शिमला में खुले में बह रही सीवरेज दे रही संक्रमण को न्योता,शिकायत के बावजूद भी प्रशासन नही ले रहा सुध

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शिमला- कुदरत ने राजधानी शिमला को यूं तो दिल खोलकर सब कुछ दिया है लेकिन सरकारी तंत्र कुदरत के इस तोहफे का संरक्षण करने में विफल रहा है। दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर भले ही यहां की वादियां अपनी पहचान बनाए हुए हैं, लेकिन अब यहां की तस्वीर बदल गई है। पहले जहां यह शिमला स्वच्छ आबोहवा के लिए जाना जाता रहा है, वहीं अब यहां-वहां बिखरा कचरा, मल व बेतरतीब मल निकासी प्रणाली इसकी खूबसूरती पर दाग लगा रहे हैं।

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यहां तक कि यहां के जनमानस व दुनिया भर से घूमने आने वाले सैलानियों की सेहत से भी खिलवाड़ हो रहा है। इसका जीता जागता उदाहरण शिमला में सर्दियों के दिनों में भी पीलिया के मरीज बढ़ रहे हैं। सीवरेज लाइन का उचित रख रखाव व देखरेख न होने से सीवरेज का गंदा पानी खुले में बहकर पेयजल स्त्रोतों में मिल रहा है। इससे पेयजल अशुद्ध हो रहा है और बीमारियों को निमंत्रण दे रहा है।

राजधानी शिमला में जगह जगह खुले में सीवरेज बह रही है, लेकिन प्रशासन को इसकी कोई खबर नहीं है या फिर जानबूझ कर इसे अनदेखा किया जा रहा है। शिमला में प्रवेश करते ही खुले में वह रही सीवरेज से लोगों का स्वागत हो रहा है। शिमला के 103 के पास एक नामी होटल की सीवरेज सड़कों में बह रही है। इससे यहां से गुजरने में भी लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

दूसरे यह सीवरेज साथ लगते ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल स्रोतों में भी मिल रही है। इससे बीमारियां फैलने की भी आशंका बढ़ गई है। लेकिन इस होटल प्रबंधन की ऊंची पहुंच के चलते प्रशासन भी इस पर कोई कार्रवाई करने से कतरा रहा है। इसका खमियाजा शहर वासियों और साथ लगते ग्रामीणों को अपनी जान से हाथ धोकर भुगतना पड़ रहा है। पीलियां दिनों दिन शहर में पांव पसार रहा है, लोगों की जान जा रही है, लेकिन प्रशासन सारे मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं। यह स्थिति समूचे शहर में है जहां पर सीवरेज खुले में बह रही है।

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आइजीएमसी, लक्कड़ बाजार में भी गंदा पानी सड़कों में बह रहा है। आइजीएमसी का सारा पानी साथ लगते ग्रामीण क्षेत्र बरमू के नाले में मिल रहा है। इससे यहां के पेयजल स्त्रोत दूषित हो रहे हैं।

पैदल चलना भी हुआ मुश्किल

आइजीएमसी से लक्कड़ बाजार पैदल आने वाले लोगों को यहां से पैदल चलना मुश्किल हो रहा है। सड़क पर बह रहे गंदे पानी के छीटें गड़ियों की आवाजाही से लोगों तक आ रहे हैं। इससे यहां पर पैदल चलना भी मुश्किल हो रहा है। दूसरे सीवरेज की दुर्गध से यहां से गुजरना मुश्किल हो रहा है।

अंग्रेजों के जमाने की है शिमला में सीवरेज लाइन

शिमला शहर में बिछी अधिकांश सीवरेज लाइन ब्रिटिशकाल की है। ऐसी पाइपें जो जंग खा चुकी है और जगह-जगह से लीकेज हो रही है। हालांकि इसके रख रखाव को लेकर नगर निगम फिसड्डी निकला है। केंद्र से भी कई बार वाटर सीवरेज की योजनाएं आने के बावजूद नगर निगम शिमला शहर में सीवरेज कनेक्टिविटी का जाल नहीं बुन पाया है। नतीजतन जल जनित रोग शहर के लोगों को घेर रहे हैं।

यहां यहां बहती है सीवरेज

आइजीएमसी, लक्कड़ बाजार, विक्ट्री टनल, 103, संजौली चौक, उपनगर टुटू, सहित कई उपनगरों में भी लोगों को गंदगी के आलम से गुजरना पड़ रहा है। हर तीसरे दिन सीवरेज लाइन टूटी रहती है। लोगों की शिकायत करने के बावजूद भी प्रशासन इस पर कोई कार्रवाई अमल में नहीं ला रहा है और न ही इस समस्या का कोई स्थाई हल निकाल पा रहा है।

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