चम्बा- विकलांगो के लिए भले ही सरकारे बेहतर सुविधाए देने का दावा करे, पर धरताल पर स्तिथि कुछ और ही है। विकास के तमाम बड़े बड़े दावों के विपरीत कड़वा सच यह भी है कि दोनों पैरों से दिव्यांग युवक अमित घर आने जाने को मात्र 600 मीटर सड़क निर्माण के लिए दो साल से दर -दर की ठोकरें खानी पड़ रही है। इतने दिन में तो पत्थर भी पिघल जाये लेकिन जिला प्रशासन है की उसे रहम ही नहीं आ रही है।

जिला चम्बा उपमंडल सलूणी के तहत पड़ने वाली ग्राम पंचायत ठाकरी मट्टी के गांव मकडोगा के दिव्यांग (विकलांग) युवक का अब धैर्य जवाब देने लगा है। दिव्यांग अमित ठाकुर ने कहा कि वो जन्म से ही 60 प्रतिशत दोनों पैरों से दिव्यांग है और चलने में पूर्ण तय असमर्थ है तथा व्हीलचेयर पर है घर गांव सड़क से काफी ऊपर चढाई पर है जिसकी वजह से उन्हें दैनिक जीवन के व्यक्तिगत और पारिवारिक जरूरतों को पूरा करने को कही भी आने-जाने में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है तथा अपने चिकित्सा उपचार के लिए महीने में दो से तीन बार अस्पताल जाना पड़ता है ऐसे में दोनों पैर से दिव्यांग व्यक्ति के लिए सड़क तक और फिर सड़क से घर तक पहुचना लोहे के चने चबाने जैसा है।

disability act 1995

सड़क नहीं होने के कारण उन्हें कई बार महीनो तक रिस्तेदारो के घर भी रुकना पड़ता है व अधिकतम समय घर से बाहर अपने पिताजी के साथ डलहौज़ी में रहना पड़ रहा है सड़क नहीं होने के कारण जीवन नारकीय हो गया है। पिछले अनेक वर्षों से वो सड़क निर्माण करने की मांग विभिन्न पत्रों के माध्यम से कर रहे हैं। उन्होंने बताया की लगभग ढ़ाई साल पहले पत्र लिख के आयुक्त विकलांगजन हिमाचल प्रदेश को समस्या से अवगत कराया था ओर आयुक्त विकलांगजन ने जिला उपायुक्त और जिला कल्याण अधिकारी को इस और विशेष ध्यान देने और अतिशीघ्र कार्यवाही करने के विशेष लिखित निर्देश थे उसके बाद लोक निर्माण विभाग ने गांव से निचे दरोल नाला से सर्वेक्षण किया और मात्र 600 मीटर सड़क का निर्माण किया जाना है।

गांव के लोग निजी भूमि देने को भी तैयार है और ग्रामीण लोक निर्माण विभाग को ब्यान हलफ़नामा (एफिडेविट) भी दे चुके हैं परन्तु अभी तक सड़क का निर्माण नहीं हुआ और सिर्फ कागजी कार्रवाई चलती रही। अधौहस्ताक्षरी दोनों पैर की दिव्यांगता के वावजूद स्वयं दर्जनों बार एडीएम जिला उपायुक्त चम्बा, जिला कल्याण अधिकारी चम्बा, से मिल चूका है और अधिकारी उन्हें कभी लोक निर्माण विभाग तो कभी मनरेगा के अंतर्गत सड़क बनाने का आशवासन देकर टालते रहे।

इतना ही नहीं विकलांग व्यक्ति ने सांसद शांता कुमार को भी इस बारे पत्र लिख अवगत कराया पर उन्होंने भी राज्य सरकार का मसला बता कर निराश ही किया और एक पत्र मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश को लिखा गया मुख्यमंत्री कार्यालय के सख्त आदेश आने के बाद फिर से दोबारा कार्यवाही हुई और अंत में इसे भी आगे टाल दिया गया। तदुपरांत त्रस्त होकर में इस संबंध में परिवार सहित डलहौज़ी की विधायक से भेट की और उन्होंने लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत ही सड़क निर्माण करवाने का आशवासन दिया और लोक निर्माण विभाग हर बार दो-तीन महीनों में सड़क निर्माण कार्य शुरू करने का आशवासन देता रहा। इसके बाद भी कोई प्रभावी कार्यवाही होती नहीं दिखी।

अन्त इस संबंध एक पत्र राष्ट्रपति और हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल को लिखा, राष्ट्रपति भवन ने कार्यवाही करते हुए मामला अपर मुख्य सचिव अनुपम कश्यप लोक निर्माण विभाग को भेजा व उचित कार्यवाही करने को लिखा और प्रधान सचिव राज्यपाल हिमाचल प्रदेश राज भवन शिमला से भी अतिरिक्त मुख्य सचिव लोक निर्माण विभाग को आवश्यक कार्यवाही करने का लिखित निर्देश हुआ परन्तु वावजूद इसके आज तक भी सड़क निर्माण नहीं हुआ तथा आज भी दोनों पैर से दिव्यांग व्यक्ति को मात्र 600 मीटर सड़क के लिए जगह-जगह भटकाया जा रहा हैं |

उन्होने बताया की लोक निर्माण विभाग हर बार दो महीने में निर्माण कार्य शुरू करने का आशवासन देता रहा है परन्तु लगभग तीन साल हो चुके है और निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ जबकि इस और विकलांग अधिकार अधिनियम-1995 के अनुसार विशेष ध्यान देने की जरूतर थी ये विकलांग अधिकार अधिनियम-1995 का खुला उल्लंघन हैं। इस सड़क लाभ मात्र एक विकलांग व्यक्ति को ही नहीं होगा बल्कि पुरे गांव को होगा।

बरहहाल उन्होंने थकहार कर जिला प्रशासन, हिमाचल सरकार, लोक निर्माण विभाग को अल्टीमेटम दिया और चेताया की यदि किसी भी सूरत में एक माह के भीतर लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत गांव मकडोगा के नीचे दरोल नाला से सड़क का निर्माण कार्य शुरू कराकर न्याय करें अन्यथा उन्हें अपने परिवार के साथ जिला प्रसाशन कार्यालय के बाहर “भूख हड़ताल” पर बैठने और निर्माण कार्य प्रारम्भ नहीं होने तक भूख हड़ताल पर बैठने के लिए विवश होना पड़ेगा । इस दौरान अगर 60 प्रतिशत विकलांगता वाले व्यक्ति के स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार की घटना घटती हैं तो इसकी पूरी जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग, जिला प्रशासन और हिमाचल सरकार की होगी।

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