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एच.पी.यू के करोड़ो के इ.आर.पी सिस्टम की सुरक्षा की खुली पोल, रिजल्ट घोषित हुआ नहीं फिर भी छात्र कर रहे डाउनलोड

HP University ERP System hacking 1

शिमला– हिमाचल प्रदेश विश्विद्यालय की एक और बड़ी लापरवाही का कारनामा सामने आया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के इकाई अध्यक्ष विशाल सकलानी ने कहा है कि विश्वविद्यालय की ई.आर.पी. प्रणाली में गड़बड़ियों का स्तर बढ़ता ही जा रहा है। प्रशाशन टेस्टिंग के नाम पर छात्रों का गलत परिणाम घोषित करता आया है, लेकिन इस बार तो बिना टेस्टिंग के ही छात्र टोरेंट सॉफ्टवेयर से वह रिजल्ट डाउनलोड कर रहे हैं जो अभी घोषित ही नहीं हुए। जिसकी वजह से एक बार फिर पूरे प्रदेश के छात्रों को मानसिक तनाव जैसी स्थिति में डाल दिया है।

उन्होंने कहा है कि जिस तरह से परिणाम घोषित हुए बिना किसी अन्य सॉफ्टवेयर से लिंक बदल कर डाउनलोड हो रहे हैं वह परिणामों की गोपनीयता पर सवाल खड़ा करता है और ई.आर.पी (ERP) को एक बार फिर सवालों के घेरे में खड़ा करता है।

जब यह जानकारी सामने आई कि मात्र एक टोरंट अपल्लिकएशन से बी.ए (BA),बी.एस.सी(B.Sc),बी.कॉम (B.Com) के छात्रों के परिणाम डाउनलोड हो रहे है। टोरंट आम तौर पर मनोरंजक वीडियो देखने और फिल्मे डाउनलोड करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एप्लिकेशन है। उन्होंने कहा है कि प्रशाशन ने जैसे तैसे ए ग्रेड ले लिया हो लेकिन अभी भी मामूली समस्याओं का निपटारा नहीं हो पा रहा है।

ये भी पढ़ें:एचपीयू के छः करोड़ ईआरपी घोटाले में जांच की मांग, निजी कंपनी को फायदा पहुँचाने के लिए छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप

ए ग्रेड यूनिवर्सिटी में डी ग्रेड ई.आर.पी कब तक?

विशाल ने यह भी कहा है कि अगर ऐसे ही टेस्टिंग के नाम पर विश्वविद्यालय गलत परिणाम घोषित करने लगे और मात्र एक टोरंट एप्लिकेशन में आसानी से परिणाम मिलने लगे तो ऐसे में विश्वविद्यालय की ई.आर.पी प्रणाली की गुणवत्ता और गोपनीयता का स्तर गिरता नजर आता है। प्रसाशन ने ई.आर.पी. के लिए करोड़ों का बजट निकाल कर वाहवाहियां लूटी लेकिन वास्तव में परिणाम सबके सामने हैं।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थी परिषद लंबे समय से प्रशाशन को ई.आर.पी. की खामियों को लेकर सचेत करने का काम कर रही है। विद्यार्थी परिषद के बार-2  ई.आर.पी. की खामियों को दूर करने की मांग उठाने के बावजूद खामियों का स्तर बढ़ा है।

उन्होंने कहा कि इस बार तो लापरवाही की सारी हदें प्रशासन ने पार कर दी हैं , जब बिना घोषणा के परिणाम एक सॉफ्टवेयर से छात्र डाउनलोड कर रहे हैं। ऐसे में ऑनलाइन प्रणाली में गोपनीयता को लेकर ढील बरती गई है। यह समस्त छात्र समुदाय के साथ धोखा है और उन्होंने मांग की है कि कम्पनी के ऊपर भी कार्यवाही की जाए व उनका उत्तरदायित्व सुनिश्चित किया जाए ताकि ऐसी लापरवाही भविष्य में न हो।

उन्होंने मांग की है कि विश्वविद्यालय की ऑनलाइन प्रणाली को सुदृढ़ किया जाए और जो भी खामियां इस ऑनलाइन प्रणाली में हैं उन्हें दूर करे ताकि छात्रों को समस्याओं का सामना न करना पड़े। ऑनलाइन सिस्टम का लक्ष्य छात्रों को सहूलियत प्रदान करना है लेकिन इसकी खामियों के कारण छात्र अनेक समस्याओं का सामना कर रहे हैं।

