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डलहौजी और दिल्ली के बीच जल्द चलेगी लक्ज़री बस, इलेक्ट्रिक बसें खरीदने के लिए टेंडर प्रक्रिया भी शुरू: परिवहन मंत्री

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चम्बा- डलहौजी और दिल्ली के बीच जल्द लक्ज़री बस सेवा शुरू होगी। इस बस सेवा के शुरू होने से विशेषकर पर्यटकों को आरामदायक बस सेवा की सुविधा मिलेगी । मंत्री जीएस बाली ने यह बात आज परिधि गृह डलहौजी में आयोजित पत्रकार सम्मेलन को संबोधित करते हुए दी।

यह बस सेवा डलहोजी से शाम 5:15 बजे चलेगी और अगले दिन सुबह 6 बजे बस दिल्ली पहुंचेगी। दिल्ली से डलहौजी के लिए बस का वापसी समय शाम 3 और 4 बजे के बीच रहेगा और अगले दिन सुबह 5:15 बजे बस डलहौजी पहुंचेगी। परिवहन मंत्री ने कहा कि इस बस सेवा को 31 दिसंबर से पहले शुरू कर दिया जाएगा ।परिवहन मंत्री ने कहा की कनेक्टिविटी योजना के तहत डलहौजी और चंबा से चंडीगढ़ के लिए वातानुकूलित छोटी बसें भी चलाई जाएंगी।

परिवहन मंत्री ने जानकारी देते हुए बताया कि निगम द्वारा 25 इलेक्ट्रिक बसें खरीदने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में डलहौजी और धर्मशाला में भी इलेक्ट्रिक बसें चलाए जाने पर विचार किया जायेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में निगम के बेड़े में करीब 3200 बसें हो चुकी हैं। इसके अलावा 400 नई बसें भी इसी साल निगम के बेड़े में शामिल होंगी। यह बसें जैसे ही निगम को मिलेंगी चंबा क्षेत्र को भी जरुरत के मुताबिक बसे उपलब्ध करवाई जाएगी।

परिवहन मंत्री ने निगम प्रबंधन को निर्देश देते हुए कहा कि देहरादून और पठानकोट के बीच चल रही बस सेवा को डलहौजी तक बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया जाए। डलहौजी बस स्टैंड के मुद्दे पर परिवहन मंत्री ने प्रशासन को निर्देश दिए कि बस स्टैंड के निर्माण के लिए डलहौजी में उपयुक्त भूमि जल्द चिन्हित की जाए ताकि पर्यटन नगरी डलहोजी में बस स्टैंड का निर्माण किया जा सके।

परिवहन मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान लोगों के कल्याण के लिए कई ऐतिहासिक फैसले दिए हैं। उन्होंने बताया कि अब प्रत्येक परिवार को उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से तीन दालें उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि तकनीकी कारणों से सरसों के तेल की आपूर्ति नहीं हो पाई थी लेकिन अब पिछले पेन्डिंग कोटे के साथ उपभोक्ताओं को तेल की आपूर्ति होती रहेगी।

उन्होंने कॉलेज तक जाने वाली सड़क में सुधार के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हिमुडा के अधिकारियों को कॉलेज भवन के निर्माण में गति लाने के निर्देश दे दिए हैं।

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10 कार्यकर्ताओं के निष्कासन पर ऐबीवीपी का धरना प्रदर्शन,विश्वविद्यालय पर एक तरफा कार्यवाही का लगाया आरोप

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शिमला– आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इकाई ने विश्वविद्यालय में पिंक पेटल्स चौक पर धरना प्रदर्शन किया । इकाई सचिव अंकित चंदेल ने जानकारी देते हुए बताया की पिछले कल विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से एक तनशाही फैसला निकाला गया जिसमें 10 ऐबीवीपी कार्यकर्ताओं को विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया।

गौरतलव है की पिछले 11 जुलाई को विद्यार्थी परिषद ने कैम्पस मे धरना प्रदर्शन किया था जिसके चलते 10 छात्रों का निष्काशन कर दिया है।

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धरने को संबोधित करते हुए इकाई सचिव अंकित चन्देल ने बताया की एक तरफ जब कर्मचारियों द्वारा कुलपति कार्यालय में नारेबाजी की जाती है तो उन कर्मचारियों क खिलाफ कुलपति साहब की कोई प्रतिक्रिया नही आती, परन्तु जब ऐबीवीपी कैम्प्स में धरना प्रदर्शन करते है तो उन्हें तुरन्त प्रभाव से निष्कासित कर दिया जाता है जोकि सरासर एकतरफा कार्यवाही है।

