हिमाचल में बंदरों को मारने के निर्णय के खिलाफ दायर याचिका खारिज

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Shimla-Monkeys

शिमला- दिल्ली हाईकोर्ट ने फसलों की सुरक्षा के नाम पर हिमाचल समेत विभिन्न राज्यों में बंदर, नील गाय और अन्य जानवरों को मारने के निर्णय के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी है।

मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी व न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता को राज्यों के फैसले पर हस्तक्षेप करने का कोई ठोस आधार नहीं है। ऐसे में उन्हें नहीं लगता कि अदालत को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए।

खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकारों के उस तर्क को स्वीकार कर लिया कि जनहित में जानवरों को मारने की अस्थाई रूप से इजाजत दी गई है। बता दें कि यह जनहित याचिका सुलेख चंद जैन ने दायर की थी।

याचिकाकर्ता ने दी थी ये दलील

उनका कहना है कि मंत्रालय ने विभिन्न राज्यों सरकारों को फसलों को बचाने के नाम पर जानवरों को मारने की इजाजत प्रदान कर दी है। विगत छह माह में बिहार में 500 से ज्यादा नील गायों, पश्चिमी बंगाल में करीब 100 से ज्यादा जंगली हाथियों को मारा जा चुका है।

वहीं, हिमाचल प्रदेश में बंदरों व उत्तराखंड में जंगली सुअरों को मारा जा रहा है।

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