रिवालसर में एनसीसी शिविर में आए कैडेट्स बीमार पड़ने के बाद 1 की मौत, कैंप तुरंत बंद करने के आदेश

0
376
Himachal NCC Cadets

गत गुरुवार से कुछ बच्चों को पेट दर्द की शिकायत सामने आ रही थी,एनसीसी के जिला स्तरीय कैंप में आई छात्रा की मौत के मामले में नया खुलासा हुआ है। यह कैंप राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रिवालसर के परिसर में लगा था और स्कूल के पानी का सैंपल फेल हुआ है, इसी पानी से एनसीसी कैंप में खाना बन रहा था और इसी पानी को एनसीसी कैडेट्स पी रहे थे।

शिमला- रिवालसर में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला में चल रहे एनसीसी के संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर में आए कुछ कैडेट्स के बीमार होने के बाद एक छात्रा की मौत हो गई, जबकि उसकी छोटी बहन अर्चना सहित आठ अन्य छात्र-छात्राओं को क्षेत्रीय अस्पताल मंडी व रत्ती में पेट दर्द व चक्कर आने की शिकायत के बाद भर्ती करवाया गया है। इस घटना के बाद जिला उपायुक्त ने तहसीलदार बल्ह जय गोपाल की रिपोर्ट पर एनसीसी कैंप को तुरंत बंद करने के आदेश दिए हैं, जबकि बल्ह पुलिस ने भी इस घटना के बाद मामला दर्ज कर दिया है। इस घटना को लेकर शिक्षा विभाग ने भी जांच के आदेश दिए हैं।

NCC Battalion Mandi

रविवार देर शाम स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कैंप में पहुंचकर सभी छात्र-छात्राओं की मेडिकल जांच की है। वहीं साई स्कूल में दसवीं कक्षा में पढ़ने वाली मृतक छात्रा कामना पुत्री बलवीर निवासी साईगलू का पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। मंडी अस्पताल में भर्ती कैडेट्स में खुशबू पुत्री पवन कुमार निवासी गोपालपुर मौंही, गीतांजलि पुत्री मनोज निवासी धार, पलक पुत्री हंसराज निवासी साईगलू व अर्चना पुत्री बलवीर निवासी साईगलू शामिल हैं। अर्चना मृतक कामना की ही छोटी बहन है। इसके अलावा रत्ती अस्पताल में डिंपल पुत्री कृष्ण लाल द्रंग (बड़ा गांव), अजय कुमार पुत्र रामलाल गुम्मा, मंजू पुत्री कृष्ण चंद जमणी (सरकाघाट) व दीपक भर्ती हैं।

जानकारी के अनुसार रिवालसर में 11 जुलाई से शुरू हुए दस दिवसीय इस कैंप में स्कूल लेवल से लेकर कालेज स्तर के 443 कैडेट्स भाग ले रहे हैं। गत गुरुवार से कुछ बच्चों को पेट दर्द की शिकायत सामने आ रही थी। रत्ती अस्पताल में एक दिन भर्ती रहने के बाद दो कैडेट्स को शुक्रवार को छुट्टी दी गई थी, जबकि कामना को शनिवार को दिन भर रिवालसर अस्पताल में उपचार के बाद चिकित्सकों ने छुट्टी दे कर कैंप में वापस भेज दिया था। शनिवार रात को फिर तबीयत खराब होने पर उसे 108 एंबुलेंस से अस्पताल लाया गया और रात 11 बजे आईसीयू में उसकी मौत हो गई।

फिलहाल छात्रा की मौत और अन्य कैडेट्स के बीमार होने के पीछे की वजह पता नहीं चल सकी है। पहले इस मामले को दूषित जल या खाने से जोड़ा जा रहा था, लेकिन 400 से अधिक बच्चों में सिर्फ 10 कैडेट्स के बीमार होने की बात सामने आई है। इसके साथ ही कैंप में सेना के अधिकारियों की निगरानी में खाना बनाया जा रहा था। इस मामले के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कामना का बिसरा लैब में जांच के लिए भेज दिया है, जबकि रविवार देर शाम स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कैंप में जाकर सभी बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की है। बल्ह तहसीलदार जयगोपाल, उच्च शिक्षा उपनिदेशक मंडी अशोक शर्मा और एसएचओ बल्ह संजीव सूद ने भी प्रशासन के आदेशों पर कैंप में जाकर स्थिति का जायजा लिया। तहसीलदार बल्ह जयगोपाल ने बताया कि उपायुक्त ने कैंप को बंद करने के आदेश दिए हैं। बल्ह पुलिस थाना प्रभारी संजीव सूद ने बताया कि पुलिस ने मामला दर्ज कर दिया है। यह सब किसकी लापरवाही से हुआ, इसकी जांच की जाएगी। कर्नल पियूष अग्रवाल, एनसीसी बटालियन मंडी ने कहा कि कैंप में कुल 442 कैडेट्स स्कूलों से मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही ट्रेनिंग ले रहे हैं। बच्चों में कैंप के खाने-पीने से कोई बीमारी नहीं हुई है। अगर ऐसा होता और सभी बच्चे और स्टाफ भी बीमार पड़ते। उधर, उच्च शिक्षा उपनिदेशक मंडी अशोक शर्मा ने बताया कि विभाग भी मामले की जांच करेगा।

