हिमाचल के किसी भी जिले में ना दोहरी फिल्टर प्रणाली, ना पेयजल शुद्धीकरण के पुख्ता इंतजाम

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Ashwani Khud

शिमला- पीलिया का संकट अभी तक बना हुआ है। प्रदेश के लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए सरकार के पास पुख्ता बुनियादी ढांचा नहीं है। हर पेयजल योजना में ‘सिंगल फिल्टर बैड’ की सुविधा है। अधिकांश पेयजल योजनाओं में ‘स्टैंडबाई फिल्टर बैड’ की सुविधा नहीं है।

एक फिल्टर से गुजरने के बाद पानी सीधे टैंकों को पंप किया जाता है। जलस्रोतों से आने वाले पानी को दोहरी फिल्टर प्रणाली से शुद्ध करने की व्यवस्था नहीं है। सिंगल फिल्टर बैड दो साल से अधिक समय तक इस्तेमाल होते हैं। ऐसे में केवल एक ही बार फिल्टर होने के बाद पानी टैंकों में चला जाता है और हर सुबह लोगों के घरों में वितरित होता है। राजधानी शिमला के चारों ओर मौजूद कैचमेंट एरिया में शुद्ध पेयजल उपलब्ध होने पर सवाल खड़ा हो गया है।

पीलिया फैलने के बाद शिमला शहर की दो लाख की आबादी को पीने के लिए पानी चाहिए। उपनगरों के नालों में सीवरेज की गंदगी बहती है। पुराने जलस्रोतों में पर्याप्त पानी नहीं रह गया है। प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में सीवरेज की पुख्ता व्यवस्था नहीं है। लोगों के घरों में बने सीवरेज टैंक नियमानुसार नहीं बनाए गए हैं और इनसे रिसाव होता है जो पेयजल स्रोतों में मिलता है। मंडी शहर की गंदगी हो या फिर कुल्लू जिला मुख्यालय में व्यास नदी के किनारे बने होटल, सभी जिलों में पानी का शुद्धीकरण करने के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं हैं।

पांच साल तक नहीं बदलते फिल्टर

हालत यह है कि सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग पेयजल योजनाओं के फिल्टर बैड को पांच साल तक नहीं बदलता है। ये फिल्टर बैड दो साल के भीतर बदल दिए जाने चाहिएं। बहते पानी को शुद्ध करने के लिए फिल्टर प्रणाली से पानी की गंदगी साफ होती है। सूत्रों का कहना है कि फिल्टर को कामचलाऊ बनाने के लिए ऊपर की परत को हटा देते हैं।

बल्ह घाटी के कुएं खतरे में

बल्ह घाटी के घरेलू कुओं पर खतरा मंडराने लगा है। सीवरेज लाइन नहीं होने के कारण प्रत्येक घर में सीवरेज टैंक बने हैं। टैंक सही तरीके से नहीं बने होने के कारण इनसे गंदगी का रिसाव होकर गंदा पानी कुओं के पानी को दूषित कर रहा है। इस क्षेत्र में भूमिगत पानी की शुद्धता खतरे में है।

एनजीटी के सख्त आदेश

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कुल्लू शहर के होटलों के मामले में सीवरेज की गंदगी व्यास नदी में बहने का खुलासा किया था। ऐसे होटलों को बंद करने के एनजीटी ने सख्त आदेश पारित किए थे। होटलों की सीवरेज का पानी नदी में मिलता है। ऐसा ही हाल मंडी शहर में देखने को मिलता है।

Photo: Representational Image

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