देव भूमि हिमाचल के जिला कांगड़ा के बैजनाथ में नहीं मनाया जाता है दशहरा

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Shiva_temple_baijnath_Himachal

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“हिमाचल के जिला कागड़ा के बैजनाथ क्षेत्र में नहीं मनाया जाता है विजय दशमी का पर्व बैजनाथ में शिवलिंग के रुप में विराजमान है, भगवान शिव आज तक बैजनाथ क्षेत्र में रावण के सम्मान में दशहरा नही मनाया जाता है, वहीं स्थानीय लोगों को यह विश्वास है कि जो भी व्यक्ति यहां दशहरा मनाने की कोशिश करता है साल भर के अंदर उस व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है”

जहां एक और पुरे भारत में बुराई पर अच्छाई की विजय के रुप में रावण दहन करके लोग दशहरे के पर्व को मनाते है वहीं देवभूमि हिमाचल में एक अकेला और एकमात्र ऐसा स्थान है जिला कंागड़ा का बैजनाथ क्षेत्र जहां दशहरा नहीं मनाया जाता है।

जिला कागंड़ा के बैजनाथ में स्थित है बैजनाथ धाम जहां शिव स्वंय एक शिवलिंग के रुप में विराजमान है ,पौराणिक कथाओं के अनुसार लंका नरेश रावण जो कि शिव भगवान का सबसे बड़ा भक्त था उसने अपनी भक्ति से भगवान शिव को प्रसंन करने के लिए इस स्थान पर तप्सया की थी और अपने दस सर काट कर हवन कुडं़ में भगवान शिव को समर्पित कर दिए थे , जिससे प्रसंन हो कर भगवान शिव ने न केवल रावण को दशानन का यानि दस शिशों का वरदान दिया , इसके साथ ही भगवान शिव ने रावण को अपराजयता और अमरत्व का भी वरदान दिया। बैजनाथ धाम मंदिर का निर्माण पाड़वों द्वारा उनके अज्ञातवास के दौरान केवल एक ही रात में किया गया है और आज भी इस मंदिर में वो हवन कुड़ स्थापित है जहां रावण ने अपने दस सिरों की आहुति दी थी और इसके साथ ही इस स्थान पर रावण चरण पादुका मंदिर भी स्थापित है जहां रावण के एक चरण के चिन्ह भी है , उसी समय से लेकर आज तक बैजनाथ क्षेत्र में रावण के शिव के परम भक्त होने के सम्मान में दशहरा नही मनाया जाता है।

वहीं स्थानीय लोगों को यह मानना है कि जो भी व्यक्ति यहां दशहरा मनाने की कोशिश करता है साल भर के अंदर उस व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है इसके साथ ही यहां के लोगों का यह भी कहना है कि जो भी सुनार बैजनाथ में अपने सोने के दुकान खोलने की कोशिश करता है तो उसकी दुकान जल कर राख हो जाती है और यही कारण है जिसकी वजह से इस क्षेत्र में सोने की एक भी दुकान नहीं है।

बैजनाथ में साक्षात शिव के दर्शनांे के लिए लोग दूर दूर से आते है और मंदिर की पुरानी कला से भी अवगत होते है मंदिर की दिवारों के पत्थरों पर उकेरी की गई देवी देवताओं की सुदंर कृतियां अद्भुत है और यह कृतियां प्राचीन कला से लोगों को रुबरु करवाती है , यहां आने वाले श्रधालुओं की भगवान शिव सभी मनोकामनाएं पूरी करते है और हैरानी की बात तो यह है की यहाँ पर लोग शिव के साथ रावन को भी याद करते है ।

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