कांग्रेस के 2 पार्षद, 1 कार्यकर्ता दुष्प्रचार व पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए पार्टी से निष्काषित

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Shimla Urban Congress expels

पार्टी विरोधी गतिविधियो मे जो भी पदाधिकारी संलिप्त पाया गया है उसे तुरंत प्रभाव से निष्काषित करने के निर्देश पार्टी हाई कमान से मिले हैं जिसके तहत तुरंत कार्यवाही की जा रही है।

शिमला: विर्द्रोहियों से परेशान कांग्रेस पार्टी ने मतदान पूरा होने के बाद फिर अपने उन कार्यकर्ताओं की छंटनी करना शुरू कर दी है जो कांग्रेस छोड़ विद्रोही नेताओं के प्रचार में लगे थे।

शिमला शहरी कॉंग्रेस कमेटी अध्यक्ष प्रदीप सिंह भुजजा ने शुक्रवार को पार्टी विरोधी गतिविधियो मे सलिप्त होने के कारण तीन और सदस्यो को छः वर्षो के लिए पार्टी से निष्काषित कर दिया दिया।

शिमला शहरी काँग्रेस कमेटी के प्रवक्ता दीपक सुंदरियाल ने जानकारी देते हुए बताया कि इनमें पार्षद अर्चना धवन, पार्षद इंद्रजीत सिंह व कार्यकारी सदस्य अशोक सूद पार्टी शामिल हैं। पार्टी ने इनकी प्राथमिक सदस्यता को 6 वर्षो के लिए रद्द कर दिया है।

भुजजा ने कहा कि जिन सदस्यो का निष्कासन किया गया है उनसे कई मर्तबा पार्टी प्रत्याशी के पक्ष मे प्रचार करने के लिए आग्रह किया गया था तथा पार्टी विरोधी गतिविधियों से दूर रहने की अपील की गई थी उसके बावजूद उन्होने दुष्प्रचार किया व कार्यकर्ताओ को पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए बर्गलाया।

भुजजा ने बताया कि ये सदस्य आम कार्यकर्ता व जनता मे पार्टी प्रत्याशी के विरुद्ध दुष्प्रचार करने, निर्दलीय प्रत्याशी को पार्टी प्रत्याशी के रूप मे पेश करने व पार्टी की छवि को खराब करने में शामिल पाए गए।

भुजजा ने कहा कि पार्टी विरोधी गतिविधियो मे जो भी पदाधिकारी संलिप्त पाया गया है उसे तुरंत प्रभाव से निष्काषित करने के निर्देश पार्टी हाई कमान से मिले हैं जिसके तहत तुरंत कार्यवाही की जा रही है।

भुजजा ने चेताया है कि यदि आगे भी किसी कार्यकर्ता या पदाधिकारी की पार्टी विरोधी गतिविधियो मे संलिप्तता की सूचना मिलती है उसे तुरंत प्रभाव से निष्काषित किया दिया जायेगा।
ज्ञात रहे कि कांग्रेस मतदान से पूर्व ही एक दर्ज़न से ज्यादा कार्यकर्ताओं और नेताओं को निष्काषित कर चुकी है जो टिकेट न मिलने पर बिफर गये थे। हरीश जनारथा भी इस सूचि में शामिल हैं।

हरभजन सिंह भज्जी को शिमला शहरी से टिकेट मिलने पर जनारथा ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन भर दिया था। पार्टी ने चेतावनी दी थी कि अगर वो अपना नामांकन वापिस नहीं लेते हैं तो उनपर करवाई की जाएगी।

लेकिन जनारथा ने नामांकन वापिस न लेकर अपने ख़ास समर्थकों के साथ पूरी ताकत और पैसा अपने प्रचार में झोंक दिया। इसके पश्चात् उन्हें छः अन्य सदस्यों के साथ पार्टी से निष्काषित कर दिया गया था।

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