विधायक साहबान ने अधिनियम में संशोधन कर अपनी पेंशन भी बढ़ाई, 5 साल विधायक रहें या नहीं, ताउम्र 78, 000 से ज्यादा पेंशन लेने के हकदार

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विधायक साहबान शपथ लेने के तुरंत बाद ही पेंशन लेने के हकदार हो जाते हैं, अब 36 हजार मासिक पेंशन में 119 प्रतिशत डीए जोड़ा जाए तो ये पेंशन 78,840 रुपये बनती है

शिमला- सरकारी कर्मचारी 58-60 साल की उम्र तक सेवाएं देने के बाद पेंशन के काबिल बनते हैं लेकिन विधायक साहबान शपथ लेने के तुरंत बाद ही पेंशन लेने के हकदार हो जाते हैं। एक बार शपथ हो गई तो उसके बाद पांच साल तक विधायक रहें या नहीं, ताउम्र पेंशन के लिए पात्र हो जाएंगे।

मृत्यु भी हो जाए तो भी विधवा या उनके माइनर बच्चे को पेंशन मिलती है। दूसरी बार विधायक बनने पर हर साल 1000 रुपये की दर से पेंशन बढ़ती है। हाल में हुए संशोधन के बाद अब विधायकी जाने के बाद किसी भी एमएलए की करीब 78 हजार रुपये की पेंशन लग जाएगी।

साल 1971 में बने हिमाचल प्रदेश विधानसभा भत्ते एवं पेंशन अधिनियम में विधायकों के लिए 5000 रुपये की मासिक पेंशन का प्रावधान किया गया था। बाद में कई संशोधनों के बाद अभी तक ये 22000 रुपये थी। अब इसे बढ़ाकर 36000 रुपये कर दिया गया है।

डीए के साथ 78 हजार से भी ज्यादा पैंशन

प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में इसे बढ़ाने के लिए इस अधिनियम में संशोधन किया गया है। विधायक सुविधा समिति की संस्तुति के बाद सरकार ने पहले इसे 22 हजार से बढ़ाकर 28 हजार रुपये करने का फैसला किया था। सूत्रों ने बताया कि पूर्व विधायकों के इस बीच अनुरोध के बाद इसे बढ़ाकर 36 हजार रुपये मासिक कर दिया गया।

अब 36 हजार मासिक पेंशन में 119 प्रतिशत डीए जोड़ा जाए तो ये पेंशन 78,840 रुपये बनती है। यानी, अब पूर्व विधायक इतनी या इससे ज्यादा पेंशन के हकदार हो जाएंगे। जो दो टेन्योर में विधायक रहे हैं, उनके लिए ये पेंशन अब हर साल 1000 रुपये की दर से बढ़ती रहेगी।

यानी, नई बढ़ोतरी के बाद ही कई पूर्व विधायकों की पेंशन 80 हजार से भी पार हो जाएगी। अगर पेंशन ले रहे पूर्व विधायक की मौत हो जाती है तो उसका परिवार भी पेंशन लेने का हकदार हो जाता है। परिवार में विधवा पत्नी या पत्नी के न होने पर कानूनी तौर पर वारिस माइनर बच्चे को आधी पेंशन मिलती है।

लगातार विधायक रहे हों या नहीं, पेंशन मिलेगी ही

हिमाचल प्रदेश विधानसभा भत्ते एवं पेंशन अधिनियम 1971 की धारा 6 बी में ये व्यवस्था की गई है कि पेंशन का हकदार हर वह आदमी होगा, जो पांच साल के कार्यकाल तक विधानसभा का सदस्य रहा हो। वह चाहे लगातार पांच साल तक सदस्य रहा हो या नहीं।

Photo: Amar Ujala

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