पैसा होते हुए भी सोई रही हिमाचल सरकार, साल के आखिरी महीने में जाकर खर्च किया 63% बजट

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HP Assembly Cag report

विधानसभा में पेश हुई वर्ष 2015 की ऑडिट रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है

शिमला- हिमाचल सरकार के सरकारी विभागों का हाल देखिए। विभाग के अफसर 11 माह तक तो चैन की नींद सोए रहे, लेकिन जब मार्च में बजट लैप्स होने की बात आई तो पांच विभागों ने कुछ ही दिन में 63 फीसदी राशि खर्च कर डाली। इसमें एक विभाग तो सबसे अव्वल है। इस विभाग को 99 फीसदी राशि वित्तीय वर्ष के अंतिम महीने मार्च माह में खर्च करने की याद आई।

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह भले ही प्रदेश भर में घूम-घूमकर विकास योजनाओं का शिलान्यास करते रहे, लेकिन विभागीय अधिकारियों का रवैया लापरवाह रहा। यह खुलासा विधानसभा में पेश हुई वर्ष 2015 की ऑडिट रिपोर्ट में हुआ है। इस रिपोर्ट ने हिमाचल सरकार के सुस्त और लापरवाह अधिकारियों की पोल खोलकर रख दी है।

ऑडिट रिपोर्ट ने अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं और वित्तीय नियमावली 2009 के नियमों का हवाला देते हुए इसे बेहद गलत और गंभीर बताया है। रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों ने साल के वित्तीय वर्ष की अंतिम तिमाही के दौरान 75 प्रतिशत राशि कागजों में ही खर्च कर दी।

इसमें कुछ विभागों के अधिकारियों ने तो कागजों में 80 से 99 फीसदी तक बजट की बंदरबांट कर दी। उन्होंने साल भर में हुए खर्च की ज्यादातर राशि मार्च महीने में खर्च दिखाई है।

सिंचाई योजनाओं में सबसे ज्यादा बंदरबांट

मार्च महीने में खर्च किए 22.81 करोड़ रुपये

ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2015 में सबसे ज्यादा बजट 99 फीसदी सिंचाई योजनाओं पर खर्च किया गया। मध्यम सिंचाई पर वित्त वर्ष 2014-15 में कुल 22.91 करोड़ रुपये खर्च हुए।

इसमें से 22.81 करोड़ रुपये मार्च माह में खर्च किए गए। इसी तरह साल भर में 403.78 करोड़ खर्च करने वाले विद्युत विभाग ने अंतिम तिमाही में कुल खर्च की 82 प्रतिशत राशि खर्च की।

इसमें भी खास बात यह है कि 330 करोड़ की भारी-भरकम राशि को विभाग ने अकेले मार्च 2015 में खर्च किया दिखाया है। इसी तरह कमांड क्षेत्र विकास पर भी मार्च 2015 में साल के दौरान हुए कुल खर्च का 82 प्रतिशत खर्चा गया।

सड़कों और पुलों पर भी 75 फीसदी और आवास आदि पर 67 फीसदी राशि भी मार्च माह में ही खर्च करने की याद आई। प्राकृतिक आपदाओं पर राहत के लिए 56 फीसदी पैसा भी वर्ष की अंतिम तिमाही में पानी की तरह बहाया गया।

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