2009 की सिफारिशें लागू की जाएँ, हिमाचल में चलने वाली बसों के लिए ठोस बस बाड़ी बनाई जाये

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विषय : ठोस बस बाडी बनाये सरकार
बस गिरते ही बिखर जाती है छत और खिड़कियाँ
20 वर्ष पहले की स्पेसिफिकेशन के आधार पर बने नई बस बाडी —
हिमाचल में बस हादसों से मरने वालों की संख्या में अवश्य कमी आएगी –
सड़क दुर्घटना में कमी की हिप्पा कार्यशाला 2009 की सिफारशें लागू की जाएँ

चालक लाइसेंस की enlarge photocopy बस के फ्रंट शीशे पर चसपान की जानी चाहिए ताकि सही चालक की पहचान हो सके !
माडर्न बाडी वाली /full शीशों वाली निजी बसें हिमाचल में चलने के लिए पासिंग न की जाए

महोदय ,आपके ध्यानार्थ इस उम्मीद से लाना चाहते हैं की भेजे गए निम्न सुझावों पर सरकार /प्रशासन व विभाग के उच्च अधिकारी जरूर गौर फरमाएंगे ताकि हिमाचल में बढ़ते सड़क हादसों में जो बसें गिरते ही जर्जर हालत में बिखर जाती है और जिस कारण बस में सवार सवारियों की मृत्यु अधिक से अधिक होती हैं उनमे कमी आ सके ! यही दृश्य चम्बा से हिमगिरी जाने वाली बस में तथा अन्य होने वाले बस हादसों में भी देखने को मिली है !

महोदय,हिमाचल में होने वाले सड़क हादसों में बस गिरते ही मृतकों की संख्या बढ़ने पर बस बाड़ी ठोस न होने को मुख्य कारण देखा गया है ! प्राय: देखा गया है की बस ज्यादा खाई भी न होने पर सड़क से नीचे लुढ़कने पर ही एक दम बिखर जाती है और शीशों का भाग व छत एकदम चूर -चूर हो जाती है जिस कारण बस में सवार सवारियाँ एक दम बाहर गिर जाती हैं और ज्यादा से ज्यादा चोटें व मृत्यु लोगों की हो जाती है !

महोदय,पूर्व समय में भी बस की खिड़की की फ्रेम और छत बनाने में लकड़ी का इस्तेमाल ज्यादा किया जाता था जिस कारण यदि बस गहरी खाई में गिरने से काफी पलटे भी ले लेती थी तब भी बस बाडी नहीं इतनी जल्दी नहीं बिखरती थी जिससे मौते भी कम होती थी और सवारियों को भी कम चोटें लगती थी !

महोदय,आज के समय में निजी बसों में व सरकारी बसों में भी ठोस बाडी की जगह सुंदर दिखने वाली बॉडी और ज्यादा बड़े शीशों को ज्यादा एहमियत दी जा रही है जिस कारण बस गिरते ही solid न होने के कारण एकदम बिखर जाती है और ज्यादा से ज्यादा सवारियां मौत के शिकार हो जाती हैं तथा चोटें भी ज्यादा लगती हैं !

महोदय हमारा प्रदेश सरकार /प्रशासन /विभाग के उच्च अधिकारियों को सुझाव है की हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में पुराने निर्धारित नियमों के अनुसार बस बाड़ी बनाई जाए तथा नियमों में संशोधन किया जाये तथा उन्ही बसों को इस पहाड़ी राज्य में निजी क्षेत्र में चलने के लिए रूट परमिट दिये जाएँ तथा पास किया जाये जो निर्धारित शर्तों को पूरा करता हो !

महोदय,सड़क हादसों में कमी लाने के उद्देश्य से परिवहन विभाग ने वर्ष 2009 में हिप्पा में Road Accident Mitigation की एक कार्यशाला 23.11.2009 से 27.11.2009 तक आयोजित की थी और उसमे विभाग के अनुभवी अधिकारी /कर्मचारी मौजूद थे तथा मुझे भी विभाग ने विशेषरूप से आमंत्रित किया था जिनमे कुछ अनुभवी इंजीनीयरों ने ठोस बस बाडी बनाए जाने पर भी अपनी सिफ़ारिशें दी थी जिन्हे जनहित में अन्य सिफ़ारिशों सहित सर्वसम्मति से सरकार को अमल में लाने की पुरजोर सिफ़ारिशें की गई थी जिसमे चालक के लाईसेंस की फोटोकापी बस के फ्रंट शीशे पर चसपान की भी सिफ़ारिश की गई थी !

महोदय,बहुत ही खेद का विषय है की विभाग पूर्व धूमल सरकार व उच्च -अधिकारियों की समय -समय पर की गई घोषणा करने पर भी आज तक बस चालक के लाईसेंस की फोटो कापी का चसपान सुनिश्चित न कर सका जिससे सही चालक की पहचान हो सके और सड़क हादसे कम हो सके !

महोदय, मेरा यह मानना है की यदि उस कार्यशाला में सिफ़ारिशों को अक्षरत: लागू किया जाये तो निश्चित रूप से बस हादसों व सड़क हादसों में भारी कमी आएगी और नौसिखिया चालकों पर भी लगाम लगेगी !

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