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सिरमौर प्रतिनिधि मण्डल ने मोदी से मिल याद दिलाया राजनाथ सिंह का 2014 लोक सभा की चुनावी रैली में किया वादा

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प्रतिनिधि मण्डल ने राजनाथ सिंह को नाहन की 2014 की लोक सभा की चुनावी रैली के बारे याद दिलाया जिस में उन्होंने आश्वासन दिया था कि केन्द्र में एन0 डी0 ए0 की सरकार बनेगी तों इस मांग को पूरा करने का भरसक प्रयास किया जायेगा

शिमला- हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला के गिरिपार क्षे़त्र को जनजातीय घोषित किये जाने को लेकर सिरमौर का एक प्रतिनिधि मण्डल शिमला के सांसद वीरेन्द्र कश्यप के नेतृत्व में पिछले कल प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी से मिला। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला के गिरिपार क्षे़त्र को जनजातीय घोषित किये जाने की बात को प्रधानमंत्री के समक्ष रखी। प्रतिनिधि मण्डल ने प्रधान मंत्री से आग्रह किया कि गिरिपार की शिलाई संगडाह राजगढ कमरूउ व पांउटा साहब कि तहसीलों की 127 पंचायतों जनजातीय घोषित किया जाये। क्योंकि इस क्षेत्र के रिति रिवाज, रहन सहन, खानपान, परम्पराएं एवं मान्यताएं, पिछडापन, न्याय व्यवस्था, वेशभूषा, भाषा एवं संस्कृति पौराणिक सभ्यता, धार्मिक मान्यताएं तथा भोगौलिक परिस्थितियां एक जैसी हैं। और उतराखंण्ड के जोंसार बाबर समान है जोकि 1968 में जनजातीये घोषित कर दिया जा चूका है।

पढ़ें: लड़कियों की कथित तस्करी मामले में शिलाई एडीएम की ट्रांसफर से नाराज़ सैकड़ों लोग सड़क पर उतरे, 7 दिन के भीतर तबादला रद्द करने की दी चेतवानी

ज्ञापन में इस बात का आग्रह किया गया है कि हाटी समुदाय को जनजातीय घोषित किया जाये। यह बात सर्मणीय है कि हिमाचल प्रदेश सरकार द्धारा अभी हाल ही में अगस्त 2016 में एक विस्तृत रिपोर्ट केन्द्रीय सरकार के जनजातीय मामलों के मंत्रालय को भेजी गई है। शिमला के सांसद वीरेन्द्र कश्यप ने मांग रखी कि राजगढ तहसील तथा पांवटा साहिब तहसील के गिरिपार क्षेत्र में आती हैं, उन्हें रिपोर्ट में छोड दिया गया है, उन्हें भी जनजातीय किये जाने हेतु कारवाई की जाये।

प्रधानमंत्री ने प्रतिनिधि मण्डल की बातों को ध्यान पूर्वक सुना तथा इस पर तुरन्त कार्यवाही हेतु आशवासन दिया। प्रधानमंत्री प्रतिनिधि मण्डल की सिरमौर लिवास व भेष-भूषा को पहने देखकर बहुत प्रंसन्न हुए और उन्होने हिमाचल प्रदेश में रहते हुए व पार्टी का कार्य करते हुए वहां की कुछ बातों को तरोताजा भी किया ।

प्रतिनिधि मण्डल भारत के गृह मंत्री राजनाथ सिंह से भी मिला तथा उन्हें भी इस मांग को लेकर उसे जल्दी से जल्दी पूरा करने का आग्रह किया! प्रतिनिधि मण्डल ने राजनाथ सिंह को नाहन की 2014 की लोक सभा की चुनावी रैली के बारे याद दिलाया जिस में उन्होंने आश्वासन दिया था कि केन्द्र में एन0 डी0 ए0 की सरकार बनेगी तों इस मांग को पूरा करने का भरसक प्रयास किया जायेगा

प्रतिनिधि मण्डल केन्द्रीय स्वास्थय मंत्री जगत प्रकाश नडडा से उनके सांसद के कार्यालय में मिला और उन्हें इस बारे में पूरी विस्तृत जानकारी देते हुए याद दिलाया कि जब वो विधान सभा में विप़क्ष के नेता तथा बाद में धूमल सरकार में संसदीय कार्य मंत्री थे तो उन्होंने इस मामले को विधान सभा में उठाया था तथा सरकार का एक सकलप भी पेश किया था। नडडा ने प्रतिनिधि मण्डल को आश्वसत किया कि इस मामले का महत्व को देखते हुए व केन्द्रीय सरकार कि जो भी मदद होगी उस में वह व्यक्तिगत रूचि लेगें।

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10 कार्यकर्ताओं के निष्कासन पर ऐबीवीपी का धरना प्रदर्शन,विश्वविद्यालय पर एक तरफा कार्यवाही का लगाया आरोप

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शिमला– आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इकाई ने विश्वविद्यालय में पिंक पेटल्स चौक पर धरना प्रदर्शन किया । इकाई सचिव अंकित चंदेल ने जानकारी देते हुए बताया की पिछले कल विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से एक तनशाही फैसला निकाला गया जिसमें 10 ऐबीवीपी कार्यकर्ताओं को विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया।

