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राज्य सरकार के पास वैक्सीन की कमी तो निजी अस्पतालों के पास कहाँ से आ रही सप्लाई?

discrimination in vaccination

शिमला- सरकार द्वारा 18 से 44 वर्ष के लिये लागू की गयी वैक्सीनेशन की नीति निंदा का विषय बन गयी है और इसे पूर्णतः भेदभावपूर्ण व असंवैधानिक करार दिया जा रहा हैI हाल ही में सरकार द्वारा युवा वर्ग के लिए जो ऑनलाइन बुकिंग के आधार पर थोड़ी बहुत वैक्सीनशन की जा रही थी वह भी सरकार के अनुसार अब वैक्सीन उपलब्ध न होने के कारण बन्द कर दी गई है। वैक्सीनेशन के लिए रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य करना ही अपने आप में एक बहुत बड़ी समस्या है, खासकर प्रदेश के दूर दराज़ इलाको में रहने वाले लोगों के लिए जो इंटरनेट की सेवा से वंचित हैंI

सुप्रीम कोर्ट ने अभी सरकार कि इस निति से असंतुष्टि जताई है।

याद रहे कि अभी सरकार 50:25:25 के अनुपात में वैक्सीन कि सप्लाई कर रही हैI इसका मतलब है कि कुल उत्पादन का 50 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार के पास रहेगा जबकि 25 – 25 प्रतिशत राज्यों और निजी हॉस्पिटलों को मुहया करवाया जायेगा

शिमला के पूर्व मेयर एवं कम्युनिस्ट पार्टी के नेता, संजय चौहान, ने सरकार द्वारा देश व प्रदेश में लागू की जा रही वैक्सीनशन नीति को लचर व भेदभावपूर्ण बताते हुए कड़ी भर्त्सना की है और सरकार से मांग की है कि इस कोविड-19 महामारी में समय पर रोकथाम हेतु 18 वर्ष की आयु से ऊपर सभी का समयबद्ध तरीके से नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र पर मुफ़्त वैक्सीनशन कर अपने संवैधानिक दायित्व का निर्वहन करे।

चौहान ने कहा कि देश व प्रदेश में महंगी दरों पर निजी अस्पतालों व अन्य संस्थानों को युवा वर्ग की वैक्सीनशन की इजाज़त देकर आरम्भ किया गया है। यह बिल्कुल भेदभावपूर्ण व असंवैधानिक है क्योंकि भारत के संविधान की धारा 21 सभी को जीवन व धारा 14 सभी को बराबरी का अधिकार प्रदान किया गया है। इसलिए देश मे सभी युवा, वृद्ध, बच्चों, गरीब, अमीर व हर वर्ग के लोगों के जीवन की रक्षा करना सरकार का संवैधानिक दायित्व है। चौहान ने कहा कि सरकार की वैक्सीनशन को लेकर लागू नीति व कार्यप्रणाली यहां भी संदेह में आती है क्योंकि प्रदेश सरकार के अनुसार उनको वैक्सीन नहीं मिल रही है इसलिए 18 से 44 आयु वर्ग की वैक्सीनशन नहीं की जा रही है

चौहान ने पुछा है कि इन निजी अस्पतालों व संस्थानों के पास वैक्सीन कहाँ से आ रही है। चौहान ने आरोप लगया है कि सरकार का यह निर्णय स्पष्ट रूप से इन निजी अस्पतालों व संस्थानों को लाभ पहुंचाने का है और इससे कोविड-19 से पैदा हुए संकट से जूझ रहे गरीब व दूरदराज के लोग वैक्सीन से वंचित रह रहे है।

केन्द्र सरकार का कहना है कि देश में वैक्सीन की कमी नहीं होने दी जाएगी जबकि दूसरी ओर आज अधिकांश राज्य सरकारें वैक्सीन की कमी बता रही है और कह रही है कि वो जितनी वैक्सीन की मांग कर रही है उन्हें केन्द्र सरकार उतनी वैक्सीन उपलब्ध नहीं करवा रही है। जिससे सरकार को आज 18 से 44 आयु वर्ग को वैक्सीन लगाना सम्भव नहीं हो रहा है।

चौहान ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा राज्यों को समय और मांग अनुसार वैक्सीन उपलब्ध न करवाना भी हमारे देश के संवैधानिक संघीय ढांचे पर चोट है। इसलिए सरकार की वक्सीनेशन नीति मनमानी व तर्कहीन है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी सुनवाई के दौरान अपने एक आदेश में केन्द्र सरकार को लताड़ लगाई है। चौहान ने मांग की है कि इसमे सरकार तुरन्त बदलाव करे और वक्सीनेशन को मुफ़्त सार्वभौमिक कर सभी को सरकार उपलब्ध करवाए।

