दिव्यांग कर रहा पैम्फलेट बाँट के गुजारा , सरकार से कर रहा नौकरी की गुहार

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disabled nazim khan Nahan

सिरमौर- कौन कहता है कि दिव्यांग केवल दुसरो पर निर्भर रहने को मजबूर होते है। हम में अधिकतर ने देखा होगा कि कुछ दिव्यांग होने के बावजूद भी मेहनत करना नहीं भूलते। ऐसे ही एक मिसाल पेश की है हिमाचल प्रदेश के नाहन के रानीताल बाग निवासी नाजिम खान ने। 32 वर्षीय नाजिम बचपन से ही दिव्यांग हैं और जितना संभव हो सके नाज़िम उतनी महेनत कर अपना पेट पलता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार नाजिम एक गरीब परिवार से तालुख रखते हैं। इनके पिता मिस्त्री का काम करते हैं तो मां गृहिणी है। गरीब माता पिता अपने बेटे का दिव्यांग होना उन्हें हमेशा ही चिंतित रखता है लेकिन उसके काम करने की लगन से उन्हें कुछ राहत जरूर मिलती है।

संस्थानों के पैम्फलेट बांट कर करता है गुजारा

अभिभावक बताते हैं कि नाजिम 40 प्रतिशत दिव्यांग है, वह सही से बातचीत नहीं कर सकता और हाथ व टांगों में समस्या होने के कारण वह सही से चलने में असमर्थ है और हाथों से काम करने में भी लेकिन जितना हो सके वह काम करता है। नाजिम पिछले कई सालों से अलग-अलग संस्थानों के पैम्फलेट बांटता है और पैम्फलेट बांटकर जो राशि मिलती है उससे अपना गुजारा करता है। हालांकि पैम्फलेट बांटने का काम आसान नहीं है और उसके लिए इधर-उधर चलना पड़ता है लेकिन फिर भी वह यह काम करता है।

मुख्यमंत्री से लगाई नौकरी की गुहार

दिव्यांग नाजिम ने बताया कि वह 40 प्रतिशत तक दिव्यांग है और परिवार गरीब होने के चलते उसे अपना गुजारा चलाना मुश्किल होता जा रहा है, ऐसे में उसने मुख्यमंत्री से हाल ही में कोई छोटी नौकरी दिलवाने की गुहार लगाई है ताकि वह अपना पेट पाल सके और उसे दूसरों पर निर्भर न रहना पड़े। नाजिम ने सरकार से गुहार लगाई कि दिव्यांगों की नौकरी पर बल दिया जाए। नाज़िम केवल काम नहीं करता बल्कि समाज सेवा के कार्यों में भी अपनी अहम भूमिका निभाता है।

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