शिमला आइजीएमसी में टेंपो चालक की लटकी हुई एचटी लाइन के संपर्क में आने से मौत

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शिमला- इंदिरा गाधी मेडिकल कॉलेज (आइजीएमसी) शिमला में मंगलवार सुबह करंट लगने से एक चालक की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे में घायल परिचालक आइजीएमसी में उपचाराधीन है। पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।

मंगलवार सुबह करीब साढ़े सात बजे एक आयशर टेंपो को आइजीएमसी के न्यू ऑडिटोरियम के ग्राउंड फ्लोर में पार्क किया जा रहा था। अचानक डंगे के ऊपर से गुजर रही बिजली की एचटी लाइन से टेपों टकरा गया। हालांकि परिचालक टेंपो रोकने के लिए कहता रहा। इसके बावजूद चालक ने टेंपो को नहीं रोका। परिचालक ने टेंपो से छलांग लगा दी। इस वजह से वह बच गया जबकि चालक टेंपो से एकदम उतरा मगर उसे करंट लग गया जिससे जलने पर उसकी मौत हो गई। करीब दस मिनट तक मौके पर आग लगी रही।

हादसे को देखकर मौके पर मौजूद लोग सहम गए व पुलिस को सूचित किया। मौके पर पहुंची पुलिस ने तुरंत एचटी लाइन की विद्युत आपूर्ति बंद करवाई। कुछ मिनटों बाद दोबारा विद्युत लाइन चला दी गई। चालक को आइजीएमसी ले जाया गया जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतक की पहचान हाकिम सिंह (33) पुत्र दीन दयाल निवासी मकान नंबर 149 गांव चारेयापुर जिला औरया, उत्तर प्रदेश के तौर पर हुई है। परिचालक आनंद कुमार पुत्र शंकर लाल उत्तर प्रदेश का निवासी है। एएसपी गौरव सिंह ने बताया कि चालक के परिजनों को सूचना दे दी है। शव का पोस्टमार्टम करवा दिया है।

डेढ़ घटा बाद पहुंचे विद्युत विभाग के कर्मचारी
विद्युत विभाग की लापरवाही को चालक की मौत का कारण माना जा रहा है। लंबे समय से बिजली की तारें लटकी हुई थीं मगर विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा था। मंगलवार को घटनास्थल पर विद्युत विभाग के कर्मचारी व अधिकारी डेढ़ घटा बाद पहुंचे।

एमआरआई का सामान लेकर आया था टेंपो

टेंपो (डीएल 1 एलआर 4994) एमआरआई का सामान लेकर आइजीएमसी में सोमवार शाम को पहुंचा था। टेंपो पहले आइजीएमसी के मुख्य गेट पर रातभर खड़ा था। मंगलवार सुबह टेंपो को हटाकर आइजीएमसी के नए भवन के ग्राउंड फ्लोर में पार्क किया जा रहा था।

सुधरने का नाम नहीं ले रहा बिजली बोर्ड

प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी शिमला में करंट लगने से एक व्यक्ति जिंदा जल गया और लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई को लेकर हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड आनाकानी कर रहा है। पूरा ठीकरा आइजीएमसी प्रशासन पर फोड़ा जा रहा है कि संबधित प्रशासन ने कभी भी बोर्ड को लिखित तौर पर 11 केवी की जिंदा तारों को हटाने के बारे में नहीं चेताया और न ही कोई आग्रह किया।

मेडिकल कॉलेज परिसर में हुई ऐसी घटना को लेकर चर्चा गर्म रही कि ऐसा हादसा यहां अन्य वाहनों के साथ भी हो सकता था और करंट फैलने से सैकड़ों जाने चपेट में आ सकती थी। आईजीएमसी में बोर्ड के कर्मचारियों पर सुस्ती बरतने आरोप है कि खंभे की कम लंबाई को लेकर सजगता नहीं बरती गई। सालों से घाटी तक यह लाइव वायर जा रही है और भी बस्तियां इस तरह के हादसे से चपेट में आ सकती है। अपने कर्मचारियों की सुस्त कार्यशैली पर पर्दा इस कदर बोर्ड प्रबंधन के पदाधिकारी डालने पर उतारू है कि उनकी कोई गलती नहीं हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने यहां नया डंगा लगाया और पहले मलबा रखा था जहां हादसा हुआ है, अब वह हटाया गया इसलिए तो स्वराज माजदा यहां पार्क किया जा रहा था। डंगे की उंचाई से पास में खंबे की ऊंचाई कम हुई। इससे हादसा हुआ।

पूरी जांच होगी

यहां घाटी से11 केवी की लाइने सालों से गुजर रही है। पहले कभी ऐसा नहीं हुआ। पूरा ब्यौरा अधिकारियों से लिया है और बुधवार को भी तथ्यों को वेरीफाई शिमला आकर करूंगा।
सुजान सिंह पठानिया, ऊर्जा मंत्री

हिमाचल प्रदेश में ऐसे हादसे न हों, इसके लिए इंजीनियरों को निर्देश दिए हैं कि वे स्टडी करें कि कहां कहां तारों से खतरा है और उसे तत्काल ठीक करें।
तरुण श्रीधर अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा,राजस्व ,कार्मिक विभाग

जांचकमेटी का गठन
पूरे मामले पर अधिशाषी अभियंता एसके शर्मा की अध्यक्षता में मामले पर जांच कमेटी का गठन कर दिया है और शीघ्र रिपोर्ट देने को कहा है। अधिशाषी अभियंता ने कहा कि हालांकि हमारे कर्मचारियों की गलती नहीं हैं। न ही कभी आइजीएमसी ने हमें लिखकर दिया है कि यहां ऐसी लाईनों को बदलें। अब हम इसे ऊंचा करेंगे और खंभे की ऊंचाई भी बढ़ाएंगे।

मैं दिल्ली में हूं। कुछ नहीं बता सकता हूं। हां नियमों के अनुसार कार्रवाई करेंगे।
ऑपरेशन डायरेक्टर, बिजली बोर्ड

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