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सुरजेवाला ने मोदी से मांगे इन गंभीर सवालों के जवाब, कहा जुमला बाबू’ फिर आए हैं ‘जुमलों की बारिश’ लेकर

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HP polls 2017 Surjewala statement on PM Modi

मोदी ने कहा था कि सरकार बनने पर सेब के आयात पर ‘इंपोर्ट ड्यूटी’ (आयात शुल्क) कई गुना बढ़ा दी जाएगी अब मोदी सरकार के शासन में 3 लाख टन से अधिक सेब अमेरिका,चीन,न्यूज़ीलैंड से आ रहा है, पर सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है।

शिमला: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने एक विस्तृत बयान जारी करते हुए भाजपा पर सवालों कि बौछार की।

सुरजेवाला ने मोदी की काँगड़ा में हुई जनसभा का मजाक उड़ाते हुए कहा कि ‘जुमला बाबू’ फिर ‘जुमलों की बारिश’ लेकर आए हैं।

सुरजेवाला ने कहा कि साल 2015 में नरेंद्र मोदी सरकार ने हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों के ‘विशेष राज्य का दर्जा’ खत्म कर दिया। सत्ता के शतरंज की झूठी गोटियां बिठाने के लिए अप्रैल, 2017 में इसे फिर बहाल कर दिया।

सुरजेवाला ने कहा कि मुख्यमंत्री, वीरभद्र सिंह ने मोदी सरकार से ‘विशेष श्रेणी पर्वतीय राज्य’’ के दर्जे की राशि देने का कई बार अनुरोध किया, जिसे मोदी ने ठुकरा दिया।

उन्होंने कहा कि पूर्व केंद्रीय कांग्रेस सरकार द्वारा मंजूर कर 90ः10 के अनुपात में 2767 करोड़ रु. की राशि 2014-15 में मिली। इसके बाद आज तक हिमाचल को केंद्रीय सरकार द्वारा फूटी कौड़ी नहीं दी गई।

सुरजेवाला ने कहा कि 29 अप्रैल, 2014 को मंडी में मोदी ने कहा कि उनकी सरकार बनने पर चंडीगढ़ से लद्दाख तक हिमालय रेल नेटवर्क बनाएंगे। 41 महीने बाद रेल मंत्रालय का जवाब है कि ऐसा कोई विचार नहीं।

उन्होंने कहा कि 29 अप्रैल, 2014 को सोलन रैली में मोदी ने वायदा किया कि उनकी सरकार बनने पर सेब के आयात पर ‘इंपोर्ट ड्यूटी’ (आयात शुल्क) कई गुना बढ़ा दी जाएगी, ताकि सेब उत्पादकों को संरक्षण मिले। सुरजेवाला ने कि अब मोदी सरकार के शासन में 3 लाख टन से अधिक सेब अमेरिका/चीन/न्यूज़ीलैंड से आ रहा है, पर मोदी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।

सुरजेवाला ने कहा कि 29 अप्रैल, 2014 को मोदी ने पालमपुर की रैली में हिमाचल को ‘पर्यटन का स्वर्ग’ बना सबको रोजगार दिलवाने का वायदा किया था। पर 41 महीने में मोदी सरकार ने हिमाचल को पर्यटन के नाम पर न फूटी कौड़ी दी, न कोई नया प्रोजेक्ट।

सुरजेवाला ने कहा कि 27 अप्रैल, 2017 को मोदी ने ‘उड़ान’ स्कीम (उड़े देश का हर नागरिक) की शुरुआत दिल्ली-शिमला उड़ान से कर टिकट का रेट 2036 रुपया बताया व कहा कि अब हवाई चप्पल पहनने वाला हर व्यक्ति हवाई जहाज में सफर कर सकेगा।

पर 6 महीने बाद नतीजा यह कि दिल्ली-शिमला जहाज या तो चलता नहीं और चलता है तो टिकट का दाम 15000 रु. से अधिक है।

उन्होंने कहा कि नोटबंदी कि वजह से नरेंद्र मोदी भारत के इतिहास में दूसरे ‘मुहम्मद-बिन-तुगलक’ के तौर पर जाने जाएंगे।

उन्होंने मोदी और भाजपा से सवाल किये कि आखिर, ‘काला धन’ कहां गया?

उन्होंने कहा कि 8 नवंबर, 2016 को नोटबंदी के समय चलन में 15.44 लाख करोड़ में से ₹15.28 लाख करोड़ वापस आ चुके हैं। इसका मतलब है कि केवल 16000 करोड़ अब तक वापस नहीं आए।

सुरजेवाला ने कहा कि भूटान, नेपाल व अदालतों में जमा पैसे की गणना के बाद ये 16,000 करोड़ भी वापस आ जाएंगे। मोदी जी और जेटली जी ने 5 लाख करोड़ काला धन वापस न आने का दावा किया था। सुरजेवाला ने पूछा कि प्रधानमंत्री बताएं कि काला धन कहां है!

