हिमाचल के इतिहास में वर्तमान वीरभद्र सरकार सबसे निकम्मी एवं अकर्मण्य, विभागों में दलालों का राज: गणेश दत

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Ganesh dutt vs virbhadra singh

डाॅक्टरों की संख्या घटकर 50 प्रतिशत रह गयी है, जो बजट सबसेडाईज्ड राशन के लिए रखा गया है वह राशन जनता को मिल नहीं रहा, जो मिल रहा है वह खाने योग्य नहीं, अन्य विभागों में भी दलालों का राज  

शिमला – हिमाचल प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के उपाध्यक्ष गणेश दत ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश के इतिहास में वर्तमान वीरभद्र सरकार सबसे निकम्मी एवं अकर्मण्य सरकार है। यहां पता ही नहीं चल रहा है कि आखिर सरकार चला कौन रहा है। पार्टी उपाध्यक्ष ने कहा कि अधिकतर अधिकारियों की ट्रांसफर कौन कर रहा है यह मुख्यमंत्री को तब पता चलता है जब तबादला आदेश जारी हो जाते हैं।

इसी तरह अन्य विभागों में भी दलालों का राज चल रहा है लेकिन सरकार इन सभी मामलों पर मूक दर्शक बनकर तमाशबीन बनी हुई है।

पार्टी उपाध्यक्ष ने कहा कि सरकारी डिपुओं पर राशन नहीं है। खाद्य मंत्री जी0एस0 बाली पिछले डेढ़ साल से कह रहे हैं कि अगले महीने से सरसों का तेल मिलेगा लेकिन अगला महिना नहीं आ रहा है। भाजपा ने सरकार से पूछा है कि जो बजट सबसेडाईज्ड राशन के लिए रखा गया है वह राशन जनता को मिल नहीं रहा, जो मिल रहा है वह खाने योग्य नहीं है। तो तीन प्रकार की दालें, 2 प्रकार के तेल व नमक कहां जा रहा है ?

भाजपा उपाध्यक्ष ने कहा कि अस्पतालों में स्टाफ नहीं है। विशेषज्ञ डाॅक्टरों की संख्या घटकर 50 प्रतिशत रह गयी है। पैरामैडिकल स्टाफ नहीं है और अस्पतालों में बच्चे बदले जा रहे हैं और सरकार तमाशा देख रही है। पार्टी उपाध्यक्ष ने कहा कि महंगे उपकरण, मशीनरी खरीद कर अस्पतालों में लाई जाती है और तकनीकि स्टाफ न होने के कारण मशीनो को जंग खा रहा है! सारे के सारे टैस्ट प्राइवेट कम्पनियों के माध्यम से हो रहे हैं। आखिर सरकार ने यह क्या तमाशा बना रखा है।

पार्टी उपाध्यक्ष ने कहा कि जिला, क्षेत्रीय एवं प्रदेश स्तरीय अस्पतालों में भी मरीजों की देखभाल व उनके चिकित्सा की सुविधा न होने के कारण उन्हें रैफर कर दिया जाता है। भाजपा उपाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार के विभागों में छोटी-2 विकास योजनाओं के लिये धनराशि नहीं है लेकिन सरकार के पास आलीशान लग्जरी गाड़ियां खरीदने के लिए पर्याप्त धनराशि है। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकता अनावश्यक खर्च कर सरकारी पैसे की बर्बादी करना है तथा जनकल्याण के लिये न सरकार के पास पैसा है और न समय है।

भाजपा ने सरकार से मांग की है कि जो उसने लगभग चार वर्ष पूर्व कांग्रेस के घोषणा पत्र को सरकारी दस्तावेज बनाया था उसकी ओर मुड़ के देखा भी नहीं और सरकारी दस्तावेज सरकारी डस्टबिन की शोभा बढ़ा रहा है। इसलिए सरकार को अपनी की गई घोषणाओं को जनता को बताना चाहिए कि उसने गत 49 महिनो में क्या-2 कार्य किये हैं तथा सरकार ने पार्टी के घोषणा पत्र में से कौन-2 सी घोषणायें पूरी की है।

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