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शिमला कूड़ा संयंत्र में दूसरी बड़ी आग, धुएं, बदबू के कारण नज़दीकी गावों में जीना हुआ दूभर

शिमला-भरयाल स्थित नगर निगम के कूड़ा संयंत्र में बुधवार सुबह फिर से आग लग गई। इससे संयंत्र के साथ लगते कई गांव धुएं में गुम हो गए। यह धुआं करीब पांच किलोमीटर के दायरे में पूरी तरह से फैल गया। कूड़े से निकलने वाले गंदे धुएं की बदबू के कारण लोगों का आसपास से निकलना भी दूभर हो गया।

Bharyal garbde Plant Tara Devi

संयंत्र के साथ लगते कई गांव के किसान अपने खेतों में काम तक नहीं कर पाए। गौर रहे कि संयंत्र के आसपास लगभग चार हजार की आबादी अपना जीवन बसर कर रही है। दिनभर लोगों का सांस लेना मुश्किल हो गया है।

हालांकि आग लगने के कारण का अभी तक पता नहीं चल पाया है। स्थानीय लोगों की माने तो यह अाग किसी ने जानबूझ कर लगाई है। बीते वर्ष जुलाई में भी इस संयंत्र में आग लगाई गई थी बुधबार रात लगी संयंत्र की सूचना फायर ब्रिगेड को सुबह करीब 7 बजे मिली।

bharyal Shimla

उसके बाद दिनभर आग बुझाने के लिए जद्दोजहद चलती रही। संयंत्र में लगी आग के बाद दमकल विभाग के तीन फायर टेंडर और कई दमकल कर्मचारी आग को बुझाने के लिए सुबह से जुटे हैं। इसके अलावा नगर निगम प्रशासन भी आग बुझाने के लिए दमकल विभाग को अपने दो टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति में सुबह से जुटा है।

Tara Devi Shimla

दमकल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आग काफी फैल चुकी है। कूड़े में लगी आग की वजह धुएं और बदबू के माहौल में दमकल विभाग के कर्मचारियों को दिक्कतों का सामना भी करना पड़ रहा है। संयंत्र में लगे कूड़े के ढेर में लगी आग की वजह से पुरे क्षेत्र धुआं फैला हुआ है। इसके अलावा इस आग की वजह से ही बदबू भी फैल रही है जिससे भी लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

भरयाल कूड़ा संयंत्र में आग की यह दूसरी घटना है। संयंत्र में इससे पहले भी आग लग चुकी है। जिसको लेकर निगम प्रशासन की ओर से कूड़ा संयंत्र के संचालक के ऊपर एफआईआर दर्ज करवाई गई थी। कूड़ा संयंत्र में लगने वाली इस आग की वजह से पर्यावरण के नुकसान के साथ निगम की संपत्ति को भी लाखों का नुकसान उठाना पड़ता है।

हमें सुबह सात बजे सूचना मिली है कि भरयाल कूड़ा संयंत्र में फिर से आग लगी गई है। आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। निगम की ओर से अज्ञात लोगों पर एफआईआर भी दर्ज करवाई गई है। सुबह से लेकर हमारे टैंकर अाग बुझाने के लिए पानी की सप्लाई कर रहे हैं।

सोनम नेगी, स्वास्थ्य अधिकारी नगर निगम शिमला

पिछले साल से बंद है संयंत्र

16 करोड़ रुपए की लागत से तैयार यह कूड़ा संयंत्र नगर निगम और ठेकेदार का सही तालमेल न होने की वजह से पिछले वर्ष से बंद चल रहा है। कूड़ा संयंत्र में लगे कूड़े के ढेरों में सैकडों टन कूड़ा पड़ा हुआ है।

हजारों से अधिक आबादी प्रभावित:बलराज

टुटू मजठाई पंचायत के पूर्व प्रधान बलराज सिंह ने कहा कि आग लगने से रामपुर व टुटू मजठाई पंचायत के तीन गांव की हजारों से अधिक आबादी पूरी तरह से प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों की पूरी तरह से अवहेलना की जा रही है। स्थानीय लोगों को अपनी जमीन में कार्य करना भी मुश्किल हो गया है।

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आईजीएमसी में चंद लोगों को फायदा पहुँचाने के लिए कैंटीन से लेकर सभी प्रकार के टेस्ट करने के कार्य निजी हाथों में: सीपीआईएम