चन्देल ने कहा कि विश्वविद्यालय अपनी कमियों को छुपाने क लिए तरह-2 के हथकण्डे अपना रहा है। जहाँ अधूरे परिणामों की वजह से प्रदेश भर के छात्र परेशानी में हैं वहीँ प्रशासन अपने मुंह मिया मिठु बनने में कोई कसर नही छोड़ता।

ABVP Protest at HPU over suspension of members

चन्देल ने कहा कि सभी को ज्ञात है विवि में नौ महीने में पीएचडी (P.hD) और एमसीऐ (MCA) में फर्जी तरीके से प्रवेश के मामले सामने आते है, और इन सभी गडवड़ियों के विरोध करने वाले छात्र संगठनों की आवाज को दबाने का प्रयास विश्वविद्यालय प्रशासन् कर रहा है।

धरने क माध्यम से प्रशासन को चेताते हुये परिषद ने मांग उठाई विश्वविद्यालय अपना काम करे न कि छात्र संगठनों के कार्य मे दखल दे। ऐबीवीपी ने चेतावनी दी है कि जल्द से जल्द परिषद कार्यकर्ताओं का निष्कासन् वापिस नही करता है तो प्रदेश स्तरीय आंदोलन करने में कोई गूरेज़ नही होगाI ऐबीवीपी ने साथ ही यूजी UG के सभी परीक्षा परणामों को पूरा करने की मांग भी प्रशासन के सामने रखी है।

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सेब के सर्मथन मुल्य में मात्र 50 पैसे बढ़ौतरी बागवानों से भद्दा मजाकः राठौर

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा सेब के सर्मथन मुल्य में की गई मात्र 50 पैसे की बढ़ौतरी को बागवानों के साथ किया गया भद्दा मजाक करार दिया है।

आज शिमला से जारी प्रेस वयान में कुलदीप सिंह राठौर ने बताया कि वर्तमान समय में जब बागवानों को अपनी फसल तैयार करने के लिए भारी मंहगाई का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि जी.एस.टी के चलते सेब से संबंधित पैकिंग से लेकर फफूंद नाशक दवाईयां एवं अपनी फसलों को मंण्ड़ियों तक पहुॅचाने के लिए किराया भी कई गुणा बढ़ गया है इसके चलते सेब के सर्मथन मुल्य कम से कम 10 रूपये होना चाहिए।

कुलदीप राठौर ने कहा कि सेब इलाकों में बहुत जगह सड़कों की हालत खराब पड़ी है और सेब को मण्ड़ियों तक पहुॅचाने वाले ट्रक व गाड़ियों के मालिक खराव सडकों पर गाडियाॅं भेजने को मना कर रहे हैं इसलिए सरकार को चाहिए कि ख़राब सडकों को जल्दी से जल्दी ठीक करवायें।

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हिमाचल सरकार पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे : कर्मचारी नेता

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कर्मचारी महासंघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेन्द्र मनकोटिया, पूर्व सयुक्त सचिव सेन राम नेगी,पूर्व प्रेस सचिव हरीश गुलेरिया, गैर शिक्षक महासंघ के महासचिव दीप राम शर्मा ,इंदिरागांधी आयुर्विज्ञान मेडिकल कॉलेज के पूर्व महासचिव आत्मा राम शर्मा ने प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद करने के निर्णय की आलोचना करते हुए इसे कर्मचारी विरोधी बताया है।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जब जब प्रदेश में भाजपा सरकार सत्ता में आई तब तब प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद किया गया,जो कि कर्मचारियों के साथ अन्याय है।

कर्मचारी नेताओं ने जयराम सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि भाजपा कभी भी कर्मचारी हितेषी नही रही है।पूर्व में धूमल सरकार ने भी सत्ता में आते ही इसे बंद किया था अब बर्तमान में जयराम सरकार ने भी ऐसा ही किया है।उनका कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रख कर इसे खोला था।इसे खोलने का एक ही उद्देश्य था कि जो सरकार के किसी भी गलत फैंसले को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र था और उसे जल्द और सस्ता न्याय मिल जाता था।

नेताओं का कहना है कि अब ऐसा नही होगा।किसी भी कर्मचारी को न्याय के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना होगा जहां पहले ही हजारों मामले सुनवाई के लिए लंबित पड़े है।

कर्मचारी नेताओं ने मुख्यमंत्री जयराम से आग्रह किया है कि वह इस मामले पर पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे। इसे उन्हें अपनी किसी भी प्रतिष्ठा का प्रश्न नही बनना चाहिए।

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