चौहान ने कहा कि कोविड-19 महामारी से देश व प्रदेश में लाखों लोग प्रभावित है और कई मौते हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मौतों के लिए जिम्मेदार मुख्यतः सरकार की कोविड-19 से निपटने के लिए की गई लचर नीति व आधी अधूरी तैयारी रही है।

उनका कहना है कि सरकार द्वारा उचित रूप में टेस्टिंग न करना व देश में ऑक्सिजन व अन्य मूलभूत स्वास्थ्य सेवाओं की कमी तथा देश मे समय रहते वक्सीनेशन न करने के कारण अधिकांश मौते हुई है। आज दुनिया में इस कोविड-19 महामारी पर काबू पाने हेतु वैक्सीनशन ही एकमात्र चारा है।

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सुप्रीम कोर्ट के लताड़ के बाद केंद्र सरकार की टीकाकरण नीति में बदलाव, 18-44 साल तक के लोगों को फ्री मिलेगी वैक्सीन

new vaccine policy

नई दिल्ली –केंद्र सरकार ने यह घोषणा की है कि राज्यों के जिम्मे जो 25 प्रतिशत टीकाकरण था, उसे अब केंद्र सरकार द्वारा करवाया जायेगा। इस निर्णय को दो सप्ताह में अमल में ला दिया जाएगा।

केंद्र सरकार ने ये भी घोषणा की है कि आगामी 21 जून से 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों को मुफ्त टीका प्रदान किया जायेगा।  यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट द्वारा सरकार की निति को लेकर पड़ी फटकार के बाद आया है , और इसके लिए सर्वोच्चा निरयला की प्रशंशा भी की जा रही है।

बीते हफ़्ते सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र द्वारा इसी आयु वर्ग के टीकों के लिए राज्यों व निजी अस्पतालों को लोगों से शुल्क वसूलने की अनुमति देने को लेकर सवाल उठाए थे। न्यायालय ने कहा था कि राज्यों और निजी अस्पतालों को 18-44 साल के लोगों से टीके के लिए शुल्क वसूलने की अनुमति देना पहली नजर में ‘मनमाना और अतार्किक’है। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने उदारीकृत टीकाकरण नीति और केंद्र, राज्यों और निजी अस्पतालों के लिए अलग-अलग कीमतों को लेकर केंद्र सरकार से कुछ तल्ख सवाल पूछे थे। शीर्ष अदालत देश में कोविड-19 के प्रबंधन पर स्वत: संज्ञान लिए गए एक मामले पर सुनवाई कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि माजूदा पालिसी के कारण नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का हनन हो तो अदालतें मूकदर्शक बनी हुई नहीं रह सकत।

केंद्र सरकार ने बताया कि 75% टीकाकरण मुफ्त होगा और केंद्र के तहत, 25% का भुगतान केंद्र करेगा। ये टीका निजी अस्पतालों में लगाया जाएगा।राज्य सरकारें इस बात की निगरानी करेंगी कि निजी अस्पतालों द्वारा टीकों की निर्धारित कीमत पर केवल 150 रुपये का सर्विस चार्ज लिया जाए।

केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को दीपावली तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। नवंबर महीने तक, 80 करोड़ लोगों को हर महीने निर्धारित मात्रा में मुफ्त अनाज मिलता रहेगा।

केंद्र सरकार ने कहा कि यह भी कहा कि 2014 में देश में टीकाकरण की कवरेज 60 फीसदी थी, लेकिन पिछले पांच-छह वर्षों में इसे बढ़ाकर 90 प्रतिशत कर दिया गया है।

लेकिन प्रधानमंत्री ने फ़ज़ीहत से बचने के प्रयास में अपनी पहले कि पालिसी के लिए राज्य सरकारों को कसूरवार ठहरा दिय।

“ज्योंहि कोरोना के मामले घटने लगे, राज्यों के लिए विकल्प की कमी को लेकर सवाल उठने लगे और कुछ लोगों ने सवाल किया कि केन्द्र सरकार सब कुछ क्यों तय कर रही है। लॉकडाउन में लचीलापन और सभी पर एक ही तरह की बात लागू नहीं होती के तर्क को आगे बढ़ाया गया। 16 जनवरी से अप्रैल के अंत तक भारत का टीकाकरण कार्यक्रम ज्यादातर केन्द्र सरकार के अधीन चलाया गया। सभी के लिए नि:शुल्क टीकाकरण का काम आगे बढ़ रहा था और लोग अपनी बारी आने पर टीकाकरण कराने में अनुशासन दिखा रहे थे। इन सबके बीच टीकाकरण के विकेंद्रीकरण की मांग उठाई गई और कुछ आयु वर्ग के लोगों को प्राथमिकता देने के निर्णय की बात उठाई गई। कई तरह के दबाव डाले गए और मीडिया के कुछ हिस्से ने इसे अभियान के रूप में चलाया,” प्रधान मंत्री ने अपने बचाव में तर्क दिय।