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शिमला-प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी (IGMC) प्रशासन ने जिस तरीके से वहां पर चल रहे लंगर को अवैध घोषित किया है। उसका सीपीआईएम लोकल कमेटी शिमला ने अस्पताल के मुख्य गेट के बाहर कड़ा प्रदर्शन किया। कमेटी के सचिव बाबू राम ने बताया है कि जो लोग लंगर को अवैध बता रहे है वहीं लोग वहां पर लंगर बांटते देखे गए हैं। उन्होंने कहा है कि सबसे पहले आईजीएमसी प्रशासन की जांच होनी चाहिए जिसने इस लंगर को चलाने की अनुमति दी थी।

उन्होंने कहा है कि प्रशासन वहां पर लंगर को सुचारू रूप से चलाने की अनुमति दें ताकि वहां पर जरूरतमंद तीमारदारों को राहत मिल सके। यदि कोई भी सामाजिक संस्था आईजीएमसी में लंगर लगाना चाहती है तो उनको भी इजाजत दी जाए।

उन्होंने यह भी कहा है कि एक कल्याणकारी राज्य की जिमेदारी है कि सभी लोगों को मूलभूत सुभिधाए प्रदान की जाए। लेकिन आज सरकार सब कुछ निजी हाथों में सौंप रही है। आईजीएमसी के अंदर कैंटीनों से लेकर सभी प्रकार के टेस्ट करने के कार्य को निजी हाथों में दिया गया है।

इस प्रदर्शन में राज्य सचिव मंडल सदस्य कुलदीप सिंह तंवर , राज्य कमेटी सदस्य विजेंदर मेहरा, जिला कमेटी सदस्य सोनू वर्मा , सत्यवान पुंडीर, जगमोहन ठाकुर, बालक राम, महेश वर्मा, ज़िया नन्द, विवेक कश्यप, पंकज वर्मा, पोविंदर, रमन चंद्रकांत वर्मा, सोहन ठाकुर, सुरेश वर्मा, हिमी देवी , बालकृष्ण बाली आदि सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

सीपीआईएम ने मांग की है कि सभी प्रकार के टेस्ट मुफ्त किए जाए। आईजीएमसी में किसी भी निजी कंपनी को इजाजत न दी जाए। लंगर को सुचारू रूप से चलाया जाए। कैंटीनों का संचालन आईजीएमसी प्रशासन करे। उन्होंने यह भी कहा कि चंद व्यक्तियों के फायदे के लिए सब कुछ निजी हाथों में दिया जा रहा है।

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शिमला के ऐतिहासिक राज्य पुस्तकालय की जगह बुक कैफे खाेलने के प्रस्ताव का विरोध

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शिमला– शिमला नगर निगम हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान पर स्थित ऐतिहासिक राज्य पुस्तकालय को तोड़ कर वंहा कैफ़े बनाने का प्रस्ताव लेकर आया है। इस प्रस्ताव के अनुसार नगर निगम स्मार्ट सिटी मिशन के तहत इस भवन का जीर्णोद्वार करने जा रहा है। इस प्रोजेक्ट पर 2.25 करोड़ रुपये खर्च होने है जीर्णोद्वार के बाद इस भवन में पहले की तरह पुस्तकालय चलेगा। इसके टॉप फ्लोर पर पुस्तकालय होगा जबकि ग्राउंड फ्लोर में कैफे होगा।

इस प्रस्ताव पर छात्रों और कई लोगों ने रोष जताया है और आरोप लगाया है कि नगर निगम जीर्णोद्धार के नाम पर इसे कैफ़े में तब्दील करना चाहता है और पुस्तकालय को बंद करना चाहता है। इसके विराेध में मंगलवार काे रिज मैदान पर कई छात्रों ने इकट्ठा होकर इसका जमकर विराेध किया। इसके दौरान छात्र मेयर से मिलने भी गए। पर मेयर ऑफिस में नहीं मिली। छात्राें ने आराेप लगाया कि जीर्णाेद्धार के नाम पर नगर निगम छात्राें काे गुमराह कर रहा है। उन्हाेंने कहा कि छात्रों का हक छीना जा रहा है। उन्हाेंने कहा कि नगर निगम इस पुस्तकालय  में बुक कैफे खाेलना चाहता है।

धरने के दाैरान छात्र अजय राणा, सुनील ठाकुर, महेंद्र शर्मा, विवेक ने कहा कि शहर में काेई ऐसी जगह नहीं है, जहां पर छात्र सुकून से पढ़ाई कर सके। यह पुस्तकालय ही एक ऐसी जगह थी, जहां पर वह अपने एग्जाम की तैयारियाें के लिए आते थे। मगर अब इसे कैफे बनाने की तैयारी की जा रही है। उन्हाेंने कहा कि नगर निगम का यह निर्णय पूरी तरह से गलत है और इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

