ठोस बस बाड़ी बनाने का निर्णय ले सरकार,मृतकों की संख्या में कमी आएगी, हादसे पर अफ़सोस जताया

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ठोस बस बाडी बनाये सरकार
बस गिरते ही बिखर जाती है छत और खिड़कियाँ
20 वर्ष पहले की स्पेसिफिकेशन पर बने बस बाडी
हिमाचल में बस हादसों से मरने वालों की संख्या में कमी आएगी
हिमगिरी बस हादसे पर समिति ने जताया रोष
चालक लाइसेंस की कापी का चसपान किया जाए-फ्रंट शीशे पर
माडर्न बाडी वाली बसें पासिंग न की जाए

हिमाचल प्रदेश पहाड़ी राज्य में बढ़ते सड़क हादसों में बसें गिरते ही जर्जर हालत में बिखर जाती है जिस कारण सवारियों की मौत अधिक से अधिक होती हैं ! यही कारण है की चम्बा से हिमगिरी जाने वाली बस में भी देखने को मिली है ! विकास समिति टुटू अध्यक्ष नागेन्द्र गुप्ता ने हिमाचल में होने वाले सड़क हादसों में बस गिरते ही मृतकों की संख्या बढ़ने पर बस बाड़ी ठोस न होने को मुख्य कारण बताया है ! उन्होेने कहा की पूर्व समय में बस की खिड़की और छत बनाने में लकड़ी का इस्तेमाल ज्यादा किया जाता था जिस कारण यदि बस गहरी खाई में गिरने से पलटे भी लेती थी तब भी बाडी नहीं बिखरती थी जिससे मौते भी कम होती थी और सवारियों को भी कम चोटें लगती थी ! गुप्ता ने कहा की आज के समय में ठोस बाडी जगह सुंदर दिखने वाली बॉडी और ज्यादा बड़े शीशों को एहमियत दी जा रही है जिस कारण बस गिरते ही बिखर जाती है और ज्यादा से ज्यादा सवारियां मौत के शिकार हो जाते हैं ! उन्होंने सरकार को सुझाव दिया है की हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में पुराने निर्धारित नियमों के अनुसार बस बाड़ी बनाई जाए या पासिंग की जाए ! गुप्ता ने कहा की सड़क हादसों में कमी लाने के उद्देश्य से परिवहन विभाग ने वर्ष 2009 में हिप्पा में एक कार्यशाला आयोजित की थी यदि सरकार उस कार्यशाला में सिफारिश की गई बस बाड़ी बनाने की शर्तों भी लागू करे तो भी सड़क हादसों में कमी आएगी !

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