शिमला निगम महापौर ने 30% सीवरेज सेस के साथ पानी के बिल जारी करने पर लगायी रोक

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Shimla MC Sewerage Cess

शिमला- शहर की जनता को 30 फीसद सीवरेज सेस के साथ पानी का बिल जारी नहीं किया गया है। नगर निगम के महापौर संजय चौहान ने बिल जारी करने पर रोक लगा दी है। इस मामले को इस माह होने वाले मासिक बैठक में सदन में रखा जाएगा। सदन की मंजूरी के बाद ही फैसला लिया जाएगा। असल में सरकार ने सेस 50 से कम कर 30 फीसद कर दिया है लेकिन नगर निगम ने इसे स्वीकार नहीं किया है।

निगम ने 15 फीसद करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा है मगर सरकार ने 30 फीसद सेस को मंजूरी दी है। ऐसे में अब दोबारा मासिक सदन में इस मामले पर हंगामा हो सकता है। 2005 की अधिसूचना के अनुसार शहर में 50 फीसद सीवरेज सेस देना अनिवार्य था। नगर निगम 15 फीसद सीवरेज सेस अदा करने का फैसला सदन में कर चुका है। मुख्यमंत्री ने आदेश दिए हैं कि सेस 50 फीसद से कम किया जाए। सारा मामला अधिकारियों के हाथ में गया तो 30 फीसद करने का फैसला लिया गया। बैठक में नगर निगम के आयुक्त पंकज राय भी विशेष तौर से मौजूद रहे। उन्होंने 15 फीसद सेस करने की बात कमेटी के समक्ष रखी पर अधिकारियों ने निगम के तर्क को स्वीकार ही नहीं किया। साथ ही तर्क दिया कि नगर निगम सदन में 15 फीसद का फैसला लिया है। शहर में सीवरेज सेस की अधिसूचना पिछले 10 वष से इस अधिसूचना को नगर निगम शिमला लागू नहीं कर रहा था। नगर निगम का पंकज राय ने कार्यभार संभालते ही अधिसूचना को लागू करने का फैसला लिया मगर महापौर व उपमहापौर समेत सभी पार्षदों ने इसका विरोध किया।

सेस पर हो रही राजनीति

सीवरेज सेस को लेकर राजनीति भी काफी सक्रिय हो गई है। कांग्रेस समर्थित पार्षद सीवरेज सेस कम करवाकर वाहवाही लूटना चाहते हैं। मुख्यमंत्री ने सेस कम करने के आदेश पहले ही दिए थे तो उसके बाद कांग्रेस समर्थित पार्षद अगले दिन मुख्यमंत्री से मिले। इस दौरान मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया। सीवरेज सेस का एक ऐसा मामला है जो कि शहर की 90 फीसद आबादी को प्रभावित कर रहा है। अगर सेस कम हो गया तो विपक्ष के पाले से अहम मुद्दा छिटक जाएगा।

‘हमने 15 फीसद सीवरेज सेस करने की मांग रखी है। इससे अधिक हमें स्वीकार नहीं होगा। सदन का फैसला सर्वोपरी है।’
-टिकेंद्र पंवर, उपमहापौर नगर निगम शिमला

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