शिमला में विधानसभा के पास बनी लाइब्रेरी में भी जगह नही होती, उसके बाद वह यहां आते हैं। पर राज्य पुस्तकालय में भी जगह नही मिलती है। ऐसी सूरत में राज्य पुस्तकालय को कैफेटेरिया बनाना गलत है जिसे छात्र हरगिज बर्दास्त नही करेंगे।

वहीं वरिष्ठ नागरिक संजय कुमार वर्मा और वीरेंद्र वशिष्ठ ने कहा कि उन्हाेंने भी अपनी स्टूडेंट लाइफ इसी लाइब्रेरी में गुजारी है। अभी भी वह यहां पर आते रहते हैं। उन्हाेंने कहा कि लाइब्रेरी एक ऐतिहासिक जगह है और रिज काे चर्च और लाइब्रेरी से ही जाना जाता है। ऐसे में इसे बंद करना गलत निर्णय है।

सीपीआईएम (CPIM ) ने यह कहा

सीपीआईएम लोकल कमेटी ने कहा है कि शिमला सरकार व नगर निगम राज्य पुस्तकालय को रिपेयर के नाम पर लाइब्रेरी को बंद ना करे। अगर लाइब्रेरी को रिपेयर करना ही चाहते है तो उससे पहले सरकार व नगर निगम छात्रों के साथ लिखित में समझौता करे की पुस्तकालय को बंद नही किया जाएगा और इसका संचालन जो अभी शिक्षा विभाग कर रहा है भविष्य में भी शिक्षा विभाग ही करे ना की नगर निगम और अगर मरमत का कार्य करना है तो उसकी भी तय सीमा निर्धारित की जाए क्योंकि ये छात्रों के भविष्य का प्रश्न है। सरकार को तुरंत इस फैसले को वापिस लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे भी पुस्तकालय का अभाव है 30 हजार रजिस्टर छात्र है जो की बहुत बड़ी संख्या है इसलिए सरकार व नगर निगम को और पुस्तकालय भी खोलने चाहिए।

एसएफआई ने भी किया विराेध

शिमला में स्थित राज्य पुस्तकालय को कैफे में तब्दील करने के फैसले का एसएफआई ने भी कड़ा विराेध किया है। एसएफआई के राज्याध्यक्ष रमन थारटा और राज्य सचिव अमित ठाकुर ने कहा है कि मौजूदा सरकार का शिक्षा और उससे जुड़े संस्थानों से कोई सरोकार नही है। प्रदेश सरकार जहां एक ओर शिखर की ओर हिमाचल का नारा देकर राष्ट्रीय स्तर पर फर्जी आंकड़े पेश कर शिक्षा क्षेत्र में वाहवाही लूटने लगी है, वहीं दूसरी तरफ इस तरह के फैसले लेकर प्रदेश की शैक्षणिक छवि को धूमिल करने का कार्य कर रही है। यह प्रदेश की धरोहर ऐतिहासिक राज्य पुस्तकालय को आज एक ढाबे में तब्दील करने वाली सरकार की मंशा से साफ जाहिर होता है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में पहले ही पुस्तकालयों की संख्या कम है बजाए नए पुस्तकालय खोलने के सरकार पुराने पुस्तकालय को भी बंद कर जीर्णोद्धार के नाम से अपनी शिक्षा विरोधी नीतियों को आगे बढ़ाने का कार्य कर रही है। उन्हाेंने मांग उठाई कि सरकार अपने इस फैसले पर पुनर्विचार कर इस प्रस्ताव को शीघ्र वापिस लें, अन्यथा एसएफआई काे मजबूरन आंदाेलन करना पड़ेगा।

 

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सरबजीत सिंह बॉबी की संस्था पर आईजीएमसी प्रशासन ने लगाया बिजली,पानी चोरी और अराजकता फ़ैलाने का आरोप

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शिमला– शिमला के आईजीएमसी (IGMC) हॉस्पिटल में ऑलमाइटी ब्लेसिंग्स (Almighty Blesings) संस्था द्वारा चलाए जाने वाले लंगर को लेकर हुए विवाद ने तूल पकड़ ली है। जिस तरीके से पुलिस बल का प्रयोग कर लंगर बंद करवाया गया उसने लगभग सभी लोगों को हैरानी में डाल दिया है। आम लोगों के साथ-2 कांग्रेस भी इस का कड़ा विरोध कर रही है। सवाल उठ रहे हैं कि सात साल से जरूरतमंद लोगों की सेवा करके संस्था ने कौन सा अपराध कर दिया जो पुलिस बल का प्रयोग कर अस्पताल प्रशाशन ने लंगर बंद करवा दिया। प्रशासन पर आरोप लगया जा रहा है कि किसी अपने चहते को ये जगह मुहैया करवाने के लिए ये सब किया गया है।