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पहाड़ी खेती की बारीकियां जानने के लिए नौणी विवि के 51 बागवानी छात्र करेंगे किसानों के साथ काम

UHF Nauni RAWE programme 1

सोलन– किसानों की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों और उनके द्वारा अपनाई जाने वाली कृषि तकनीकों से छात्रों को परिचित करवाने के उद्देश्य से डॉ॰ यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी व वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के बीएससी औद्यानिकी के अंतिम वर्ष के 51 छात्र चार सप्ताह के रुरल अवेयरनेस वर्क एक्सपिरियन्स (Rural Awareness Work Experience (RAWE) प्रोग्राम के लिए रवाना होंगें। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के मानदंडों के अनुसार रावे प्रोग्राम, डिग्री का अनिवार्य हिस्सा है और छात्रों को कार्यक्रम के दौरान एक वेतनमान भी दिया जाता है।

छात्रों को दो समूहों में बांटा गया है और यह छात्र राज्य के सभी चार कृषि जलवायु क्षेत्रों में किसानों के साथ काम करेंगे। हिमाचल के चार कृषि जलवायु क्षेत्रों कुल्लू, जाछ, चंबा और कंडाघाट में नौणी विवि के क्षेत्रीय अनुसंधान और कृषि विज्ञान केंद्र इन छात्रों की मेजबानी करेंगे। एक सप्ताह की अवधि के बाद, छात्र नए जलवायु क्षेत्र में जाएंगे, जिससे निर्धारित अवधि में सभी जलवायु क्षेत्रों को कवर किया जा सकेगा।

प्रत्येक जोन के अंतर्गत गांवों के एक समूह का चयन किया गया है और छात्रों के छोटे उप समूहों को प्रत्येक गांव से जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य संस्कृति को समझने के साथ-साथ ग्रामीण, सामाजिक सांस्कृतिक परिस्थिति, ग्रामीण विकास, जलवायु परिवर्तन, पशुपालन, फल, सब्जियां और सहकारी काम के बारे में सीखना है। वैज्ञानिक और किसानों की बीच बातचीत भी इस कार्यक्रम का हिस्सा होगी।

छात्रों को रवाना करने से पहले विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. परविंदर कौशल ने सभी छात्रों से बातचीत की। अपने संबोधन में उन्होंने छात्रों से इस कार्यक्रम का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आग्रह किया। डॉ कौशल ने छात्रों से कहा कि वह खुले दिमाग से जाए, क्योंकि यह उन लोगों से सीखने का एक शानदार अवसर है जो खेतों में बहुत मेहनत करते हैं।

उन्होंने कहा कि अंतिम उपयोगकर्ताओं और हमारे जैसे अन्य संस्थानों में विकसित नई और नवीन तकनीकों के सबसे बड़े हितधारकों के साथ बातचीत करने को यह एक सुनहरा मौका है। विश्वविद्यालय के एंबेसडर होने के नाते, आपको किसानों के साथ बातचीत करके, उनकी समस्याओं का विश्लेषण करने और विशेषज्ञों के परामर्श से उन्हें आसानी से लागू होने वाले वैज्ञानिक समाधान प्रदान करने के इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए।

डॉ. कौशल ने कहा कि यह कार्यक्रम विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में बागवानी और संबद्ध गतिविधियों के संबंध में ग्रामीण परिवेश को समझने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। उन्होंने छात्रों से समूह और उनकी मेजबानी करने वाले ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी कोविड़ की रोकथाम ​​​​प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने का आग्रह किया।

कार्यक्रम समन्वयक डॉ केके रैना ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण परिस्थितियों को समझना, किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता देने के साथ-साथ किसानों द्वारा अपनाई गई बागवानी प्रौद्योगिकियों की स्थिति को जानना है। ग्रामीण क्षेत्रों में सर्वांगीण विकास के लिए किसान परिवारों के साथ काम करने के कौशल और दृष्टिकोण को छात्रों में विकसित करना है और ग्रामीण क्षेत्रों में संपूर्ण विकास के लिए कृषि परिवारों के साथ काम करने का रवैया बनाना है

