नेरवा बस हादसा: 47 सवारियों में से केवल 2 ही बचा पाए जान, तकनीकी खराबी के बावजूद तेजरफ्तार में थी बस

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हादसे की वजह बस की अगली कमानी का मुख्य पट्टा टूटना बताया जा रहा है,नेरवा बस हादसे की जांच के लिए आरटीओ शिमला की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन कर दिया गया है।

शिमला- जिला शिमला के नेरवा की टौंस नदी में बुधवार सुबह उत्तराखंड की एक प्राइवेट बस के गिर जाने से उसमें सवार 44 लोगों की मौत हो गई। हादसे में बस में सवार मात्र दो लोग ही बचे, जो समय रहते बाहर कूद गए थे। खबर लिखे जाने तक 22 शवों की ही शिनाख्त हो पाई थी, जिनमें से 16 उत्तराखंड के और 6 हिमाचली थे।

हादसा करीब पौने 11 बजे लालढांग-पांवटा-रोहड़ू-रामपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर गुम्मा के समीप हुआ। जानकारी के मुताबिक उत्तराखंड के विकासनगर से तिऊणी जा रही जैन ट्रैवल्स विकासनगर की बस (यूके 16 पीए 0045)गुम्मा से आधा किलोमीटर आगे जाकर करीब हजार फुट नीचे टौंस नदी में जा गिरी। हादसा इतना भयंकर था कि बस करीब सात सौ फुट हवा में लहराते हुए ढांक से बाहर निकली हुई एक चट्टान से टकराई व इसके परखचे उड़ गए। हादसा इतना भयंकर था कि बस में सवार लोगों के खून से लथपथ शव इधर-उधर बिखर गए। शव इस तरह क्षत-विक्षत हो गए थे कि उनकी शिनाख्त करना भी मुश्किल था।

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हादसा स्थल पर टौंस नदी का पानी भी रक्त से लाल हो गया था। परिजनों ने लाशों की पहचान शरीर के निशानों व कपड़ों से की। बस हादसे में जहां 45 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, वहीं इसमें सवार दो भाग्यशाली लोग बच भी गए। हादसे की वजह बस की अगली कमानी का मुख्य पट्टा टूटना बताया जा रहा है।

जिस समय पट्टा टूटने पर बस अनियंत्रित हुई, उसी समय बस का परिचालक तुलसी राम उतर गया और बस के पिछले दरवाजे से एक स्थानीय युवक रोहित को भी बाहर खींच लिया। लिहाजा इन दोनों की जान बच गई। दुर्घटना की खबर फैलते ही चौपाल का प्रशासनिक अमला एकदम हरकत में आ गया व एसडीएम चौपाल अनिल चौहान की अगवाई में दुर्घटना स्थल पर पहुंच कर बचाव व राहत कार्यों में जुट गया।

इस दल में डीएसपी चौपाल मुनीश धाड़वाल, एसएचओ नेरवा नरेंदर, नायब तहसीलदार नेरवा मोहि राम चौहान व पटवारी हलका सुरेश हरजेट शामिल थे। थोड़ी ही देर में डीसी शिमला रोहन चंद ठाकुर भी दुर्घटना स्थल पर पहुंच गए व राहत कार्यों का जायजा लिया।

प्रशासन की ओर से मृतकों के परिजनों को 50-50 हजार रुपए प्रदान किए गए। स्थानीय लोगों ने भी राहत व बचाव कार्य में सराहनीय योगदान दिया, जबकि उत्तराखंड प्रशासन की और से पुलिस का पहला जवान तीन बज कर आठ मिनट पर घटनास्थल पर पहुंचा। उत्तराखंड प्रशासन की ओर से नायब तहसीलदार चकराता पहुंचे अवश्य थे, परंतु वह खाली हाथ ही आए थे। उत्तराखंड प्रशासन की ओर से शवों पर एक अदद कफन तक नहीं डाला गया, जिस कारण लोगों में आक्रोश व्याप्त था।

नेरवा बस हादसे की जांच के लिए आरटीओ शिमला की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन कर दिया गया है। यह समिति एक हफ्ते के भीतर हादसे के कारणों की जांच रिपोर्ट पेश करेगी। उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मृतकों के आश्रितों के लिए एक लाख की मदद के साथ गंभीर घायलों के लिए 50 हजार रुपए की मदद दिए जाने का ऐलान किया है।

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