पर आईजीएमसी के एम एस डॉक्टर जनक राज ने संस्था पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने संस्था द्वारा लंगर के आयोजन के लिए इस्तेमाल हो रहे अस्पताल के बिजली और पानी को चोरी करार दिया है और संस्था को आ रहे धन के स्त्रोतों पर भी सवाल खड़े किये हैं। उनका मानना है की ये सब कार्य भले इंसान की करनी नहीं लग रहे। उन्होंने ने ये भी आरोप लगाए कि संस्था सेवा के नाम पर अराजकता फैला रही है।

जनक ने मीडिया से सोमवार को आयोजित प्रेस वार्ता में कहा है कि यह मुद्दा वर्तमान समय का नहीं है। 2014 में सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए थे की ना कोई जगह दी जाए ना ही कोई अन्य गतिविधि की इजाज़त दी है केवल बनी बनायी चाय और खिचड़ी को बाँटने की इजाज़त दी गयी थी। वर्ष 2016 में इस संस्था ने चाय बिस्किट बाँटने का कार्य शुरू किया था। उसके बाद इन्होने कैंसर अस्पताल के अंदर खाना बनाने का कार्य शुरू किया। वहाँ पर एक आग की घटना हुई थी और उस वक्त संस्था के संस्थापक ने लंगर बंद करने की घोषणा की थी। उसके बाद 16 दिसम्बर 2016 को डेंटल कॉलेज के प्रिंसिपल ने पत्र के माध्यम से सूचित किया था कि यह जो निर्माण कार्य  हो रहा है यह गैर क़ानूनी है और इसका ढांचा कच्चा है यहां पर किसी भी तरह का नुकसान होता है तो उसके लिए संस्था स्वयं जिम्मेवार होगी।

उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2016 में सरकार ने अस्पताल प्रशासन को इस संस्था को पहले से बने खाने को बाँटने के लिए जगह देने पर सोच विचार करने के लिए कहा था। लेकिन ऐसा कोई भी निर्णय अस्पताल द्वारा नहीं लिया गया था। उन्होंने यह भी कहा की अस्पताल के पास बहुत सारी एनजीओ (NGO) के आवेदन आते रहते है की हमे भी दान पुण्य करने के लिए जगह दी जाये। उन्होंने यह भी कहा कि भावनाओं से व्यवस्था नहीं चलती है व्यावस्था को चलने के लिए कानून और नियमो के अनुरूप कार्य करना होता है। सेवा के नाम पर अराजकता को नहीं पनपने दिया जा सकता।

उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल में आने वाले मरीज और उनके साथ आये लोगो को मिल रही मदद के खिलाफ अस्पताल प्रशासन बिलकुल भी नहीं है। अस्पताल केवल नियमानुसार अपनी सम्पति को लेने के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने कहा कि अवैध कब्जा,पानी की चोरी, बिजली की चोरी, ये एक नेक नियत के इंसान के कार्य नहीं हो सकते। 22 जनवरी 2021 को इस संथा ने स्वयं घोषणा की थी कि 31 मार्च 2021 तक यह लंगर बंद कर देंगें।

उन्होंने यह भी कहा की यह संस्था जो भी कार्य कर रही है, संस्था या व्यक्ति विशेष अपनी आमदनी से नहीं कर रहे हैं। इसको लोगो के सहयोग के द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने कहा की लोगों के द्वारा दी गयी सहायता राशि का प्रयोग कहाँ हुआ और कैसे हुआ ये जानने का अधिकार उनको है। और किसी भी संस्था को प्राप्त होने वाली वित्तीय सहायता के बारें में जानकारी इंडियन सोसाटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के तहत देनी पड़ती है। एमएस ने कहा कि इतने बड़े सेवाकार्य को चलाने के लिए काफी धन की आवश्यकता होती है। पैसा कहाँ से आ रहा है,कौन पैसा दे रहा है। इस संस्था ने प्रतिदिन तीन हजार लोगों को खाना खिलाने का दावा किया है और निशुल्क एम्बुलेंस की भी सुविधा दी है। जब यह संस्था आईजीएमसी के नाम पर काम कर रही है तो अस्पताल प्रशासन को जानने का यह अधिकार है। 21 जुलाई 2021 को उच्च न्यायलय ने संज्ञान  लिया है कि प्रदेश भर के अवैध कब्जों पर हलफनामा दायर हो।

