आईजीएमसी में घटिया स्तर की डेंटल चेयर्ज की खरीद में करीब 20 लाख गोलमाल का अंदेशा

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IGMC Dental College

शिमला-डेंटल कालेज आईजीएमसी में डेंटल चेयर्ज खरीद में बड़ा गोलमाल सामने आया है। इन चेयर्ज की खरीद में करीब 20 लाख तक के गड़बड़ी का अंदेशा जताया जा रहा है। चेयर्ज खरीद में इस गड़बड़ी का पता उस समय चला जब यह दो जगह इंस्टाल हो चुकी थी।

जब चेयर्ज तीसरी जगह इंस्टाल होने लगी तो इस बात का खुलासा हुआ कि ये वो चेयर्ज नहीं,जिसकी मंजूरी आरकेएस की बैठक में ली गई थी। बल्कि जो चेयर्ज मंजूर हुई थी, उसके मुकाबले यह चेयर्ज काफी निम्न स्तर की थी। इतना ही नही, जो चेयर्ज कालेज पहुंची, वह मंजूर हुई चेयर्ज के मुकाबले 20 हजार तक सस्ती थी।

पहली खेप में ऐसी 10 डेंटल चेयर्ज पहुंच चुकी थी। ऐसे में हर चेयर्ज पर सप्लायर 20 हजार बचाने के चक्कर में था यानी 10 चेयर्ज पर 20 लाख की बचत या गड़बड़ी। इस गोलमाल को अस्पताल प्रशासन काफी हल्के में ले रहा है। तर्क दिया जा रहा है कि गलती से ऑर्डर की गई चेयर्ज की जगह दूसरी चेयर्ज आ गई।

इस बात का पता चलते ही चेयर्ज वापस कर दी गई, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि ऑर्डर की गई चेयर्ज की जगह घटिया स्तर की चेयर्ज सप्लाई करने वालों के खिलाफ अस्पताल क्यों कार्रवाई से गुरेज कर रहा है।

आरकेएस बैठक में दो स्तर की चेयर्ज पर बनी थी सहमति  पिछले वर्ष 18 सितंबर को आरकेएस की बैठक हुई थी। इसमें 40 डेंटल चेयर्ज को खरीदने का प्रस्ताव पास हुआ था। इनमें एक मॉडल की कीमत दो  लाख 40 हजार थी, जबकि दूसरी एक लाख 70 हजार के आसपास थी। दोनों ही किस्म की चेयर्ज डेंटल कालेज की जरूरतों के हिसाब से सही था।

आरकेएस का यह प्रस्ताव सरकार के पास गया और वहां से 2 लाख 40 हजार वाले मॉडल पर मंजूरी मिली। इसके बाद 10 चेयर्ज की और मंजूरी ली गई। गनीमत है कि पहली 10 चेयर्ज में ही इस बात का खुलासा हो गया कि चेयर्ज वो नहीं जो मंगवाई गई बल्कि उससे घटिया स्तर की है। अगर 50 की 50 चेयर्ज आ जाती तो यह गोलमाल कहीं और ज्यादा होता।
Photo :Representational Image

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