कार की चपेट में आया था छठी का स्टूडेंट,सदमे के बावजूद पिता ने दान किए बेटे के अंग

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शिमला- 13 साल का पारस भले ही दुनिया से चला गया, लेकिन उसके शरीर के अंग किसी दूसरे के जीवन में रंग भरेंगे। आंखें किसी जरूरतमंद की जिंदगी में हमेशा के लिए उजाला लाएंगी तो दिल किसी के सीने में धड़कनें देगा। पारस के पिता कुलदीप ने दुख की घड़ी में हिम्मत दिखाते हुए अपने लाडले की आंखें, लीवर, किडनी, दिल आदि अस्पताल को दान किए हैं। कुलदीप ने अंगदान करने के पीछे तर्क दिया कि हादसे ने उसके बेटे को उसे छीन लिया, लेकिन ये अंग किसी जरूरतमंद के काम आएंगे ताकि उनको नई जिंदगी मिल सके। मुश्किल की घड़ी में जहां लोग सुधबुध खो देते हैं, वहीं गहरे सदमे में होते हुए कुलदीप ने धैर्य से काम लेते हुए अपने लाड़ले के अंग दान कर दिए। ऐसा करके न केवल वे दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत बने हैं, बल्कि उनका यह कदम आंखें, किडनी, लीवर और हार्ट खराब होने की वजह से जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे लोगों की जिंदगी में उजाला लाएगा। पीजीआई चंडीगढ़ में मंगलवार रात जैसे ही पारस की मौत हुई तो पिता ने दुख को एक पल के लिए भुलाकर बेटे के अंगदान करने का निर्णय लिया। हालांकि, अंगदान करने का यह फैसला पारस की मां को रास नहीं आया, लेकिन कुलदीप फैसले पर अड़िग रहते हुए कागजी औपचारिकताएं पूरी करने में जुट गए।

बुधवार को सारी औपचारिकताएं पूरी होने पर उन्होंने अपने लाड़ले के अंग दान कर दिए। संजौली चौकी के प्रभारी आशीष सैमुअल ने कुलदीप द्वारा अपने बेटे की आंखें, किडनी, हार्ट और लीवर दान किए जाने की पुष्टि की है। उन्होंने कुलदीप की हिम्मत की सराहना की और कहा कि ऐसी घड़ी में इस तरह का फैसला लेने के लिए अदम्य साहस होना चाहिए।

तेरह वर्षीय पारस शहर के सेंट एडवर्ड स्कूल का छात्र था। वह छठी कक्षा में पढ़ता था। 27 जुलाई को स्कूल से छुट्टी होने के बाद पारस अपनी मां रानी राठौर के साथ अपने क्वार्टर जा रहा था। वह अपने माता-पिता के साथ संजौली के इंजनघर में रहता था। स्कूल से उतरने के बाद वह मां के साथ पैदल कालाढांक क्रॉस कर रहा था कि शिमला की तरफ से तेज रफ्तार कार आई और उसे जोरदार टक्कर मारकर आगे निकल गई। कार से टक्कर लगने के बाद पारस कई फीट ऊपर उछला और फिर सिर के बल नीचे गिरा। इससे उसको सिर पर गहरी चोट आई। मगर हेड इंजरी होने के कारण उसे रात को ही पीजीआई रेफर कर दिया गया। सिर पर लगी गंभीर चोट से वह कोमा में चला गया और उसे वेंटीलेटर पर रखा गया। वेंटीलेटर पर पारस ने मंगलवार रात को अंतिम सांस ली।

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