औदयानिकी महाविद्यालय की डीन डॉ. अंजू धीमान ने बताया कि कोविड़ के कारण पढ़ाई के व्यावहारिक पहलू में थोड़ी परेशानी हुई थी, लेकिन इस अवसर का उपयोग महत्वपूर्ण ज्ञान प्राप्त करने के लिए किया जाना चाहिए और इससे कक्षाओं में प्राप्त ज्ञान को वास्तविक दुनिया की स्थितियों में लागू करने और कार्यक्रम के दौरान प्राप्त ज्ञान छात्रों को पेशेवर रूप से विकसित होने में मदद करेगा। डॉ. हरीश शर्मा, डॉ. एमके ब्रह्मी, डॉ. रश्मी चौधरी, डॉ. प्रमोद वर्मा और डॉ अदितिका शर्मा ने भी छात्रों को संबोधित किया और उनके साथ सुझाव साझा किए।

प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण में विस्तार शिक्षण विधियों के उपयोग से छात्रों में संचार कौशल का विकास और उन्हें विस्तारित और ग्रामीण विकास कार्यक्रमों से परिचित करवाना भी रावे प्रोग्राम का एक और महत्वपूर्ण पहलू है। छात्रों को पहले से ही दो सप्ताह के उन्मुखीकरण कार्यक्रम से गुजरना पड़ता है। रावे से लौटने के बाद छात्रों को 2 महीने के लिए इंडस्ट्री अटैचमेंट भी करवाई जाएगी जिसके बाद प्रत्येक समूह द्वारा किए गए कार्य की रिपोर्ट जमा करनी होगी।

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नौणी विवि में फ्रूटस एंड वेजीटेबल प्रोसेसिंग एवं बेकरी प्रोडक्टस डिप्लोमा करने का सुनहरा अवसर

Solan-Nauni-varsity-admissions-for-diploma-2021

सोलन– डॉ वाईएस परमार औदयानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी में फ्रूटस एंड वेजीटेबल प्रोसेसिंग एवं बेकरी प्रोडक्टस पर आधारित एक साल के डिप्लोमा के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह डिप्लोमा विवि के फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग द़वारा करवाया जाता है। इस डिप्लोमा कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों को खाद्य प्रसंस्करण और बेकरी आइटम के क्षेत्र में अपने उद्यम शुरू करने के लिए प्रशिक्षित करना है।

इस कार्यक्रम के लिए शैक्षणिक योग्यता 12वीं है जबकि इसमें कोई भी आयु सीमा नहीं रखी गई है। इस साल इस कार्यक्रम में प्रवेश लेने के लिए 20 सितम्बर 2021 तक आवेदन किया जा सकता है। कार्यक्रम में कुल 35 सीटें रखीं गई हैं। विश्वविद्यालय की वैबसाइट www.yspuniversity.ac.in पर जाकर प्रोस्पेक्टस और एप्लिकेशन फॉर्म डाऊनलोड़ किया जा सकता है।

इस डिप्लोमा कार्यक्रम की फीस सिर्फ पाँच हज़ार रुपये रखी गई है।  आवेदकों को कक्षा 10वीं एवं 12वीं विस्तृत मार्कशीट की प्रतियां, स्कूल के प्रमुख या किसी राजपत्रित अधिकारी या संबंधित ग्राम पंचायत प्रधान से चरित्र प्रमाण पत्र, आरक्षण प्रमाण पत्र (यदि लागू हो) की स्व-सत्यापित प्रति, बैंक ड्राफ्ट( सामान्य श्रेणी के लिए 100 रुपये और एससी/एसटी के लिए 50 रुपये) के साथ संलग्न करना होगा।

सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन पत्र पंजीकृत या स्पीड पोस्ट द्वारा सहायक रजिस्ट्रार (अकादमिक), रजिस्ट्रार कार्यालय, डॉ यशवंत सिंह परमार औदयानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी-सोलन-173 230 को भेजना होगा। विश्वविद्यालय के कुलसचिव कार्यालय में फॉर्म जमा करवाए जा सकते हैं।

