शिमला मे हाईटेक नया कूड़ा सयंत्र चलाने के नाम पर नगर निगम ने किया गुमराह:टुटू विकास समिति

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शिमला- नगर निगम शिमला द्वारा टुटू-तारादेवी बाईपास पर बरिहाल गाँव में नया हाईटेक कूड़ा सयंत्र चलाने के नाम पर हाईकोर्ट तथा सरकार दोनों को नगर निगम प्रशासन ने वर्ष 2009 में गुमराह किया है! विकास समिति टुटू के अध्यक्ष नागेन्द्र गुप्ता ने निगम प्रशासन पर हाईकोर्ट व् नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल,दिल्ली के आदेशों की अहवेहलना की है!

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उन्होंने कहा कि पूर्व समय में दाड़नी के बगीचे में चल रहे कूड़ा सयंत्र पर वर्ष-2009 में आग लगने पर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर नगर-निगम को कूड़ा सयंत्र शिफ्ट करने के आदेश दिए थे तथा जारी आदेशों में सपष्ट किया था कि नगर-निगम एम. एस. डब्ल्यू -2000 के नियमों का पालन किये बिना बनाये गए नए स्थान पर कूड़ा नहीं फैंक सकती!

उन्होंने कहा कि स्थानीय जनता द्वारा कूड़ा सयंत्र बरिहाल में न बनाने को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में दायर याचिका पर भी एन. जी.टी. के डबल बैंच ने अपने आदेशों में वर्ष -2011 में स्पष्ट किया था कि निगम प्रशासन एम. एस. डब्ल्यू -2000 के नियमों का पालन करे!

नागेन्द्र गुप्ता ने कहा कि निगम प्रशासन ने जल्दबाजी में डी.एल.एफ कम्पनी जिसने दाड़नी के बगीचे के पास कॉलोनी का निर्माण किया है उसे लाभ देने के मकसद से हाईकोर्ट के आदेशों को ढाल बना कर जल्दबाजी में बरिहाल में कूड़ा सयंत्र शिफ्ट कर दिया था जिसका परिणाम आज सरकार व् जनता के सामने है!
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गुप्ता ने कहा की आधुनिकता के नाम पर समय-समय पर स्थापित नगर-निगम व् प्रदेश सरकारें जनता को गुमराह कर नए से नए जंगलों को बर्बाद कर रही है और अब परिणाम यह है कि बगीचे के बाद बरिहाल का हरा-भरा जंगल भी हजारों पेड़ काटने और कूड़े के धुएं के कारण बर्बादी की कगार पर खड़ा हो गया है!

उन्होंने कहा कि बेशक आज आसपास की जनता इस कूड़े सयंत्र की बदबू व् आग लगने के कारण परेशान है लेकिन नया न्यायिक परिसर भी इसकी चपेट में आ गया है! गुप्ता ने कहा की वर्ष -2009 में पूर्व स्थल पर आग लगने व् धुआँ हाईकोर्ट परिसर मे आने पर स्वत: संज्ञान लेकर कूड़ा सयंत्र किसी अन्य स्थान पर शिफ्ट करने के आदेश पारित किये थे और अब भी हाईकोर्ट को चाहिए कि धुआँ उठने लोअर कोर्ट परिसर को आने के दृष्टिगत स्वत: संज्ञान लेकर इसे किसी अन्य स्थान पर शिफ्ट करने के आदेश पारित करें!

विकास समिति के अध्यक्ष नागेन्द्र गुप्ता ने कहा कि उन्होंने कविता के माध्यम से धूमल सरकार के समय से ही बरिहाल कूड़ा सयंत्र में आग लगने व् धुआँ उठने की संभावना व्यक्त कर दी थी और कहा था कि अगली बार आग लगने पर कौन सी जगह पर कूड़ा सयंत्र स्थापित होगा जिसका परिणाम आज शिमला वासियों के सामने है! उन्होंने कहा कि निगम कब तक आधुनिकता के नाम पर जनता को ठगती रहेगी इसकी स्थिति स्पष्ट करे! समिति ने प्रदेश सरकार से भविष्य की चिंता करते हुए जनहित में ठोस नीति बना कर इस कूड़ा सयंत्र को आबादी से बाहर दूरदराज इलाके में बनाने की मांग की है!

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