पंजाब के बाउंसरों की शिमला में गुंडागर्दी, जेसीबी से तोड़ दिया मकान

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शिमला – पंजाब के बाउंसरों ने शिमला में खूब गुंडागर्दी मचाई। यही नहीं, जमीन पर कब्जा छुड़ाने के नाम पर मारपीट की और परिवार को जबरन घर से निकाल दिया। जेसीबी मशीन के साथ जमीन पर चढ़ाई कर दी। वहां एक मकान में रह रहे परिवार को जबरन घर से बाहर किया। उनके साथ मारपीट की और आंखों में स्प्रे कर दी। किसी को कुछ बता न पाएं, इसलिए सारे मोबाइल भी छीन लिए।

घर की महिला और उसकी बेटी को भी हमलावरों ने नहीं बख्शा। आरोप है कि हमलावरों ने लड़की के साथ छेड़खानी भी की। घर का सारा सामान बाहर फेंक दिया और उसके बाद जेसीबी से मकान को तोड़ दिया। पुलिस ने मौके पर पहुंच कर स्थिति को संभाला और करीब बीस बाउंसरों को गिरफ्तार किया है।

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पुलिस के मुताबिक यह जमीनी विवाद काफी पुराना है। इस जमीन पर बने मकान में मौजूदा समय में नेकराम शांडिल अपने परिवार के साथ रहता है। उसने पुलिस को बताया कि शनिवार सुबह चार बजे कुछ अज्ञात लोगों ने उसे आवाज देकर उठाया, जब वह घर से बाहर निकला तो एक व्यक्ति ने उसकी आंखों में स्प्रे किया, जिसके बाद उसे कुछ भी नहीं दिखाई दिया।

घर के सभी सदस्यों को खींच खींच कर बाहर निकाला और उन्हें जान से मारने की धमकी दी। उसके बाद जेसीबी से घर तोड़ दिया। शिकायतकर्ता ने अंदेशा जताया कि जमीन को हथियाने के मकसद से इस वारदात के पीछे साईं कंपनी का हाथ हो सकता है। उधर, एसपी डीडब्ल्यू नेगी ने कहा कि इस संदर्भ में थाना बालूगंज में मामला दर्ज कर सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर आगामी छानबीन अमल में लाई जा रही है।

1960 से जमीन पर कर रहे काश्तकारी

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इस मामले में वेद प्रकाश ठाकुर ने कहा कि उनके पिता भगतराम ठाकुर साल 1960 से इस जमीन पर काश्तकारी कर रहे हैं। वहां बारह बिस्वा जमीन पर मकान बना हुआ है, जहां जमीन की देखरेख के लिए नेकराम शांडिल और उनके परिवार के सदस्य भी रहते हैं। जिस महिला से यह जमीन खरीदी गई उनके साथ उनका विवाद चल रहा है और अदालत में मामला है।

सुबह चार बजे हथियार बंद करीब चालीस पचास गुंडे उनके मकान में आए और घर के सदस्यों को बाहर कर मारपीट की। घर को जेसीबी से तोड़ दिया। वहां से उन्हें किसी ने कॉल कर वारदात की सूचना दी। वहां पहुंचे तब तक मकान तोड़ दिया गया था। पुलिस ने मौके पर पहुंच कर बीस लोगों को गिरफ्तार किया जबकि बाकी फरार होने में कामयाब हो गए।

जमीन के खरीदार हेम सिंह ठाकुर का कहना है कि इसमें सांई इंजीनियरिंग का नाम बेवजह घसीटा जा रहा है। जबकि उन्होंने तीन अन्य लोगों के साथ अप्रैल 2015 में यह जमीन खरीदी है। जमीन का सौदा करीब सात करोड़ में हुआ। यह 30 बीघा जमीन है, जिस जमीन पर मकान गिराने की बात कर रहे हैं वह भी उन्हीं की जमीन का हिस्सा है।

इस जमीन पर फेंसिंग करने के लिए उन्होंने दिनेश नेगी नाम के ठेकेदार को ठेका दिया था। उसकी लेबर ही जमीन पर काम करने के इरादे से गई थी। पुलिस प्रशासन ने उलटा उन्हीं के लोगों पर केस बना दिया। वेद प्रकाश ठाकुर की ओर से लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। वह कोई बाउंसर नहीं, ठेकेदार की लेबर के लोग थे।
Images and Text: AmarUjala

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