उन्होंने सरकार से मांग की है की इस सारे घटनाक्रम की उच्च स्तरीय मजिस्ट्रेट जाँच करवाई जाये। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास प्रतिदिन भिन्न-2 संस्थाओं से जगह को आवंटित करने के आवेदन आते रहते है कि अगर उनको जगह दी है तो हमें भी जगह दी जाये। एमएस  ने यह भी कहा कि अस्पताल प्रशासन से संस्था के संस्थापक खुली वार्तालाप करें। ये जाँच करने का अधिकार अस्पताल प्रशासन को है कि इतना सारा ताम झाम जो किया जा रहा है उसका फंडिग सोर्स क्या है। कहीं कोई असमाजिक तत्व इसमें सहयोग तो नहीं कर रहे, कहीं किसी गलत धारणा से कोई कार्य तो नहीं हो रहा। जनता के सामने सारा लेखा जोखा रखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल प्रशासन फ्री में मिल रहे लंगर के खिलाफ बिलकुल भी नहीं है।

क्या है युथ कांग्रेस का कहना

हिमाचल प्रदेश युथ कांग्रेस ने आज प्रेस वार्ता में प्रदेश सरकार को जिम्मेवार ठहराते हुए कहा है कि ऐसी क्या वजह रही होगी की आईजीएमसी प्रशासन ऑलमाइटी संस्था का सारा सामान उठाकर सड़कों पर बिखेर देती है। इन्होने सरकार पर आरोप लगाया की सरकार अपने लोगों को व्यवस्थित करने के लिए पूरी कोशिश कर रही है। हाल ही मे आईजीएमसी प्रशाशन ने एक मीटिंग आयोजित की और उस मीटिंग में यह प्रस्ताव पारित किया है कि इस लंगर को किसी और को दिया जायेगा। उन्होंने यह भी कहा कि बात यह नहीं है कि यह लंगर किसी और को दिया जायेगा, वह भी सेवा करेगा,यह भी सेवा कर रहे है। इस लिए प्रशाशन इस लंगर को जल्द से जल्द खाली करने की मुहीम कर रहा है।  उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि यह सरकार हर संस्थान को बर्बाद करने में तुली है और हर संस्थान का भगवाकरण किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा की युवा कांग्रेस सर्वजीत सिंह बॉबी का पूर्ण रूप से समर्थन करेगी।

क्या है कांग्रेस यंग ब्रिगेड का कहना

कांग्रेस यंग ब्रिगेड ने भी आईजीएमसी के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन किया और अस्पताल प्रशासन मुर्दाबाद, प्रदेश सरकार मुर्दाबाद के नारे लगाए। अध्यक्ष वीरेंद्र बांसटू ने कहा कि पिछले सात साल से गरीब जनता का पेट भर रहे सर्वजीत सिंह बॉबी के लंगर को अवैध बताना गलत है। उन्होंने कहा कि लंगर पर राजनीति नही होनी चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह व अन्य क्षेत्रों से जुड़े कई लोगों ने यहां पर लंगर सेवा दी है। लेकिन 7 साल बाद अब जाकर आईजीएमसी प्रशासन को होश आई है। उन्होंने कहा कि अगर लंगर को बहाल नही किया जाता है तो आगामी समय मे प्रदेश की जनता इसके खिलाफ आंदोलन करेगी। बता दें कि लंगर चलाने वाले सर्वजीत सिंह बॉबी मौजूदा समय में बीमार हैं और अस्पताल में भर्ती हैं।

क्या है लोगो का कहना

इसी बीच आम लोग भी संस्था के समर्थन में आये हैं। उन्होंने अपने बयान में कहा कि किस तरह उन्हें इस संस्था ने बुरे समय में मदद की थी।

ऐसे ही एक व्यक्ति ने कहा कि: “पिछले लोकडाउन में लोग अस्पताल में फंसे थे। मुझे पता है कि तब यहां कैसी स्थिति थी। उस समय खाने पीने की कोई सुविधा नहीं थी। पैसा होते हुई भी कहीं खाना नहीं मिल रहा था। तब सर्वजीत सिंह बॉबी ने ही उनकी मदद की थी और साथ ही साथ में मरीजों को भी खाना पैक करके दिया था। आज सरकार गरीबों के साथ अन्याय कर रही है। जो इन्होने बिजली पानी लिया वो वह घर तो नहीं ले गए लोगो की सेवा के लिए उपयोग किया है। सरदार ने इसको कोई होटल नहीं बनाया यह सब गरीब लोगों की सेवा के लिए कर रहे हैं।  

उन्होंने सरकार को इस विषय में गहराई से सोचने का निवेदन किया है।

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