए। महिला वर्करज के लिए 6 महीने का प्रसुति अवकाश दिया जाए। मिड – डे – मील वर्करज को प्रतिमाह वेतन का भुगतान किया जाए।

यूनियन ने मिड डे मील वर्करज की मांगों व सरकार की मिड डे मील वर्करज विरोधी नीतियों के खिलाफ प्रदेश में 50,000 पर्चे छापने का फैसला लिया है। पर्चे को पूरे प्रदेश के मिड डे मील वर्करज में बांटा जाएगा। राज्य कमेटी ने प्रदेश के पुरे मिड डे मील वकर्मचारियों ने से अपील करते हुए कहा कि सरकार की मिड डे मील वर्करज विरोधी नीतियों के खिलाफ 20 जनवरी 2017 की हड़ताल को सफल बनाने के लिए पूर्ण प्रयास करे।

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