26 जनवरी की परेड को हुई थी सिलेक्ट

newsएनसीसी कैडेट कामना का चयन अगले वर्ष राजपथ पर होने वाली 26 जनवरी की परेड के लिए हो चुका था और वह तीसरी बार कैंप में भाग लेने आई थी, लेकिन शनिवार रात को उसकी मौत हो गई।

443 बच्चों पर दो हैल्थ वर्कर, नहीं मिले डाक्टर

एनसीसी ने स्वास्थ्य विभाग से इस जिला स्तरीय एनसीसी कैंप में डाक्टर भेजने को खत लिखा था, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की तरफ से सिर्फ दो हैल्थ वर्कर ही उपलब्ध करवाए गए। डाक्टर की कमी इस कैंप में शामिल कैडेट्स के लिए काफी घातक साबित हुई।

रिवालसर स्कूल के पानी का सैंपल फेल

एनसीसी के जिला स्तरीय कैंप में आई छात्रा की मौत के मामले में नया खुलासा हुआ है। यह कैंप राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रिवालसर के परिसर में लगा था और इस स्कूल का पानी जांच में खरा नहीं उतरा है। पानी का सैंपल स्कूल में पानी स्टोर करने के लिए बनाई गई टंकी में लगे नलकों में से लिया गया था। इसी पानी से एनसीसी कैंप में खाना बन रहा था और इसी पानी को एनसीसी कैडेट्स पी रहे थे। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कैडेट की मौत के बाद रिवालसर स्कूल और आसपास के क्षेत्रों से पानी के पांच सैंपल लिए थे। इसके साथ ही कैंप में बने खाने के भी सैंपल लिए गए थे। इसमें सिर्फ फूड के सैंपल की रिपोर्ट अभी नहीं आई है, लेकिन सिर्फ रिवालसर स्कूल से लिए गए पानी का सैंपल फेल निकला है।

सैंपल की जांच स्वास्थ्य विभाग मंडी की माइक्रोबायोलॉजिस्ट डा. लता ने स्वयं की है, जिनकी रिपोर्ट के अनुसार पानी शुद्ध नहीं है। ऐसे में पानी के सैंपल के फेल होने के बाद अब एक बार फिर से एनसीसी अधिकारियों, शिक्षा विभाग और आईपीएच विभाग के अधिकारियों पर सवाल खडे़ हो गए हैं। यही नहीं, इतने बडे़ स्तर पर कैंप आयोजित होने के चलते स्कूल की पानी की टंकियों की साफ-सफाई या ब्लीचिंग की गई थी या नहीं, यह भी अब जांच का हिस्सा होगा। सैंपल की रिपोर्ट फेल होने के बाद इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग ने जिला उपायुक्त, आईपीएच विभाग व संबंधित विभागों को दे दी है। स्वास्थ्य विभाग ने स्कूल की टंकियों की तुरंत साफ करवाने और पानी में ब्लीचिंग करने की सलाह दी है। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डा. जोगिंद्रपाल ने इस बात की पुष्टि की है। उपायुक्त मंडी संदीप कदम ने बताया कि मामले की जांच जारी है, जिसकी भी लापरवाही रही होगी, उसे बख्शा नहीं जाएगा।

सवाल यह भी

रिवालसर स्कूल कापानी दूषित होने के बाद भी कैंप में शेष बच्चों का बीमार न पढ़ने का सवाल भी खड़ा हो गया है, अगर स्कूल का पानी खराब था तो फिर दस बच्चों को ही पेट दर्द या दूसरी शिकायत क्यों थी। जबकि कैंप में 443 बच्चे टे्रनिंग ले रहे थे।

मुहिम को झटका

रिवालसर स्कूल का पानी दूषित होने से जिला प्रशासन मंडी की मुहिम को झटका लगा है। एक साल से जिला प्रशासन स्कूलों की टंकियों की साफ-सफाई विशेष मुहिम चलाए हुए है, लेकिन एनसीसी कैंप वाले स्कूल में इतनी बड़ी लापरवाही सामने आई है।

Photo: TNS/Divya Himachal

हिमाचल वॉचर हिंदी के एंड्रायड ऐप के लिए यहां क्लिक करें

NO COMMENTS