प्रधानमंत्री, मोदी और वित्तमंत्री, जेटली नवंबर, 2016 से मई, 2017 तक यह घोषणाएं करते रहे कि उनकी सरकार ने कालाधनधारकों पर वार करते हुए कुल 17,526 करोड़ की ‘छिपी हुई आय’ (Undisclosed income) का पता लगाया है।

सुरजेवाला ने कहा कि केंद्रीय कांग्रेस सरकार ने अकेले साल 2013-14 में कालाधनधारकों की 1,01,183 करोड़ ‘छिपी हुई आय’ पकड़ी थी, जो 600 प्रतिशत अधिक है।

सुरजेवाला ने कहा कि मोदी ने कहा था कि नोटबंदी का असली कारण ‘जाली नोट’ पकड़ना है। यहां तक वित्त मंत्रालय ने भी दिनांक 8 नवंबर, 2016 की अपनी प्रेस विज्ञप्ति में बताया था कि नोटबंदी जाली नोट पकड़ने के लिए की गई थी।

सुरजेवाला ने कहा कि आरबीआयी (RBI)रिपोर्ट से यह दावा भी खोखला साबित हुआ। वापस आए 15.28 लाख करोड़ नोटों में से केवल 41 करोड़ करेंसी नोट ही जाली पाए गए, यानि केवल 0.0013 प्रतिशत।

उन्होंने पूछा कि जब 99.998 प्रतिशत नोट असली हैं, तो ‘जाली नोट’ कहां हैं? क्या यह एक और ‘जुमला’ है?

नोटबंदी का एक और कारण दिया गया था कि इसका लक्ष्य ‘आतंकवाद और नक्सलवाद’ पर लगाम लगाना है।

सुरजेवाला ने कहा कि आंकड़े इस दावे को भी झूठा साबित कर देते हैं। नोटबंदी के बाद अकेले जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की 50 बड़ी घटनाएं हुई हैं, जिनमें सेना के 80 जवान शहीद हुए और 51 नागरिक मारे गए।

नोटबंदी के बाद 17 बड़े नक्सली हमले हुए हैं, जिनमें 69 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए और 86 नागरिक मारे गए।

उन्होंने कहा कि छोटे, लघु उद्योगों व असंगठित क्षेत्रों में 3.72 करोड़ लोगों की नौकरियां छिन गयी! देश की ळक्च् में 2 प्रतिशत का घाटा कर (9.2 प्रतिशत से 5.7 प्रतिशत) लोगों की आय को 3 लाख करोड़ से अधिक का नुकसान पहुंचा!

सुरजेवाला ने इल्ज़ाम लगया ‘एक देश, एक टैक्स’ के नाम पर भाजपा सरकार ने सात से अधिक टैक्स दरें लागू कर दीं। यह दरें (0.25 प्रतिशत, 3 प्रतिशत, 5 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत, 28 प्रतिशत और 40 प्रतिशत) दुनिया में सबसे अधिक हैं।

भाजपा सरकार ने ‘रोटी, कपड़ा और मकान’ पर बेतहाशा टैक्स लगा आम जनमानस की कमर तोड़ दी है।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने कपड़ा उद्योग, चमड़ा उद्योग व आभूषण उद्योग पर टैक्स लगा उसे बंद करने की कगार पर क्यों खड़ा कर दिया और खेती पर पहली बार टैक्स लगाया गया !

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हिमाचल की तीन ग्राम पंचायतों में 435 एकड़ भूमि पर लगे 76,000 से अधिक सेब के पौधे

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शिमला- डॉ यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के विस्तार शिक्षा निदेशालय में पहाड़ी कृषि एवं ग्रामीण विकास एजेंसी(हार्प), शिमला द्वारा एक अनुभव-साझाकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया।

इस कार्यशाला में जिला किन्नौर के निचार विकास खंड के रूपी, छोटा कम्बा और नाथपा ग्राम पंचायतों के 34 किसानों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर जीएम नाबार्ड डॉ. सुधांशु मिश्रा मुख्य अतिथि रहे जबकि नौणी विवि के अनुसंधान निदेशक डॉ रविंदर शर्मा ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की।

संस्था के अध्यक्ष डॉ. आर एस रतन ने कहा कि यह कार्यक्रम एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना के तहत रूपी, छोटा कम्बा और नाथपा ग्राम पंचायतों में वर्ष 2014 से आयोजित किया जा रहा है। परियोजना को नाबार्ड द्वारा वित्त पोषित किया गया है और इसे हार्प द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।

