देश का मत्स्य केन्द्र बन कर उभरा गोबिन्दसागर जलाश्य

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gobind sagar himachal

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“8 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की 1400 से अधिक मीट्रिक टन मत्स्य उत्पादन से 30 मछुआरा सहकारी समितियों से सम्बन्धित 2500 मछुआरों की आय में व्यापक वृद्धि हुई है, उन्होंने कहा कि वर्ष 2011-12 के दौरान गोबिन्दसागर जलाश्य केवल 620 टन मत्स्य उत्पादन हुआ, जो वर्तमान उत्पादन के आधे से भी कम है”

प्रधान सचिव मत्स्य तरूण श्रीधर ने आज यहां कहा कि गोबिन्दसागर जलाश्य में इस वित्त वर्ष के दौरान रिकार्ड मत्स्य उत्पादन हुआ है। उन्होंने कहा कि 8 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की 1400 से अधिक मीट्रिक टन मत्स्य उत्पादन से 30 मछुआरा सहकारी समितियों से सम्बन्धित 2500 मछुआरों की आय में व्यापक वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2011-12 के दौरान गोबिन्दसागर जलाश्य केवल 620 टन मत्स्य उत्पादन हुआ, जो वर्तमान उत्पादन के आधे से भी कम है।तरूण श्रीधर ने कहा कि विभाग के कुशल प्रबन्धन एवं प्रयासों के साथ-साथ मछुआरा समुदाय की कुशलता से उत्पादन स्तर में वृद्धि हुई है। जलाश्य मत्स्य विकास के लिए मत्स्य उत्पादन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इस दिशा में विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा कि 17 मिलीयन लीगल साईज तथा व्यावसायिक तौर पर आयातीत जैनेटिक कार्प के गुणात्मक बीजों को एकत्रित किया गया। इसके अतिरिक्त वर्ष भर इनका सवंर्द्धन सुनिश्चित बनाया गया। चिन्हित मछुआरों को उपदानयुक्त कार्यक्रम के अन्तर्गत गुणात्मक गिलनेट उपलब्ध करवाए गए। इसके अतिरिक्त मछुआरों के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए।

इन प्रयासों के परिणामस्वरूप मत्स्य उत्पादन में रिकार्ड वृद्धि दर्ज की गईए जिससे मछुआरों की मासिक आय में भी आशातीत वृद्धि हुई। उन्होंने कहा कि देश के बड़े जलाश्यों में गोबिन्दसागर जलाश्य में गत तीन दशकों से प्रति हेक्टेयर उत्पादन स्तर सर्वाधिक रहा है। इस वर्ष 131 किलोग्राम हेक्टेयर का उत्पादन विशेष उपलब्धि हैए क्योंकि यह एफएओ रिपोर्ट के अनुसार 11.4 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की राष्ट्रीय औसत से लगभग 12 गुणा अधिक है। प्रधान सचिव ने कहा कि विभिन्न एजेंसियों द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार यहां 150 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के मत्स्य उत्पादन किया जा सकता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि विभाग आगामी वर्षों में इस लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल होगा।
Image:www.trekearth.com

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