गौरतलव है की पिछले 11 जुलाई को विद्यार्थी परिषद ने कैम्पस मे धरना प्रदर्शन किया था जिसके चलते 10 छात्रों का निष्काशन कर दिया है।

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धरने को संबोधित करते हुए इकाई सचिव अंकित चन्देल ने बताया की एक तरफ जब कर्मचारियों द्वारा कुलपति कार्यालय में नारेबाजी की जाती है तो उन कर्मचारियों क खिलाफ कुलपति साहब की कोई प्रतिक्रिया नही आती, परन्तु जब ऐबीवीपी कैम्प्स में धरना प्रदर्शन करते है तो उन्हें तुरन्त प्रभाव से निष्कासित कर दिया जाता है जोकि सरासर एकतरफा कार्यवाही है।

चन्देल ने कहा कि विश्वविद्यालय अपनी कमियों को छुपाने क लिए तरह-2 के हथकण्डे अपना रहा है। जहाँ अधूरे परिणामों की वजह से प्रदेश भर के छात्र परेशानी में हैं वहीँ प्रशासन अपने मुंह मिया मिठु बनने में कोई कसर नही छोड़ता।

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चन्देल ने कहा कि सभी को ज्ञात है विवि में नौ महीने में पीएचडी (P.hD) और एमसीऐ (MCA) में फर्जी तरीके से प्रवेश के मामले सामने आते है, और इन सभी गडवड़ियों के विरोध करने वाले छात्र संगठनों की आवाज को दबाने का प्रयास विश्वविद्यालय प्रशासन् कर रहा है।

धरने क माध्यम से प्रशासन को चेताते हुये परिषद ने मांग उठाई विश्वविद्यालय अपना काम करे न कि छात्र संगठनों के कार्य मे दखल दे। ऐबीवीपी ने चेतावनी दी है कि जल्द से जल्द परिषद कार्यकर्ताओं का निष्कासन् वापिस नही करता है तो प्रदेश स्तरीय आंदोलन करने में कोई गूरेज़ नही होगाI ऐबीवीपी ने साथ ही यूजी UG के सभी परीक्षा परणामों को पूरा करने की मांग भी प्रशासन के सामने रखी है।

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सेब के सर्मथन मुल्य में मात्र 50 पैसे बढ़ौतरी बागवानों से भद्दा मजाकः राठौर

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा सेब के सर्मथन मुल्य में की गई मात्र 50 पैसे की बढ़ौतरी को बागवानों के साथ किया गया भद्दा मजाक करार दिया है।

आज शिमला से जारी प्रेस वयान में कुलदीप सिंह राठौर ने बताया कि वर्तमान समय में जब बागवानों को अपनी फसल तैयार करने के लिए भारी मंहगाई का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि जी.एस.टी के चलते सेब से संबंधित पैकिंग से लेकर फफूंद नाशक दवाईयां एवं अपनी फसलों को मंण्ड़ियों तक पहुॅचाने के लिए किराया भी कई गुणा बढ़ गया है इसके चलते सेब के सर्मथन मुल्य कम से कम 10 रूपये होना चाहिए।

कुलदीप राठौर ने कहा कि सेब इलाकों में बहुत जगह सड़कों की हालत खराब पड़ी है और सेब को मण्ड़ियों तक पहुॅचाने वाले ट्रक व गाड़ियों के मालिक खराव सडकों पर गाडियाॅं भेजने को मना कर रहे हैं इसलिए सरकार को चाहिए कि ख़राब सडकों को जल्दी से जल्दी ठीक करवायें।

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हिमाचल सरकार पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे : कर्मचारी नेता

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कर्मचारी महासंघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेन्द्र मनकोटिया, पूर्व सयुक्त सचिव सेन राम नेगी,पूर्व प्रेस सचिव हरीश गुलेरिया, गैर शिक्षक महासंघ के महासचिव दीप राम शर्मा ,इंदिरागांधी आयुर्विज्ञान मेडिकल कॉलेज के पूर्व महासचिव आत्मा राम शर्मा ने प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद करने के निर्णय की आलोचना करते हुए इसे कर्मचारी विरोधी बताया है।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जब जब प्रदेश में भाजपा सरकार सत्ता में आई तब तब प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद किया गया,जो कि कर्मचारियों के साथ अन्याय है।

कर्मचारी नेताओं ने जयराम सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि भाजपा कभी भी कर्मचारी हितेषी नही रही है।पूर्व में धूमल सरकार ने भी सत्ता में आते ही इसे बंद किया था अब बर्तमान में जयराम सरकार ने भी ऐसा ही किया है।उनका कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रख कर इसे खोला था।इसे खोलने का एक ही उद्देश्य था कि जो सरकार के किसी भी गलत फैंसले को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र था और उसे जल्द और सस्ता न्याय मिल जाता था।

नेताओं का कहना है कि अब ऐसा नही होगा।किसी भी कर्मचारी को न्याय के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना होगा जहां पहले ही हजारों मामले सुनवाई के लिए लंबित पड़े है।

कर्मचारी नेताओं ने मुख्यमंत्री जयराम से आग्रह किया है कि वह इस मामले पर पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे। इसे उन्हें अपनी किसी भी प्रतिष्ठा का प्रश्न नही बनना चाहिए।

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