 

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भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री नरेंद्र बरागटा का निधन, पार्टी के नेताओं नें दी श्रद्धांजलि

narinder bragta

शिमला- शिमला जिले के जुब्बल-कोटखाई विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं पूर्व मंत्री नरेंद्र बरागटा का आज सुबह निधन हो गया। नरेंद्र बरागटा के बेटे चेतन ने ट्वीट कर ये जानकारी दी। बरागटा पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती थे। बरागटा प्रदेश सरकार में मुख्य सचेतक भी थे।

बरागटा कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद पोस्ट कोविड अफेक्ट से जूझ रहे थे। वो 20-25 दिनों से पीजीआई में भर्ती थे। उनकी दूसरी बीमारी डायग्नोज नहीं हो पा रही थी और उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही थी।  निधन के बाद उनका शव चंडीगढ़ स्थित हिमाचल भवन लाया गया। उनका अंतिम संस्कार रविवार को पैतृक गांव तहटोली में होगा। आज उनकी पार्थिव देह कोटखाई में अंतिम दर्शन के लिए रखी जाएगी।

नरेंद्र बरागटा का जन्म 15 सितंबर 1952 को घर गांव टहटोली तहसील कोटखाई जिला शिमला में हुआ था। उनके दो पुत्र चेतन बरागटा व ध्रुव बरागटा हैं।

बरागटा 1969 में डीएवी स्कूल शिमला में छात्र संसद के महासचिव बने  तथा 1971 में एसडीबी कॉलेज शिमला के केंद्रीय छात्र संघ के उपाध्यक्ष चुने गए।

नरेंद्र बरागटा 1978 से लेकर 1982 तक भारतीय जनता युवा मोर्चा के अध्यक्ष रहे । 1983 से लेकर 1988 तक जिला शिमला भारतीय जनता पार्टी के महामंत्री रहे।

1993 से लेकर 1998 तक भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रहे।

नरेन्द्र बरागटा वर्ष 1998 में शिमला विधानसभा क्षेत्र से हिमाचल प्रदेश विधानसभा के लिए चुने गए और प्रदेश में भाजपा नेतृत्व की सरकार में बागवानी राज्य मंत्री बने।वर्ष 2007 में वह पुनः जुब्बल-कोटखाई विधानसभा क्षेत्र से विधानसभा के लिए चुने गए और भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाए गए।

नरेन्द्र बरागटा वर्ष 2017 में फिर विधानसभा के लिए चुने गए और मुख्य सचेतक बनाए गए। वर्तमान में वह जुब्बल-कोटखाई विधानसभा क्षेत्र से विधायक व सरकार में मुख्य सचेतक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे ।

मुखयमंत्री जयराम ठाकुर,जगत प्रकाश नड्डा,सुरेश कश्यप,अनुराग ठाकुर ने नरेंद्र बरागटा को श्रद्धांजलि दी।और दुःख व्यक्त किया।

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सरकारी स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया के दौरान अध्यापकों ने परिजन और बच्चों को कोरोना संक्रमण व बचाव से करवाया अवगत

Sundernagar girls school

मंडी-बस सेवायें बंद होने के बावजूद हिमाचल प्रदेश सरकार ने पिछले सप्ताह ऑफलाइन प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी।  इसी कारण परिजनों और बच्चों और अध्यापकों को स्कूलों तक पहुँचने में दिक्कत का सामना करना पड़। स्कूलों में छात्रों और उनके परिजनों के बीच उचित दूरी बनाये रखना और उनके हाथ बार-बार सैनिटाइज करवाना भी स्कूलों के आगे एक चुनौती थी।

इस प्रवेश प्रक्रिया के दौरान राजकीय आदर्श कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला सुंदर नगर में भी 12 मई 2020 से 16 मई 2020 तक ऑफलाइन प्रवेश का दौर रहा। इस दौरान प्रधानाचार्य मनोज वालिया व समस्त स्टाफ ने बच्चों तथा अभिभावक गण को कोरोना वायरस के संक्रमण व उससे बचाव के बारे में अवगत करवाया।

Sundernagar girls school 2

प्रधानाचार्य मनोज वालिया ने जानकारी देते हुए कहा कि पाठशाला की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई की कार्यक्रम अधिकारी ललिता बंगिया व राजकुमारी तथा स्वयंसेवी छात्राओं ने नए सत्र की कक्षा में प्रवेश हेतु आई छात्राओं व उनके अभिभावकों को सामाजिक दूरी को बनाए रखने की व्यवस्था की गई तथा प्रवेश हेतु आई हुई छात्राओं व अभिभावकों के हाथ समय-समय पर सैनिटाइज करवाए गए।

Sundernagar girls school 3

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