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एचपीयू के छः करोड़ ईआरपी घोटाले में जांच की मांग, निजी कंपनी को फायदा पहुँचाने के लिए छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप

ERP scame hp-university

शिमला– हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के छात्र लम्बे समय से  इ.आर.पी. (ERP) प्रणाली की खामियों पर सवाल उठाते आ रहे है।  विश्वविद्यालय प्रशासन और ERP कंपनी न केवल विश्वविद्यालय के संसाधनों को बर्बाद कर रही है बल्कि हजारों छात्रों के भविष्य  के साथ खिलवाड़ भी कर रही है। पहले विवि प्रशासन ईआरपी सिस्टम को संचालित करने के लिए अपनी किसी चहेती निजी कंपनी को आउटसोर्स करती है और फिर उसकी खामियों को दूर करने के नाम पर आठ करोड़ बजट का प्रावधान करती है। विवि के अनुसार इसमे से अभी तक ईआरपी सिस्टम को दुरुस्त करने के नाम पर लगभग छह करोड़ रुपये खर्च किये जा चुके है। लेकिन विश्वविद्यालय के सारे छात्र संघ संगठनों ने ये आरोप लगाया है कि करोड़ो खर्च करने पर भी ईआरपी सिस्टम का हाल वही फटीचर का फटीचर ही है।

जब से ईआरपी सिस्टम को विश्वविद्यालय ने अपनाया है इस पूरे प्रकरण में लगभग छः साल का समय बीत चुका है परंतु विश्वविद्यालय ने इतने लंबे समय के दौरान हमेशा ईआरपी सिस्टम की खामियों मानने से इंकार करती रही । ऑनलाइन सिस्टम होने के बावजूद भी हज़ारों छात्रों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए दूरदराज के जिलों से शिमला विवि की ओर रुख करना पड़ता है, जिससे उनका समय व पैसा दोनो बर्बाद होता है।

यही कारण है कि अब छात्र संगठन एचपीयू के ईआरपी स्कैम की न्यायिक या सीबीआई जांच की मांग उठा रहे हैं।

वहीं अगर फीस की बात की जाये तो विश्वविद्यालय इस मामले में भी पीछे नहीं है छात्रों से भारी भरकम फीस ली जाती है, वहीं अगर छात्रों के किसी दस्तावेज में कोई गलती हो और गलती भी विश्वविद्यालय प्रशासन की हो तब भी उस गलती को सुधारने के लिए भी अलग से छात्रों से ही भारी भरकम फीस ऐंठी जाती है।

वंही विश्वविद्यालय के कुलपपति राजनीति में व्यस्त रहते हैैं।  छात्रों की माने तो उन्होंने विश्वविद्यालय को आर एस एस (RSS) का अड्डा बना के रख दिया है। यही नहीं कुलपति के चयन के ऊपर भी गंभीर आरोप लगे हैं। उनपे अपनी अयोग्यता को लेकर झूठ  बोलने का आरोप है जिससे राजभवन ने भी स्वीकारा है। यंहा तक की अब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद भी उनके निक्कमेंपन से परेशान होकर उन पर सवाल कर रही है। जब छात्र संगठनों ने उनका विरोध किया या उनसे बात करनी चाहि तो कुलपति ने अपने निक्कमेंपन को छुपाने के लिए पुलिस की आड़ ली और छात्रों पर ही मुकदमें दायर करवा दिए ।

अ.भा.वि.प (ABVP) नें ई आर पी प्रणाली की गुणवत्ता पर उठाये सवाल 

अ.भा.वि.प विश्वविद्यालय इकाई अध्यक्ष विशाल सकलानी ने कहा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ई आर पी (ERP) प्रणाली की गुणवत्ता के लिए अपनी पीठ थपथपाने के मौके की तलाश में रहता है। प्रशासन विश्वविद्यालय ई आर पी प्रणाली को पूरे देश भर में सर्वोत्तम कोटि का बताती है लेकिन ई आर पी प्रणाली सवालों के घेरे में तब आती है जब हम देखते है की लगातार दूसरी बार ई आर पी की टेस्टिंग के नाम पर छात्रों के गलत परिणाम घोषित किए गए हैं, गलत परिणामों को देख छात्रों को काफी तनाव का सामना करना पड़ रहा है जबकि वास्तव में घोषित किए गए परिणाम सही नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा है कि विश्वविद्यालय ने अभी तक यूजी के छात्रों का अंतिम सत्र के परीक्षा परिणाम नहीं निकाले है, ऐसे में पूरे प्रदेश भर में ऐसे भी छात्र है जो पीजी के प्रवेश बाहरी राज्यो के विश्वविद्यालयों से लेना चाहते है लेकिन यूजी के परिणामों के बगैर अन्य विश्वविद्यालयों में प्रवेश ले पाना सम्भव नहीं हो पा रहा अगर परिणाम घोषित करने में ज्यादा समय लगाया जाता है तो छात्र प्रवेश नहीं ले पाएगा।