उन्होंने यह बताया कि यह एक बागवानी आधारित आजीविका कार्यक्रम है जिसे किसानों की भागीदारी से लागू किया गया है। इन तीन ग्राम पंचायतों में 435 एकड़ भूमि पर 76,000 से अधिक सेब के पौधे लगाए गए हैं और 607 परिवार लाभान्वित हुए हैं।

डॉ. सुधांशु मिश्रा ने यह भी कहा कि नाबार्ड हमेशा सामाजिक-आर्थिक उत्थान कार्यक्रमों के संचालन में आगे रहा है। उन्होंने इस कार्यशाला में भाग लेने वाले किसानों से अपने सहयोग से विभिन्न कार्यक्रमों को सफल बनाने का आग्रह किया।

अनुसंधान निदेशक डॉ. रविंदर शर्मा और विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. दिवेंद्र गुप्ता ने नाबार्ड और हार्प के प्रयासों की सराहना की और किसानों को आश्वासन दिया कि विश्वविद्यालय किसानों को तकनीकी रूप से समर्थन देने के लिए हमेशा तैयार है।

डॉ. नरेद्र कुमार ठाकुर ने कहा कि हार्प ने कृषक समुदाय के समन्वय से दुर्गम क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों में काम किया है। इस अवसर पर एक किसान-वैज्ञानिक परिचर्चा का भी आयोजन किया गया जिसमें भाग लेने वाले किसानों के तकनीकी प्रश्नों को संबोधित किया गया।

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हिमाचल सरकार पुलिसकर्मियों का कर रही है शोषण

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पुलिसकर्मियों की डयूटी बेहद सख्त है,कई-कई बार तो चौबीसों घण्टे वर्दी व जूता उनके शरीर में बंधा रहता है।थानों में खाने की व्यवस्था तीन के बजाए दो टाइम ही है,राजधानी शिमला के कुछ थानों के पास अपनी खुद की गाड़ी तक नहीं है,हैड कॉन्स्टेबल से एएसआई बनने के लिए सत्रह से बीस वर्ष भी लग जाते हैं।

शिमला सीटू राज्य कमेटी ने प्रदेश सरकार पर कर्मचारी विरोधी होने का आरोप लगाया है। कमेटी ने यह कहा है कि वह हिमाचल प्रदेश के पुलिसकर्मियों की मांगों का पूर्ण समर्थन करती है। आरोप लगाते हुए सीटू ने कहा है कि प्रदेश सरकार पुलिसकर्मियों का शोषण कर रही है।

राज्य कमेटी ने प्रदेश सरकार से यह मांग की है कि वर्ष 2013 के बाद नियुक्त पुलिसकर्मियों को पहले की भांति 5910 रुपये के बजाए 10300 रुपये संशोधित वेतन लागू किया जाए व उनकी अन्य सभी मांगों को बिना किसी विलंब के पूरा किया जाए।

सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा व महासचिव प्रेम गौतम ने प्रदेश सरकार पर कर्मचारी विरोधी होने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जेसीसी बैठक में भी कर्मचारियों की प्रमुख मांगों को अनदेखा किया गया है। उन्होंने कहा कि जेसीसी बैठक में पुलिसकर्मियों की मांगों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है।

सीटू कमेटी ने कहा कि सबसे मुश्किल डयूटी करने वाले व चौबीस घण्टे डयूटी में कार्यरत पुलिसकर्मियों को इस बैठक से मायूसी ही हाथ लगी है। इसी से आक्रोशित होकर पुलिसकर्मी मुख्यमंत्री आवास पहुंचे थे। उनके द्वारा पिछले कुछ दिनों से मैस के खाने के बॉयकॉट से उनकी पीड़ा का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मियों के साथ ही सभी सरकारी कर्मचारी नवउदारवादी नीतियों की मार से अछूते नहीं है। कमेटी ने कहा कि पुलिसकर्मियों की डयूटी बेहद सख्त है। कई-कई बार तो चौबीसों घण्टे वर्दी व जूता उनके शरीर में बंधा रहता है।

कमेटी ने यह भी कहा है कि थानों में स्टेशनरी के लिए बेहद कम पैसा है व आईओ को केस की पूरी फ़ाइल का सैंकड़ों रुपये का खर्चा अपनी ही जेब से करना पड़ता है। थानों में खाने की व्यवस्था तीन के बजाए दो टाइम ही है। मैस मनी केवल दो सौ दस रुपये महीना है जबकि मैस में पूरा महीना खाना खाने का खर्चा दो हज़ार रुपये से ज़्यादा आता है। यह प्रति डाइट केवल साढ़े तीन रुपये बनता है, जोकि पुलिस जवानों के साथ घोर मज़ाक है। यह स्थिति मिड डे मील के लिए आबंटित राशि से भी कम है।

उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के जमाने के बने बहुत सारे थानों की स्थिति खंडहर की तरह प्रतीत होती है जहां पर कार्यालयों को टाइलें लगाकर तो चमका दिया गया है परन्तु कस्टडी कक्षों,बाथरूमों,बैरकों,स्टोरों,मेस की स्थिति बहुत बुरी है। इन वजहों से भी पुलिस जवान भारी मानसिक तनाव में रहते हैं।

सीटू ने कहा कि पुलिस में स्टाफ कि बहुत कमी है या यूं कह लें कि बेहद कम है व कुल अनुमानित नियुक्तियों की तुलना में आधे जवान ही भर्ती किये गए हैं जबकि प्रदेश की जनसंख्या पहले की तुलना में काफी बढ़ चुकी है यहाँ तक पुलिस के पास रिलीवर भी नहीं है।

आरोप लगाते हुए कमेटी ने कहा कि प्रदेश की राजधानी शिमला के कुछ थानों के पास अपनी खुद की गाड़ी तक नहीं है। वहीं पुलिस कर्मी निरन्तर ओवरटाइम डयूटी करते हैं। इसकी एवज में उन्हें केवल एक महीना ज़्यादा वेतन दिया जाता है। इस से प्रत्येक पुलिसकर्मी को वर्तमान वेतन की तुलना में दस से बारह हज़ार रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है। उन्हें लगभग नब्बे साप्ताहिक अवकाश,सेकंड सैटरडे,राष्ट्रीय व त्योहार व अन्य छुट्टियों के मुकाबले में केवल पन्द्रह स्पेशल लीव दी जाती है।

सीटू कमेटी ने यह भी कहा कि वर्ष 2007 में हिमाचल प्रदेश में बने पुलिस एक्ट के पन्द्रह साल बीतने पर भी नियम नहीं बन पाए हैं। इस एक्ट के अनुसार पुलिसकर्मियों को सुविधा तो दी नहीं जाती है परन्तु कर्मियों को दंडित करने के लिए इसके प्रावधान बगैर नियमों के भी लागू किये जा रहे हैं जिसमें एक दिन डयूटी से अनुपस्थित रहने पर तीन दिन का वेतन काटना भी शामिल है। पुलिसकर्मियों की प्रोमोशन में भी कई विसंगतियां हैं व इसका टाइम पीरियड भी बहुत लंबा है। हैड कॉन्स्टेबल से एएसआई बनने के लिए सत्रह से बीस वर्ष भी लग जाते हैं।

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किन्नौर में लापता पर्यटकों में से 2 और के शव बरामद, 2 की तालाश जारी,आभी तक कुल 7 शव बरामद

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शिमला रिकोंगपिओ में 14 अक्तुबर को उत्तरकाशी के हर्षिल से छितकुल की ट्रैकिंग पर निकले 11 पर्यटकों में से लापता चार पर्वतारोहीयों में से दो  पर्वतारोहियों के शवो को आई.टी.बी.पी व पुलिस दल द्वारा पिछले कल सांगला लाया गया था जहां सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सांगला में दोनों शवों का पोस्टमार्टम किया गया।

यह जानकारी देते हुए उपायुक्त किन्नौर अपूर्व देवगन ने बताया कि इन दोनों की पहचान कर ली गई है जिनमे मे एक उतरकाशी व दूसरा पश्चिम बंगाल से सम्बंधित था।

उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन किन्नौर द्वारा आज एक शव वाहन द्वारा उतरकाशी को भेज दिया गया है जहाँ शव को जिला प्रशासन उतरकाशी को सौंपा जाएगा। जब कि दूसरा शव वाहन द्वारा शिमला भेजा गया है जिसे शिमला में मृतक के परिजनों को सौंपा जायेगा।

उपायुक्त अपूर्व देवगन ने बताया कि अभी भी लापता दो  पर्यटकों की तलाश आई.टी.बी.पी के जवानों द्वारा जारी है। उल्लेखनीय है कि गत दिनों उतरकाशी से छितकुल के लिये 11 पर्वतारोही ट्रेकिंग पर निकले थे जो बर्फबारी के कारण लमखंगा दर्रे में फंस गये थे जिसकी सूचना मिलने पर जिला प्रशासन द्वारा सेना के हेलीकॉप्टर व आई.टी.बी.पी के जवानों की सहायता से राहत व बचाव कार्य आरम्भ किया था। सेना व आई.टी.बी.पी के जवानों ने 21 अक्टूबर को दो पर्यटकों को सुरक्षित ढूंढ निकाला था। इसी दौरान उन्हें अलग अलग स्थानों पर पाँच ट्रेकरों के शव ढूंढ निकलने में सफलता मिली थी। जबकि 4 पर्यटक लापता थे जिसमे से राहत व बचाव दल को 22 अक्तुबर को 2 शव ढूढ़ निकालने में सफलता मिली थी। अभी भी दो पर्यटक लापता हैं जिनकी राहत व बचाव दल द्वारा तलाश जारी है।

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