कोयले घोटाले को लेकर फिर घिरी केंद्र सरकार

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“कोयले की कालिख से पहले से ही परेशान केन्द्र की संप्रग सरकार एक और मुश्किल में घिर गई है दरअसल , सरकार पर आरोप है उसने सीबीआई द्वारा तैयार इस मामले की स्टेटस रिपोर्ट बदलवा दी है”

अंग्रेजी अखबार ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक़ इस मामले पर पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट देने से पहले सीबीआई ने कानून मंत्री अश्विनी कुमार और प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ बैठकें की थीं।

अखबार के मुताबिक कानून मंत्री के साथ सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में इस रिपोर्ट में कई संशोधन सुझाए गए थे और सीबीआई ने इन्हें मान लिया। अखबार के अनुसार इस बैठक में सीबीआई के निदेशक रंजीत सिन्हा भी मौजूद थे। बीजेपी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

अखबार के मुताबिक कोल ब्लॉक आवंटन पर सीबीआई की फाइनल रिपोर्ट को कानून मंत्री अश्विनी कुमार और प्रधानमंत्री दफ्तर के अधिकारियों ने प्रभावित किया था। अखबार के मुताबिक कानून मंत्री ने रिपोर्ट बदलवाई। 2006 से 2009 के बीच हुए कोल ब्लॉक आवंटन में हुई गड़बड़ियों पर ये रिपोर्ट सीबीआई ने 8 मार्च को कोर्ट को सौंपी थी।

अखबार का दावा है कि रिपोर्ट कोर्ट में सौंपने से पहले कानून मंत्री ने देखना चाहा कि इस मुद्दे पर शास्त्री भवन में सीबीआई अधिकारियों और कानून मंत्रालय के अधिकारियों के बीच बैठक हुई। इस बैठक में रिपोर्ट में बदलाव के सुझाव दिए गए, जिनमें से कुछ बदलाव को मंजूरी भी दी गई। अखबार के मुताबिक इस बैठक में शामिल सीबीआई के एक अधिकारी ने बताया कि उन्होंने अपनी तरफ से बदलाव का विरोध किया था, लेकिन फिर सरकारी अधिकारियों की बात माननी पड़ी।

विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने भी इस मामले में सरकार से सफाई मांगी है और इस घोटाले की जांच विशेष जांच दल ; एसआईटी से कराने की मांग की है। जेटली ने कहा, यूपीए एक ‘दुष्ट’ सरकार है, जो सीबीआई को स्वतंत्र रूप से काम नहीं करने देगी।

वहीं सीबीआई के पूर्व डायरेक्टर जोगिंदर सिंह का कहना है कि सीबीआई कॉन्सटिट्यूशनल बॉडी नहीं है। सीबीआई किसी स्टेट पुलिस की तरह ही हैए जो इंडिपेंडेंट नहीं है और न ही किसी ने इसे इंडिपेंडेंट करने की कोशिश ही की।

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