अध्यक्ष ने बी.एड (B.Ed) के प्रथम और तृतीय सत्र के परिणामों को घोषित करने की भी मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने बी.एड (B.Ed) के लिए प्रथम सत्र की प्रवेश परीक्षाएं करवा ली है। लेकिन अभी पिछले साल के पहले और तीसरे सत्र के परिणाम घोषित नहीं किए है। उन्होंने बीबीए (BBA) और बीसीए (BCA) के रि-अपीयर के परिणाम घोषित करने की मांग उठाते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने काफी लंबे समय से बीबीए (BBA) और बीसीए (BCA) के छात्रों के रि-अपीयर के परिणाम नहीं निकाले है, इसलिए विश्वविद्यालय प्रशासन छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए परिणामों को जल्द से जल्द घोषित करे।

ये कहना है एनएसयूआई (NSUI) का 

एन.एस.यू.आई के इकाई उपाध्यक्ष रजत भारद्वाज पोन्टू ने कहा है कि प्रदेशभर से हज़ारों छात्रों की शिकायतें उन्हें मिली जिसमे छात्र जब अपने पोर्टल पर रिजल्ट देखत है तो वहां पास शो करता है और दो दिन बाद रिजल्ट में फेल या कोई अनियमितताएं शो करता है। इन सभी कारणों से विवि और कॉलेजों के छात्र कई वर्षों से परेशान है। ऐसे में एनएसयूआई ने ईआरपी (ERP) घोटाले की न्यायिक जांच की मांग की है।

एनएसयूआई ने एचपीयू परीक्षा नियंत्रक को ज्ञापन सौंप कर कोरोना महामारी के चलते छात्रों के लिए प्रदेश के सभी जिलों में पीजी के परीक्षा केंद्रों को खोलने की भी मांग की है। इसके अतिरिक्त विश्विद्यालय लाइब्रेरी के 24 ऑवर सेक्शन को तत्काल छात्रों के लिए खोलने सहित पिछले लंबित सभी पीजी व यूजी परीक्षा परिणामों को जल्द घोषित करने की मांग उठाई।

निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने के चक्कर में छात्रों की जिंदगी से खिलवाड़: एसएफआई (SFI)

एस.एफ.आई (SFI) सचिव रॉकी का कहना है कि छात्र छः सालों से इ आर पी (ERP) प्रणाली पर सवाल उठा रहे थे तब तो विश्वविद्यालय प्रशासन हमेशा से इस चीज को अस्वीकार करता रहा और इस बेकार सिस्टम के कसीदे पढ़ता रहा। ऐसे में सवाल उत्पन होता है कि आज तक जिन छात्रों का भविष्य इस सिस्टम की वजह से बर्बाद हुआ है उसकी भरपाई कैसे की जाएगी।

एसएफआई ने आरोप लगाया कि एक निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने के चक्कर में छात्रों की जिंदगी से खिलवाड़ किया गया है। अगर इस सिस्टम को स्थापित करने के लिए छः करोड से ज्यादा का खर्च विश्वविद्यालय वहन कर रहा है कहीं ना कहीं यह चीज संदेह के दायरे में आती है कि इतने बड़े बजट का दुरुपयोग कहां हुआ। इस पूरे सिस्टम को लेकर तथा इसको स्थापित करने की प्रक्रिया को लेकर सीबीआई जांच होनी चाहिए ताकि यह साफ हो सके की कहीं अधिकारियों के द्वारा कंपनी के साथ सांठगांठ करके उस पैसे को डकार तो नहीं लिया गया है।

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